{"_id":"6a81a71ceadf74e2c609c8e8","slug":"deaths-of-uncle-and-nephew-two-lives-lost-over-20-000-2026-08-16","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"चाचा-भतीजे की मौत: 20 हजार रुपये के चक्कर में चली गईं दो जान, इकलौते बेटे की मौत पर मां-बहन बदहवास; चीख-पुकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चाचा-भतीजे की मौत: 20 हजार रुपये के चक्कर में चली गईं दो जान, इकलौते बेटे की मौत पर मां-बहन बदहवास; चीख-पुकार
Sun, 16 Aug 2026 05:34 PM IST
Mohd Mustakim
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
Published by: Mohd Mustakim
Updated Sun, 16 Aug 2026 05:34 PM IST
सार
Saharanpur News: गांव चिराऊ में अपने नलकूप में मौजूद करीब चार हजार ईंटों को निकालने का काम राजेंद्र और उनका बेटा राहुल कर रहा था। इन पुरानी और टूटी-फूटी ईंटों की कीमत करीब 20 हजार ही होगी। ईंटों की ढांग गिरने से राजेंद्र और उन्हें चाय देने के लिए पहुंचे भतीजे गौरव की मौत हो गई।
विज्ञापन
राजेंद्र और गौरव की फाइल फोटो। मौके पर मौजूद लोग।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सहारनपुर के बड़गांव स्थित गांव चिराऊ में शनिवार शाम नलकूप के लिए बनाए गए 30 फीट गहरे गड्ढे से ईंटें निकलते समय ढांग गिरने से राजेंद्र (48) और उनके भतीजे गौरव (12) की मौत हो गई। ग्रामीणों ने पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर घंटों रेस्क्यू चलाया। चार घंटे की मशक्कत के बाद चाचा-भतीजे के शव को बाहर निकाला गया। दोनों की मौत से गांव में शोक की लहर है।
विज्ञापन
अंधेरे में चाचा-भतीजे को निकालने का काम चला।
- फोटो : अमर उजाला
राजेंद्र अपने बेटे राहुल के साथ बंद पड़े नलकूप के गड्ढे से ईंटें निकाल रहे थे। पहले ऊपर से करीब पांच फीट तक ईंटें निकाली। उसके बाद दोनों 30 फीट गहरे गड्ढे में उतर गए और नीचे से ईंट उखाड़ना शुरू कीं। शाम चार बजे रजेंद्र का भतीजा गौरव उनके लिए चाय लेकर पहुंचा। राजेंद्र ने बेटे राहुल को चाय लेने के लिए गड्ढे से बाहर भेजा। जैसे ही राहुल गड्ढे से बाहर आया, तभी गड्ढे की ढांग अचानक ढह गई। बाहर खड़ा गौरव भी ढांग के साथ नीचे जा गिरा। इससे चाचा भतीजे दोनों भारी मलबे में दब गए। राहुल के शोर मचाने पर इकट्ठा हुए ग्रामीणों ने फावड़े लेकर तत्काल राहत बचाव कार्य शुरू किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
ग्रामीण फावड़े लेकर खुद ही नीचे उतर गए और मिट्टी हटाना शुरू किया। ग्रामीण बाल्टियों से मिट्टी बाहर खींचते नजर आए। करीब डेढ़ घंटे बाद बड़गांव पुलिस, फायर सर्विस की गाड़ी और जेसीबी घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने ग्रामीणों के साथ मिलकर रेस्क्यू अभियान चलाया। करीब दो घंटे बाद राजेंद्र को अचेत हालत में निकाला गया, जिसे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। रात करीब सवा आठ बजे गौरव को भी बाहर निकाल लिया गया। उसे भी चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
एसडीएम योगेश कुमार गौड़, तहसीलदार रामपुर मनिहारन जितेंद्र कुमार, सीओ देवबंद अमित सिंह, थानाध्यक्ष नरेंद्र भड़ाना मौके पर रहे। रविवार को गमगीन माहौल में चाचा-भतीजे का अंतिम संस्कार कर दिया गया। लोक निर्माण विभाग के राज्यमंत्री बृजेश सिंह ने मृतकों के परिजनों को सांत्वना दी।
समय से शुरू होता राहत कार्य तो बच सकती थी चाचा-भतीजे की जान
पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम हादसे के डेढ़ घंटे बाद पहुंची। तब तक ग्रामीण फावड़े और बाल्टी की मदद से 10 फीट तक मिट्टी बाहर निकाल चुके थे। अंधेरा होने से भी बचाव अभियान प्रभावित हुआ। ग्रामीणों ने टॉर्च आदि की व्यवस्था करके रेस्क्यू ऑपरेशन को चालू रखा, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया गौरव के जिंदा निकलने की उम्मीद दम तोड़ती गई। सवा दो घंटे बाद गौरव को बाहर निकाला गया, जिसे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। गुस्साए ग्रामीणों का कहना था कि प्रशासन की ओर से मदद पहुंचने में घंटों की देरी हुई। यदि समय रहते पर्याप्त संसाधन और बचाव दल पहुंच जाता तो शायद चाचा भतीजे की जान न जाती।
पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम हादसे के डेढ़ घंटे बाद पहुंची। तब तक ग्रामीण फावड़े और बाल्टी की मदद से 10 फीट तक मिट्टी बाहर निकाल चुके थे। अंधेरा होने से भी बचाव अभियान प्रभावित हुआ। ग्रामीणों ने टॉर्च आदि की व्यवस्था करके रेस्क्यू ऑपरेशन को चालू रखा, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया गौरव के जिंदा निकलने की उम्मीद दम तोड़ती गई। सवा दो घंटे बाद गौरव को बाहर निकाला गया, जिसे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। गुस्साए ग्रामीणों का कहना था कि प्रशासन की ओर से मदद पहुंचने में घंटों की देरी हुई। यदि समय रहते पर्याप्त संसाधन और बचाव दल पहुंच जाता तो शायद चाचा भतीजे की जान न जाती।
इकलौता बेटा था गौरव
मृतक गौरव उर्फ देव अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। गौरव से बड़ी बेटी पूजा है। गौरव की मौत के बाद परिवार में रुदन की आवाजें सन्नाटे को चीर रही थीं। मृतक गौरव की पीड़ित मां प्रीति का रो-रोकर बुरा हाल था। बहन पूजा चीख-चीख कह रही है कि अब वह रक्षाबंधन पर राखी किसे बांधेगी। वहीं, मृतक राजेंद्र के दो बेटे व दो बेटियां हैं। बड़े बेटे और एक बेटी की शादी हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना था कि पुरानी ईंटों को निकालने की कीमत दो जिंदगियों को चुकानी पड़ी है। नलकूप के गड्ढे में करीब चार हजार ईंटें थी, जिनकी कीमत बमुश्किल 20 हजार रुपये होगी।
मृतक गौरव उर्फ देव अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। गौरव से बड़ी बेटी पूजा है। गौरव की मौत के बाद परिवार में रुदन की आवाजें सन्नाटे को चीर रही थीं। मृतक गौरव की पीड़ित मां प्रीति का रो-रोकर बुरा हाल था। बहन पूजा चीख-चीख कह रही है कि अब वह रक्षाबंधन पर राखी किसे बांधेगी। वहीं, मृतक राजेंद्र के दो बेटे व दो बेटियां हैं। बड़े बेटे और एक बेटी की शादी हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना था कि पुरानी ईंटों को निकालने की कीमत दो जिंदगियों को चुकानी पड़ी है। नलकूप के गड्ढे में करीब चार हजार ईंटें थी, जिनकी कीमत बमुश्किल 20 हजार रुपये होगी।
ये बोले एसडीएम
गांव चिराऊ की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। दैवीय आपदा के तहत मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। उसी की प्रक्रिया चल रही है।
- योगेश कुमार गौड़, उप जिलाधिकारी, रामपुर मनिहारान
ये भी देखें...
Saharanpur: शराब ठेके के सेल्समैन की हत्या, विरोध में दो घंटे लगाया जाम; तमंचा और मोबाइल बरामद
गांव चिराऊ की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। दैवीय आपदा के तहत मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। उसी की प्रक्रिया चल रही है।
- योगेश कुमार गौड़, उप जिलाधिकारी, रामपुर मनिहारान
ये भी देखें...
Saharanpur: शराब ठेके के सेल्समैन की हत्या, विरोध में दो घंटे लगाया जाम; तमंचा और मोबाइल बरामद