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Muzaffarnagar News: हल करें पुराने प्रश्नपत्र...आसान हो जाएगी बोर्ड परीक्षा
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मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की इंटरमीडिएट की हिंदी विषय की परीक्षा 18 फरवरी को निर्धारित है। परीक्षा की घड़ी नजदीक आते ही छात्रों की चिंताएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में, बेहतर तैयारी के लिए पूर्व वर्षों के प्रश्न पत्रों का अध्ययन अत्यंत लाभदायक सिद्ध हो सकता है। यह न केवल बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति को समझने में मदद करता है, बल्कि छात्रों के अभ्यास को भी मजबूत करता है।
भागवंती सरस्वती विद्या मंदिर की सहायक आचार्य निर्मला शर्मा ने हिंदी विषय की तैयारी की योजना को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उनका मानना है कि छात्रों को परीक्षा को एक अवसर के रूप में देखना चाहिए, न कि तनाव के रूप में। समय का सदुपयोग करते हुए, हिंदी विषय को रटने के बजाय समझने पर जोर देना चाहिए।
व्याकरण का लिखकर अभ्यास करने से हल करने की विधि स्मरण हो जाती है, जिससे परीक्षा में आसानी होती है। गद्य, पद्य और कहानी खंड के मुख्य बिंदुओं को बार-बार दोहराने से विषय पर पकड़ मजबूत होती है।
इन बिंदुओं पर विशेष ध्यान दें
निर्मला शर्मा ने छात्रों को कुछ विशेष बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है। मुहावरे, लोकोक्तियां और संधि जैसे व्याकरणिक विषयों के लिए प्रतिदिन अभ्यास का समय निकालना आवश्यक है। पिछले पांच वर्षों के मॉडल पेपर हल करने से परीक्षा पैटर्न की अच्छी समझ विकसित होती है। निबंध लेखन और संस्कृत अनुवाद पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि ये खंड परीक्षा में महत्वपूर्ण अंक दिलाते हैं।
खंडकाव्य और निबंध लेखन की रणनीति
छात्रों को यह समझना चाहिए कि किस खंड से कितने प्रश्न पूछे जाएंगे और उनके अंक विभाजन की क्या योजना है। रस, अलंकार और छंद के लक्षण व उदाहरणों को याद करना महत्वपूर्ण है। संस्कृत गद्यांश और पद्यांश का हिंदी में अनुवाद करने का नियमित अभ्यास करना चाहिए। जिलावार निर्धारित खंडकाव्य के मुख्य पात्रों का चरित्र-चित्रण याद रखना भी आवश्यक है। निबंध लिखते समय रूपरेखा, प्रस्तावना, मुख्य विषय और उपसंहार को अवश्य शामिल करें, ताकि एक सुगठित और प्रभावी निबंध तैयार हो सके।
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भागवंती सरस्वती विद्या मंदिर की सहायक आचार्य निर्मला शर्मा ने हिंदी विषय की तैयारी की योजना को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उनका मानना है कि छात्रों को परीक्षा को एक अवसर के रूप में देखना चाहिए, न कि तनाव के रूप में। समय का सदुपयोग करते हुए, हिंदी विषय को रटने के बजाय समझने पर जोर देना चाहिए।
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व्याकरण का लिखकर अभ्यास करने से हल करने की विधि स्मरण हो जाती है, जिससे परीक्षा में आसानी होती है। गद्य, पद्य और कहानी खंड के मुख्य बिंदुओं को बार-बार दोहराने से विषय पर पकड़ मजबूत होती है।
इन बिंदुओं पर विशेष ध्यान दें
निर्मला शर्मा ने छात्रों को कुछ विशेष बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है। मुहावरे, लोकोक्तियां और संधि जैसे व्याकरणिक विषयों के लिए प्रतिदिन अभ्यास का समय निकालना आवश्यक है। पिछले पांच वर्षों के मॉडल पेपर हल करने से परीक्षा पैटर्न की अच्छी समझ विकसित होती है। निबंध लेखन और संस्कृत अनुवाद पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि ये खंड परीक्षा में महत्वपूर्ण अंक दिलाते हैं।
खंडकाव्य और निबंध लेखन की रणनीति
छात्रों को यह समझना चाहिए कि किस खंड से कितने प्रश्न पूछे जाएंगे और उनके अंक विभाजन की क्या योजना है। रस, अलंकार और छंद के लक्षण व उदाहरणों को याद करना महत्वपूर्ण है। संस्कृत गद्यांश और पद्यांश का हिंदी में अनुवाद करने का नियमित अभ्यास करना चाहिए। जिलावार निर्धारित खंडकाव्य के मुख्य पात्रों का चरित्र-चित्रण याद रखना भी आवश्यक है। निबंध लिखते समय रूपरेखा, प्रस्तावना, मुख्य विषय और उपसंहार को अवश्य शामिल करें, ताकि एक सुगठित और प्रभावी निबंध तैयार हो सके।
