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Sant Kabir Nagar News: सुदामा चरित्र सिखाता है भक्ति में अभाव नहीं, भाव चाहिए
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खलीलाबाद में श्रीमद् भागवत कथा कहते आचार्य अतुल कृष्ण शास्त्री-स्रोत आयोजक
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संतकबीरनगर। गोला बाजार स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर के पास चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को कथा वाचक ने सुदामा चरित्र का वर्णन किया। व्यास पीठ अतुल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि कैसे गरीब ब्राह्मण सुदामा की एक मुट्ठी चिवड़े की भेंट को भगवान श्रीकृष्ण ने अमूल्य प्रेम के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने ठाकुरजी के वचन सखा तेरी भेंट मेरे लिए अमृत समान है, का उल्लेख किया।
कृष्ण व सुदामा की मित्रता की कथा सुनाते हुए कहा कि यह समाज को सीख देती है। विषम परिस्थिति में भी मनुष्य को घबराना नहीं चाहिए। जीवन में माता-पिता और गुरु के बाद मित्र को विशेष स्थान दिया गया है। मित्र हमारे सुख-दुख के साथी होते हैं। किसी भी परिस्थिति में मित्र हमेशा साथ खड़े होते हैं। इसके बाद शुकदेव जी की विदाई का प्रसंग सुनाया गया, जिसमें बताया गया कि परम वैरागी शुकदेव ने सात दिन में भागवत अमृत का उपदेश देकर राजा परीक्षित का उद्धार किया था।
व्यासपीठ पर पुष्पांजलि, दुग्धाभिषेक और मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। अतुल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि सुदामा चरित्र यह सिखाता है कि भक्ति में अभाव नहीं, केवल भाव चाहिए। उन्होंने शुकदेव विदाई को वैराग्य की चरम अभिव्यक्ति और व्यास पूजन को गुरु-कृतज्ञता का प्रतीक बताया।
इस दौरान सुप्रिया गुप्ता, दिव्य रत्ना गुप्ता, सन्नो गुप्ता, पार्वती गुप्ता, दुर्गा, सलोनी, सत्यप्रकाश गुप्ता, संतोष कसौधन, मनोज गुप्ता, विनोद कसौधन, श्रीधर अग्रहरि आदि मौजूद रहे।
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कृष्ण व सुदामा की मित्रता की कथा सुनाते हुए कहा कि यह समाज को सीख देती है। विषम परिस्थिति में भी मनुष्य को घबराना नहीं चाहिए। जीवन में माता-पिता और गुरु के बाद मित्र को विशेष स्थान दिया गया है। मित्र हमारे सुख-दुख के साथी होते हैं। किसी भी परिस्थिति में मित्र हमेशा साथ खड़े होते हैं। इसके बाद शुकदेव जी की विदाई का प्रसंग सुनाया गया, जिसमें बताया गया कि परम वैरागी शुकदेव ने सात दिन में भागवत अमृत का उपदेश देकर राजा परीक्षित का उद्धार किया था।
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व्यासपीठ पर पुष्पांजलि, दुग्धाभिषेक और मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। अतुल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि सुदामा चरित्र यह सिखाता है कि भक्ति में अभाव नहीं, केवल भाव चाहिए। उन्होंने शुकदेव विदाई को वैराग्य की चरम अभिव्यक्ति और व्यास पूजन को गुरु-कृतज्ञता का प्रतीक बताया।
इस दौरान सुप्रिया गुप्ता, दिव्य रत्ना गुप्ता, सन्नो गुप्ता, पार्वती गुप्ता, दुर्गा, सलोनी, सत्यप्रकाश गुप्ता, संतोष कसौधन, मनोज गुप्ता, विनोद कसौधन, श्रीधर अग्रहरि आदि मौजूद रहे।