Shamli: ई-रजिस्ट्री के विरोध में अधिवक्ताओं की हड़ताल, तीनों तहसीलों में तालाबंदी, रजिस्ट्री कार्य ठप
शामली, कैराना और ऊन तहसीलों में ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टाम्प वेंडरों ने हड़ताल कर तालाबंदी की। रजिस्ट्री कार्य पूरी तरह ठप रहा।
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ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में मंगलवार को शामली जनपद की तीनों तहसीलों शामली, कैराना और ऊन में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टाम्प विक्रेताओं तथा टाइपिस्टों ने संयुक्त रूप से हड़ताल कर विरोध प्रदर्शन किया।
उपनिबंधक कार्यालयों पर तालाबंदी किए जाने से पूरे जनपद में रजिस्ट्री कार्य पूरी तरह ठप रहा और आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। अधिवक्ताओं और संबंधित संगठनों ने सरकार के ई-रजिस्ट्री संबंधी प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे आजीविका पर संकट बताया और निर्णय वापस लेने की मांग की।
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जिला बार एसोसिएशन ने लिया हड़ताल का फैसला
जिला बार एसोसिएशन की बैठक अध्यक्ष विजेंद्र कुमार की अध्यक्षता में जिला बार भवन में आयोजित हुई। बैठक में ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को लेकर गहरा असंतोष व्यक्त किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मंगलवार से शनिवार तक सभी अधिवक्ता, दस्तावेज लेखक, स्टाम्प विक्रेता और कंप्यूटर ऑपरेटर पूर्ण हड़ताल पर रहेंगे। निर्णय के बाद उपनिबंधक कार्यालय पर तालाबंदी कर धरना शुरू कर दिया गया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई।
कैराना में मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
कैराना तहसील में उत्तर प्रदेश दस्तावेज लेखक संघ के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम 17 सूत्रीय ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपा गया। पदाधिकारियों ने कहा कि ई-रजिस्ट्री व्यवस्था लागू होने से हजारों लोगों के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
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ऊन तहसील में पांच दिवसीय हड़ताल शुरू
तहसील ऊन में भी अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टाम्प विक्रेताओं और टाइपिस्ट संघ ने संयुक्त रूप से पांच दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है। अध्यक्ष सत्यवीर सिंह एडवोकेट की अध्यक्षता में हुई बैठक में 16 जून से 20 जून तक पूर्ण हड़ताल रखने का निर्णय लिया गया। इस दौरान उपनिबंधक कार्यालय में किसी भी प्रकार का रजिस्ट्री कार्य नहीं किया जाएगा।
आम जनता को उठानी पड़ी परेशानी
हड़ताल के चलते रजिस्ट्री से जुड़े सभी कार्य प्रभावित रहे। कई लोग अपने जरूरी कार्यों के लिए तहसीलों के चक्कर लगाते नजर आए, लेकिन रजिस्ट्री कार्यालय बंद होने के कारण उन्हें निराश लौटना पड़ा। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।