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Raebareli News: कोर्ट के स्टे के बाद टूटा पीपीपी मॉडल के स्टेशन का सपना
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Thu, 09 Apr 2026 12:30 AM IST
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रायबरेली। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के रायबरेली डिपो को पीपीपी मॉडल के रूप में संवारने की मंशा फेल दिख रही है। डिपो की भूमि पर बनी 24 दुकानों के खिलाफ आए बेदखली आदेश को जनपद न्यायाधीश ने खारिज कर दिया है।
ऐसी स्थिति में स्टेशन को संवारने के लिए चल रही प्रक्रिया पर विराम लगने की उम्मीद बढ़ गई है। चर्चा है कि मोहनलालगंज की एजेंसी ने काम लेने के बाद ही हाथ खींचने का काम शुरू कर दिया है।
रायबरेली डिपो को पीपीपी मॉडल में विकसित किया जाना है। शासन स्तर से यह काम भी मोहनलालगंज की एक एजेंसी को दे भी दिया गया है। कई मंजिला बनने वाले भवन में सबसे नीचे डिपो संचालित होना है। ऊपर की मंजिलों का व्यवसायिक उपयोग होना है। डिपो की करीब 50 करोड़ रुपये की जमीन पर 24 लोगों ने दुकानें बना ली हैं। मुकदमे की सुनवाई करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट ने 16 अप्रैल 2025 को सभी 24 कब्जेदारों को दुकानों से बेदखल करने के साथ ही एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया था।
कब्जेदारों ने जनपद न्यायाधीश कोर्ट की शरण लेकर सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को निरस्त कराने की गुहार लगाई थी। सुनवाई पूरी करते हुए जनपद न्यायाधीश ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को निरस्त करते हुए नए सिरे से सुनवाई करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब डिपो के पीपीपी मॉडल में विकसित होने की मंशा प्रभावित हो गई है। चर्चा है कि एजेंसी पूरी जमीन न मिलने के कारण काम शुरू करने में आनाकानी कर रही है।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक दिनेशचंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि डिपो को पीपीपी मॉडल में विकसित करने के लिए शासन स्तर पर एजेंसी नामित की गई है। मामले में जल्द ही काम शुरू करवाने का प्रयास चल रहा है।
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ऐसी स्थिति में स्टेशन को संवारने के लिए चल रही प्रक्रिया पर विराम लगने की उम्मीद बढ़ गई है। चर्चा है कि मोहनलालगंज की एजेंसी ने काम लेने के बाद ही हाथ खींचने का काम शुरू कर दिया है।
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रायबरेली डिपो को पीपीपी मॉडल में विकसित किया जाना है। शासन स्तर से यह काम भी मोहनलालगंज की एक एजेंसी को दे भी दिया गया है। कई मंजिला बनने वाले भवन में सबसे नीचे डिपो संचालित होना है। ऊपर की मंजिलों का व्यवसायिक उपयोग होना है। डिपो की करीब 50 करोड़ रुपये की जमीन पर 24 लोगों ने दुकानें बना ली हैं। मुकदमे की सुनवाई करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट ने 16 अप्रैल 2025 को सभी 24 कब्जेदारों को दुकानों से बेदखल करने के साथ ही एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया था।
कब्जेदारों ने जनपद न्यायाधीश कोर्ट की शरण लेकर सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को निरस्त कराने की गुहार लगाई थी। सुनवाई पूरी करते हुए जनपद न्यायाधीश ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को निरस्त करते हुए नए सिरे से सुनवाई करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब डिपो के पीपीपी मॉडल में विकसित होने की मंशा प्रभावित हो गई है। चर्चा है कि एजेंसी पूरी जमीन न मिलने के कारण काम शुरू करने में आनाकानी कर रही है।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक दिनेशचंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि डिपो को पीपीपी मॉडल में विकसित करने के लिए शासन स्तर पर एजेंसी नामित की गई है। मामले में जल्द ही काम शुरू करवाने का प्रयास चल रहा है।