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Pilibhit News: दस्तावेजों का दुरुपयोग कर निकाला लाखों का लोन, विरोध पर धमकाया
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sun, 31 May 2026 10:38 PM IST
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पीलीभीत। शहर कोतवाली क्षेत्र में एक जिला पंचायत कर्मचारी के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर लाखों रुपये के फर्जी लोन लेने का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर कोर्ट के आदेश के बाद आरोपी और उसके पिता के खिलाफ पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की।
निरंजनकुंज कॉलोनी निवासी जिला पंचायत कर्मचारी उमाशंकर ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि तीन साल पहले उनकी मुलाकात मोहल्ला फैजुल्ला खां निवासी संजीव वर्मा से हुई थी। मार्च 2024 में संजीव ने उनके मोबाइल फोन, आधार कार्ड और पैन कार्ड समेत अन्य दस्तावेज लिए। आरोप है कि संजीव ने नेट बैंकिंग के माध्यम से उमा शंकर के नाम पर 50 हजार रुपये का लोन कराया। उमाशंकर ने यह राशि ब्याज सहित कुल 57,859 रुपये नकद संजीव को वापस कर दी थी। संजीव ने कहा था कि उसने अपने खाते से लोन की रकम जमा कर दी है। इसके बावजूद संजीव वर्मा ने उमाशंकर के दस्तावेजों का दुरुपयोग किया। उसने उनकी जानकारी के बिना विभिन्न निजी वित्तीय कंपनियों से कई और लोन प्राप्त कर लिए। संजीव ने पूरी धनराशि स्वयं हड़प ली।
उमाशंकर को इस धोखाधड़ी की जानकारी मिली। विभिन्न लोन कंपनियों से वसूली के लिए लगातार फोन आने लगे। आरोपी संजीव ने 12 मार्च 2024 से 12 मार्च 2025 के बीच उमा शंकर से लगभग 1,53,540 रुपये प्राप्त किए। यह राशि यूपीआई और फोनपे के माध्यम से ली गई थी। इसके अतिरिक्त, संजीव पर 90 हजार रुपये नकद लेने का भी आरोप है। इस प्रकार कुल मिलाकर तीन लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई।
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29 मार्च 2026 को उमा शंकर अपनी रकम वापस मांगने संजीव के घर पहुंचे। वहां संजीव और उसके पिता जगदीश प्रसाद ने उनके साथ गाली-गलौज की। विरोध करने पर उन्हें धमकाया भी गया। कोतवाल सत्येंद्र कुमार ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
निरंजनकुंज कॉलोनी निवासी जिला पंचायत कर्मचारी उमाशंकर ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि तीन साल पहले उनकी मुलाकात मोहल्ला फैजुल्ला खां निवासी संजीव वर्मा से हुई थी। मार्च 2024 में संजीव ने उनके मोबाइल फोन, आधार कार्ड और पैन कार्ड समेत अन्य दस्तावेज लिए। आरोप है कि संजीव ने नेट बैंकिंग के माध्यम से उमा शंकर के नाम पर 50 हजार रुपये का लोन कराया। उमाशंकर ने यह राशि ब्याज सहित कुल 57,859 रुपये नकद संजीव को वापस कर दी थी। संजीव ने कहा था कि उसने अपने खाते से लोन की रकम जमा कर दी है। इसके बावजूद संजीव वर्मा ने उमाशंकर के दस्तावेजों का दुरुपयोग किया। उसने उनकी जानकारी के बिना विभिन्न निजी वित्तीय कंपनियों से कई और लोन प्राप्त कर लिए। संजीव ने पूरी धनराशि स्वयं हड़प ली।
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उमाशंकर को इस धोखाधड़ी की जानकारी मिली। विभिन्न लोन कंपनियों से वसूली के लिए लगातार फोन आने लगे। आरोपी संजीव ने 12 मार्च 2024 से 12 मार्च 2025 के बीच उमा शंकर से लगभग 1,53,540 रुपये प्राप्त किए। यह राशि यूपीआई और फोनपे के माध्यम से ली गई थी। इसके अतिरिक्त, संजीव पर 90 हजार रुपये नकद लेने का भी आरोप है। इस प्रकार कुल मिलाकर तीन लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई।
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