पंचायत चुनाव की स्थिति साफ नहीं: अब 25 दिन की प्रधानी बची, प्रशासनिक समितियां संभाल सकती हैं बागडोर
मुरादाबाद की 643 ग्राम पंचायतों में प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने में सिर्फ 25 दिन बचे हैं। अभी तक इस मामले में सरकार ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है। ऐसे में 27 मई के बाद पंचायत व्यवस्था में बदलाव तय माना जा रहा है। संभावना है कि कार्यकाल खत्म होने पर प्रशासक या समिति के जरिए कामकाज चले, जिसमें मौजूदा प्रधानों को भी शामिल किया जा सकता है।
विस्तार
मुरादाबाद जिले की 643 ग्राम पंचायतों में प्रधानों के कार्यकाल का काउंटडाउन शुरू हो गया है। अब सिर्फ 25 दिन की प्रधानी शेष है लेकिन अभी तक न तो न्यायालय का आदेश आया है और न ही प्रदेश सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। परिस्थितियों को देखकर ऐसा लगता है कि 27 मई से ग्राम पंचायतों की व्यवस्था में बदलाव होना तय है।
सांविधानिक व्यवस्था के तहत कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रशासक नियुक्त होंगे या फिर समिति बनाकर कार्य संचालन होगा। इस बार संभावना है कि सरकार इन्हीं प्रधानों की सहभागिता में समिति गठित कर सकती है, जिसे प्रधानों के लिए तोहफा माना जा सकता है।
हाईकोर्ट में मुरादाबाद के अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन ने ग्राम पंचायतों के चुनाव समय पर कराए जाने को लेकर याचिका दाखिल की थी। जिसकी सुनवाई की तिथि 30 अप्रैल थी लेकिन पिछली चार तिथियों की तरह ही इस पांचवीं तिथि पर भी न्यायालय में किसी कारण सुनवाई नहीं हो सकी।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता ने बताया कि जब तक सुनवाई नहीं होती, तब कुछ नहीं कहा जा सकता है लेकिन कल की तिथि पर सुनवाई नहीं होने से इतना तो तय हो गया कि अब समय पर पंचायत चुनाव संभव नहीं लगता है, क्योंकि याचिका का आधार ही यही है कि आर्टिकल 243 ई के तहत प्राविधान है कि पंचायतों के चुनाव पांच साल के अंदर ही होने चाहिए।
प्रधान की अध्यक्षता में बन सकती है प्रशासनिक समिति
जिले की महिला ब्लाक प्रमुख ने बताया कि ऐसा नहीं है कि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाया नहीं जा सकता, उत्तराखंड और राजस्थान में ऐसा पहले हुआ है कि लेकिन व्यवस्था में यह आंशिक बदलाव संभव है कि इस बार ग्राम पंचायतों के संचालन के लिए समिति गठित की जाए, उसमें मौजूदा ग्राम प्रधान और दो अन्य सदस्यों (ग्राम पंचायत सदस्यों) को शामिल करके तीन सदस्यीय प्रशासनिक समिति गठित की जाए।
इससे व्यवस्था भी बदल जाएगी और अप्रत्यक्ष रूप से प्रधान का कार्यकाल भी बढ़ जाएगा। ऐसा स्पष्ट तो नहीं कहा गया लेकिन 28 अप्रैल को पंचायती राज मंत्री की बैठक में ब्लाक प्रमुखों की मौजूदगी में ऐसे संकेत जरूर मिले हैं।
कार्यकाल खत्म होना तो तय
जिला पंचायत राज अधिकारी आलोक शर्मा के अनुसार चुनाव तो चुनाव आयोग ही कराएगा। प्रशासकीय व्यवस्था को लागू करना सरकार के हाथ में होता है। लेकिन अभी कोई स्पष्ट आदेश नहीं है। यह तय है कि प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो जाएगा, क्योंकि ग्राम पंचायतों की पहली बैठक इसी दिन हुई थी।
सरकार अभी चुनाव नहीं कराना चाहती
सरकार शायद चुनाव अभी कराना ही नहीं चाहती है। सांविधानिक व्यवस्थाएं दो हैं, जिसमें पहली है प्रशासक बैठाना और दूसरी तीन सदस्यीय प्रशासनिक समिति गठित कर उसे पंचायत के संचालन का अधिकार देना। समिति की व्यवस्था तब होती है, जब प्रधान हो, कार्यकाल भी बचा है लेकिन कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक समिति की व्यवस्था को सही नहीं माना जा सकता। -मोहम्मद उस्मान, अध्यक्ष भारतीय ग्राम प्रधान संगठन
कार्यकाल बढ़ाने की व्यवस्था नहीं
सरकार की मंशा शायद ग्राम पंचायतों का चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद कराने की हो सकती है। लेकिन प्रधानों का कार्यकाल सीधे तौर पर एक साल बढ़ाने की कोई व्यवस्था संविधान में नहीं है। यदि सरकार कैबिनेट की बैठक में कोई व्यवस्था पारित करती है तो अलग बात है। प्रशासक या समिति गठित करके संचालन की व्यवस्था है। -इम्तियाज हुसैन, अधिवक्ता
