पीलीभीत: खकरा नदी का पानी कचहरी के बाद विकास भवन तक पहुंचा, सड़कों पर जलभराव से आवागमन प्रभावित
पीलीभीत में खकरा नदी का पानी बुधवार को कलक्ट्रेट क्षेत्र में घुस गया, जिससे कचहरी और पोस्टमार्टम मार्ग पर जलभराव हो गया। बुधवार रात यह विकास भवन परिसर तक भी पहुंच गया। बृहस्पतिवार सुबह जलस्तर कम होने लगा, पर आवागमन अभी भी बाधित है।
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विस्तार
पीलीभीत जिले में बारिश के बाद नदियों के बढ़े जलस्तर ने शहर की व्यवस्थाओं को बेपटरी कर दिया। खकरा नदी का पानी कलक्ट्रेट क्षेत्र में घुसने से बुधवार को कचहरी और पोस्टमार्टम मार्ग पर जलभराव हो गया। बुधवार रात पानी विकास भवन परिसर तक भी पहुंच गया, हालांकि पानी भवन के अंदर नहीं घुस सका। बृहस्पतिवार सुबह जलस्तर कम होने के बाद पानी धीरे-धीरे उतरना शुरू हो गया, लेकिन जलभराव के कारण लोगों की परेशानी अभी बनी हुई है। कलक्ट्रेट और विकास भवन पहुंचने के लिए लोग दूसरे रास्तों का सहारा ले रहे हैं।
टनकपुर हाईवे पर पानी
पीलीभीत-टनकपुर मेन हाईवे से कलेक्ट्रेट और विकास भवन जाने वाले मुख्य मार्ग पर बुधवार को काफी पानी भरा रहा। कलक्ट्रेट परिसर में अधिवक्ताओं के कई चैंबर पूरी तरह पानी में डूब गए। इससे अधिवक्ताओं को कामकाज करने में दिक्कत हुई। जरूरी दस्तावेज और सामान खराब होने का खतरा भी बना रहा। कलक्ट्रेट जैसे जिले के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र में पानी पहुंचने से शहर में जलनिकासी व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बुधवार को रहे ये हालात
कचहरी आने वाले अधिवक्ताओं, वादकारियों और आम लोगों को पानी में घुसकर ही कलक्ट्रेट परिसर तक पहुंचना पड़ा। मुख्य मार्ग पर जगह-जगह पानी जमा होने के कारण पैदल आने-जाने वालों को काफी परेशानी हुई। कई लोगों को पानी से बचते हुए किनारे-किनारे होकर परिसर में पहुंचना पड़ा।
उधर, देवहा नदी का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। हालांकि अभी देवहा नदी का पानी आबादी वाले क्षेत्रों में नहीं पहुंचा है। शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने से चंदिया हजारा क्षेत्र के कुछ हिस्सों में भी पानी भरा हुआ है। जलस्तर कम होने के बाद यहां भी पानी धीरे-धीरे कम होना शुरू हो गया है।
अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचा खकरा का पानी
खकरा नदी उफनाने से नदी का पानी आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ने लगा। न्यूरिया-रामपुर बौरख मार्ग पर बना रपटा पुल पूरी तरह जलमग्न हो गया। पुल के ऊपर से पानी बहने के कारण इस मार्ग पर आवागमन बंद हो गया है। इससे आसपास के करीब 18 गांवों के लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
रपटा पुल से करीब 500 मीटर दूर खेत में रखा इंजन भी पानी में डूबा नजर आया। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ पानी अब अंत्येष्टि स्थल तक पहुंच गया है। अंत्येष्टि स्थल को जाने वाला रास्ता जलमग्न होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऐसे में किसी की मौत होने पर शव को अंत्येष्टि स्थल तक ले जाने और अंतिम संस्कार करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पानी लगातार बढ़ने से ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है। इसके अलावा न्यूरिया कॉलोनी-भरतपुर मार्ग पर भी खकरा नदी का पानी पहुंचने से मार्ग के पास स्थित शिव मंदिर परिसर तक पहुंच गया है। इससे कॉलोनी के लोगों की चिंता बढ़ गई है। टनकपुर हाईवे के पास स्थित प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति न्यूरिया का परिसर भी बारिश के पानी से घिर गया।
जलभराव से सब्जी की फसल प्रभावित होने लगी है। किसानों का कहना है कि जल्द पानी नहीं निकला तो फसल खराब हो सकती है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने खेतों से पानी की निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।
कई गांवों में जलभराव
पूरनपुर तहसील क्षेत्र में शारदा नदी उफनाने से गांव हजारा और शास्त्रीनगर की आबादी में जलभराव हो गया। खेत जलमग्न हो गए। कच्चे रास्तों और दोनों गांवों के डेढ़ सौ घरों में दो से ढाई फुट तक पानी भर गया। बुधवार को जलभराव के चलते कई घरों में चूल्हे नहीं जले। प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों को शाम चार बजे तक खाना का वितरण नहीं कराया गया।
बचाव कार्य की खानापूरी से गांव के लोगों में रोष
अगस्त महीने में दो बार नदी के उफनाने से गांव हजारा और शास्त्रीनगर की आबादी में जलभराव हुआ था। नदी का जलस्तर कम होने पर नदी ने तेजी से हजारा के समीप कटान शुरू की थी। बाढ़ खंड के अधीक्षण अभियंता ने कटानस्थल पहुंचकर निरीक्षण किया था। मंडलायुक्त ने भी गांव हजारा में चौपाल लगाई थी। इसके बाद कटान से बचाव कार्य शुरू कराया गया।
बंबू कटर लगाने शुरू किए गए, मगर सप्ताह भर काम चलने के बाद बंद कर दिया गया। गांव हजारा के राकेश कुमार ने बताया कि नदी का जलस्तर कम होने पर कटान न होने का तर्क देकर बाढ़ खंड ने बचाव कार्य रोक दिया था। उनका कहना है कि जलस्तर कम होने पर बचाव कार्य नहीं किया जाता। बाढ़ आने पर बचाव कार्य कराने का आश्वासन देकर मात्र खानापूरी की जाती है।
जलस्तर कम होने से राहत
बनवसा बैराज से शारदा नदी में पानी रिलीज होने का क्रम मंगलवार सुबह से शुरू होकर रात आठ बजे तक जारी रहा। इसके बाद रिलीज होने वाले पानी की मात्रा में कमी आनी शुरू हुई। बुधवार को शारदा नदी का जलस्तर कम होने पर आबादी और खेतों, सड़कों पर हुआ जलभराव कम होना शुरू हुआ। इससे लोगों ने राहत की सांस ली।
50 परिवारों को राणा प्रतापनगर के बाढ़ शरणालय में किया शिफ्ट
बुधवार को एसडीएम मयंक गोस्वामी ने बताया कि नदी उफनाने से खेतों, सड़कों और निचले में बने कुछ घरों में जलभराव हुआ था। अब नदी का जलस्तर कम होना शुरू हो गया है। हजारा और शास्त्रीनगर के 50 परिवारों को राणा प्रतापनगर के बाढ़ शरणालय में रखा गया है नायब तहसीलदार सौरभ कुमार के नेतृत्व में टीम को शारदा पार भेजा गया।