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Saharanpur News: हथिनीकुंड बैराज पर घटा जलस्तर, दिल्ली-हरियाणा में किल्लत के आसार
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 16 Jun 2026 01:14 AM IST
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सहारनपुर। यूपी-हरियाणा सीमा पर स्थित हथिनीकुंड बैराज पर जलस्तर घट गया है। जून के मध्य तक जहां बैराज पर छह से सात हजार क्यूसेक तक पानी पहुंचना सामान्य माना जाता है, वहीं इस समय 3500 से 4200 क्यूसेक के बीच ही पानी दर्ज किया जा रहा है। कई बार दिन में जलस्तर और भी नीचे चला जाता है, जबकि रात के समय इसमें कुछ बढ़ोतरी देखने को मिलती है। ऐसे में दिल्ली-हरियाणा में पानी की किल्लत बढ़ सकती है।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस बार उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई है। इसके अलावा बर्फ पिघलने की प्रक्रिया भी सामान्य से कमजोर रही है। यही कारण है कि यमुना और उसकी सहायक टौंस नदी में पर्याप्त जल प्रवाह नहीं बन पा रहा है। दोनों नदियों का पानी हथिनीकुंड बैराज तक पहुंचता है और यहीं से विभिन्न राज्यों को पानी की आपूर्ति की जाती है। फिलहाल बैराज पर कई बार पानी का प्रवाह 3500 क्यूसेक तक भी दर्ज किया गया है, जो सामान्य स्तर से काफी कम माना जाता है। इसका असर न केवल पेयजल आपूर्ति पर पड़ रहा है, बल्कि सिंचाई और बिजली उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। बैराज से निकलने वाली नहरों को पर्याप्त पानी नहीं मिलने से कृषि क्षेत्र में भी चिंता बढ़ने लगी है।
तीन राज्यों की प्यास बुझाता है हथिनीकुंड
हथिनीकुंड बैराज से वेस्टर्न यमुना कैनाल और ईस्टर्न यमुना कैनाल के माध्यम से हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश को पानी उपलब्ध कराया जाता है। दिल्ली की 60 प्रतिशत से अधिक पेयजल जरूरतें यमुना के पानी पर निर्भर हैं। वहीं, हरियाणा के यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत और रोहतक समेत कई जिलों में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति इसी जल स्रोत पर आधारित है। हालांकि अभी तक किसी बड़े संकट की स्थिति नहीं बनी है, लेकिन यदि जल प्रवाह में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में पेयजल और सिंचाई दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
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जनवरी से जून तक उतार-चढ़ाव भरी रही स्थिति
हथिनीकुंड बैराज के गेज रीडर शेर सिंह द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष जनवरी से जून तक पानी की स्थिति लगातार उतार-चढ़ाव भरी रही। मार्च महीने में न्यूनतम जल प्रवाह 2391 क्यूसेक तक पहुंच गया था, जबकि अप्रैल में अधिकतम 6499 क्यूसेक दर्ज किया गया। इसके बाद से जलस्तर सामान्य से नीचे बना हुआ है।
गर्मी के मौसम में पानी की मांग तेजी से बढ़ जाती है, लेकिन इस समय हथिनीकुंड बैराज पर उपलब्ध पानी मांग के अनुरूप नहीं है। मानसूनी गतिविधियां बढ़ने और पहाड़ों में बारिश होने पर जलस्तर बढ़ जाता है।
- पूजा सैनी, सहायक अभियंता पूर्वी यमुना नहर सिंचाई विभाग
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस बार उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई है। इसके अलावा बर्फ पिघलने की प्रक्रिया भी सामान्य से कमजोर रही है। यही कारण है कि यमुना और उसकी सहायक टौंस नदी में पर्याप्त जल प्रवाह नहीं बन पा रहा है। दोनों नदियों का पानी हथिनीकुंड बैराज तक पहुंचता है और यहीं से विभिन्न राज्यों को पानी की आपूर्ति की जाती है। फिलहाल बैराज पर कई बार पानी का प्रवाह 3500 क्यूसेक तक भी दर्ज किया गया है, जो सामान्य स्तर से काफी कम माना जाता है। इसका असर न केवल पेयजल आपूर्ति पर पड़ रहा है, बल्कि सिंचाई और बिजली उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। बैराज से निकलने वाली नहरों को पर्याप्त पानी नहीं मिलने से कृषि क्षेत्र में भी चिंता बढ़ने लगी है।
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तीन राज्यों की प्यास बुझाता है हथिनीकुंड
हथिनीकुंड बैराज से वेस्टर्न यमुना कैनाल और ईस्टर्न यमुना कैनाल के माध्यम से हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश को पानी उपलब्ध कराया जाता है। दिल्ली की 60 प्रतिशत से अधिक पेयजल जरूरतें यमुना के पानी पर निर्भर हैं। वहीं, हरियाणा के यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत और रोहतक समेत कई जिलों में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति इसी जल स्रोत पर आधारित है। हालांकि अभी तक किसी बड़े संकट की स्थिति नहीं बनी है, लेकिन यदि जल प्रवाह में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में पेयजल और सिंचाई दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
जनवरी से जून तक उतार-चढ़ाव भरी रही स्थिति
हथिनीकुंड बैराज के गेज रीडर शेर सिंह द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष जनवरी से जून तक पानी की स्थिति लगातार उतार-चढ़ाव भरी रही। मार्च महीने में न्यूनतम जल प्रवाह 2391 क्यूसेक तक पहुंच गया था, जबकि अप्रैल में अधिकतम 6499 क्यूसेक दर्ज किया गया। इसके बाद से जलस्तर सामान्य से नीचे बना हुआ है।
गर्मी के मौसम में पानी की मांग तेजी से बढ़ जाती है, लेकिन इस समय हथिनीकुंड बैराज पर उपलब्ध पानी मांग के अनुरूप नहीं है। मानसूनी गतिविधियां बढ़ने और पहाड़ों में बारिश होने पर जलस्तर बढ़ जाता है।
- पूजा सैनी, सहायक अभियंता पूर्वी यमुना नहर सिंचाई विभाग