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Raebareli News: एम्स में बनेगा कैंसर संस्थान व ट्राॅमा सेंटर
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Fri, 09 Jan 2026 01:21 AM IST
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रायबरेली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में जल्द ही मरीजों को और बेहतर स्वास्थ सुविधाएं मिलनी शुरू होंगी। कैंसर संस्थान, हाईटेक ट्राॅमा सेंटर व नर्सिंग कॉलेज को स्वास्थ्य मंत्रालय से स्वीकृति मिल गई है। वित्त विभाग में प्रक्रिया पूरी होते ही भवनों के निर्माण का काम शुरू होगा। वित्त विभाग में प्रस्तावों में कुछ कमियां मिली हैं। एम्स के स्तर से कर्मियों को दूर कराया जा रहा है। उम्मीद है कि मार्च से पहले भवन निर्माण का काम शुरू हो जाएगा।
एम्स में ओपीडी की शुरुआत 13 अगस्त 2019 से हुई थी। धीरे-धीरे एम्स का विस्तार शुरू हुआ। कुछ माह बाद मरीजों को भर्ती भी किया जाने लगा। जुलाई 2023 से इमरजेंसी सेवा भी शुरू की गई। इमरजेंसी में 24 घंटे सर्जरी की भी सुविधा मिल रही है। वर्तमान में 40 से अधिक विभागों के माध्यम से मरीजों को विशेषज्ञ सेवाएं मिल रही हैं। ट्राॅमा सेंटर व कैंसर संस्थान के प्रस्तावों को स्वास्थ्य मंत्रालय ने पास कर दिया है। नर्सिंग कॉलेज भी स्वास्थ्य मंत्रालय से पास हो चुका है। प्रस्तावों पर वित्त विभाग में काम चल रहा है। यहां से स्वीकृति मिलने के साथ ही भवनों के निर्माण का काम शुरू हो जाएगा।
अत्याधुनिक जांच उपकरणों से लैस होगा ट्राॅमा
ट्राॅमा सेंटर विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के साथ ही अत्याधुनिक जांच उपकरणों से लैस होगा। प्रस्तावित ट्राॅमा सेंटर में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर बनेंगे। यहां एक ही छत के नीचे सभी बीमारियों के गंभीर मरीजों के इलाज के साथ ही सर्जरी की सुविधा होगी। मल्टीस्पेश्यलिटी केस हैंडल किए जा सकेंगे। ऑर्गन रिट्रीवल केस भी आसानी से किए जा सकेंगे। सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे सहित अन्य सभी प्रकार की जांच मशीनें ट्राॅमा सेंटर में उपलब्ध होंगी।
100 बेड का क्रिटिकल केयर ब्लॉक तैयार
एम्स में 100 बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक का भवन तैयार हो चुका है। इसके शुरू होने से एम्स में क्रिटिकल केयर ब्लॉक आईसीयू, आईसोलेशन वार्ड, हाई डिफेंसिव यूनिट (एचडीयू) वेंटिलेटर के साथ हर बेड पर ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध रहेगी। करीब 44.50 करोड़ की लागत से यह ब्लॉक किया गया है।
दिल्ली एम्स के ट्राॅमा सेंटर जैसी सुविधाएं यहां भी मिल सकेंगी। हाईटेक ट्राॅमा सेंटर, कैंसर संस्थान व नर्सिंग कॉलेज के प्रस्ताव स्वास्थ्य मंत्रालय से स्वीकृत होने के बाद वित्त विभाग भेजे गए हैं। जल्द ही प्रक्रिया पूरी होते ही भवनों के निर्माण का काम शुरू होगा।
- प्रो. नीरज श्रीवास्तव, अपर चिकित्सा अधीक्षक, एम्स
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एम्स में ओपीडी की शुरुआत 13 अगस्त 2019 से हुई थी। धीरे-धीरे एम्स का विस्तार शुरू हुआ। कुछ माह बाद मरीजों को भर्ती भी किया जाने लगा। जुलाई 2023 से इमरजेंसी सेवा भी शुरू की गई। इमरजेंसी में 24 घंटे सर्जरी की भी सुविधा मिल रही है। वर्तमान में 40 से अधिक विभागों के माध्यम से मरीजों को विशेषज्ञ सेवाएं मिल रही हैं। ट्राॅमा सेंटर व कैंसर संस्थान के प्रस्तावों को स्वास्थ्य मंत्रालय ने पास कर दिया है। नर्सिंग कॉलेज भी स्वास्थ्य मंत्रालय से पास हो चुका है। प्रस्तावों पर वित्त विभाग में काम चल रहा है। यहां से स्वीकृति मिलने के साथ ही भवनों के निर्माण का काम शुरू हो जाएगा।
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अत्याधुनिक जांच उपकरणों से लैस होगा ट्राॅमा
ट्राॅमा सेंटर विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के साथ ही अत्याधुनिक जांच उपकरणों से लैस होगा। प्रस्तावित ट्राॅमा सेंटर में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर बनेंगे। यहां एक ही छत के नीचे सभी बीमारियों के गंभीर मरीजों के इलाज के साथ ही सर्जरी की सुविधा होगी। मल्टीस्पेश्यलिटी केस हैंडल किए जा सकेंगे। ऑर्गन रिट्रीवल केस भी आसानी से किए जा सकेंगे। सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे सहित अन्य सभी प्रकार की जांच मशीनें ट्राॅमा सेंटर में उपलब्ध होंगी।
100 बेड का क्रिटिकल केयर ब्लॉक तैयार
एम्स में 100 बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक का भवन तैयार हो चुका है। इसके शुरू होने से एम्स में क्रिटिकल केयर ब्लॉक आईसीयू, आईसोलेशन वार्ड, हाई डिफेंसिव यूनिट (एचडीयू) वेंटिलेटर के साथ हर बेड पर ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध रहेगी। करीब 44.50 करोड़ की लागत से यह ब्लॉक किया गया है।
दिल्ली एम्स के ट्राॅमा सेंटर जैसी सुविधाएं यहां भी मिल सकेंगी। हाईटेक ट्राॅमा सेंटर, कैंसर संस्थान व नर्सिंग कॉलेज के प्रस्ताव स्वास्थ्य मंत्रालय से स्वीकृत होने के बाद वित्त विभाग भेजे गए हैं। जल्द ही प्रक्रिया पूरी होते ही भवनों के निर्माण का काम शुरू होगा।
- प्रो. नीरज श्रीवास्तव, अपर चिकित्सा अधीक्षक, एम्स