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Sant Kabir Nagar News: मकर संक्रांति पर स्नान-दान से अक्षय पुण्य की प्राप्ति
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 15 Jan 2026 02:17 AM IST
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-आचार्यो ने बताया मकर संक्रांति का महत्व
धनघटा। मकर संक्रांति का पर्व बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। श्रद्धालु नदियों में आस्था की डुबकी लगाकर दान-पुण्य, जप और पूजा-पाठ कर पुण्य के भागी बनते हैं। राम जानकी मंदिर भरदौलिया (गोविंदगंज बाजार) में आचार्य पंडित कृपा शंकर पांडेय ने मकर संक्रांति का महत्व बताया। कहा कि मकर संक्रांति पर स्नान-दान से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
आचार्य ने कहा कि ज्योतिष गणना के अनुसार, सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को संक्रांति कहा जाता है। सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने का मकर संक्रांति कहते हैं। इसी दिन से सूर्य की गति दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाती है। साथ ही दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। पंडित महेश मिश्र, आचार्य पंडित वशिष्ठ मुनि चतुर्वेदी ने बताया कि गणेश आपा पंचांग के अनुसार 14 जनवरी 2026 बुधवार को दोपहर तीन बजे सूर्य की राशि बदल रही है।
महावीर व ऋषिकेश पंचांग के अनुसार, बुधवार 14 जनवरी की रात नौ बजकर 29 मिनट पर सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। हालांकि, इसका पुण्यकाल 15 जनवरी को सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहेगा। इसी कारण 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना धर्मसम्मत और फलदायी है। गणेश आपा के अनुसार 14 जनवरी को दोपहर तीन बजे संक्रांति बदलने से पुण्य कार्य सूर्यास्त तक माना गया है। लेकिन, इसी दिन बुधवार को षटतिला एकादशी होने के कारण चावल दान व खिचड़ी खाना दोनों शास्त्र सम्मत नहीं है। उन्होंने कहा कि 15 जनवरी 2026 को ही मकर संक्रांति मनाई जाएगी। मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालु विभिन्न नदियों तालाबों में स्नान करके पुण्य अर्जित करेंगे। बृहस्पतिवार को मकर संक्रांति के अवसर पर सरयू नदी के विभिन्न घाटों पर स्नान करने के लिए श्रद्धालु बुधवार को ही पहुंचने शुरू कर दिए।
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धनघटा। मकर संक्रांति का पर्व बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। श्रद्धालु नदियों में आस्था की डुबकी लगाकर दान-पुण्य, जप और पूजा-पाठ कर पुण्य के भागी बनते हैं। राम जानकी मंदिर भरदौलिया (गोविंदगंज बाजार) में आचार्य पंडित कृपा शंकर पांडेय ने मकर संक्रांति का महत्व बताया। कहा कि मकर संक्रांति पर स्नान-दान से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
आचार्य ने कहा कि ज्योतिष गणना के अनुसार, सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को संक्रांति कहा जाता है। सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने का मकर संक्रांति कहते हैं। इसी दिन से सूर्य की गति दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाती है। साथ ही दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। पंडित महेश मिश्र, आचार्य पंडित वशिष्ठ मुनि चतुर्वेदी ने बताया कि गणेश आपा पंचांग के अनुसार 14 जनवरी 2026 बुधवार को दोपहर तीन बजे सूर्य की राशि बदल रही है।
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महावीर व ऋषिकेश पंचांग के अनुसार, बुधवार 14 जनवरी की रात नौ बजकर 29 मिनट पर सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। हालांकि, इसका पुण्यकाल 15 जनवरी को सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहेगा। इसी कारण 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना धर्मसम्मत और फलदायी है। गणेश आपा के अनुसार 14 जनवरी को दोपहर तीन बजे संक्रांति बदलने से पुण्य कार्य सूर्यास्त तक माना गया है। लेकिन, इसी दिन बुधवार को षटतिला एकादशी होने के कारण चावल दान व खिचड़ी खाना दोनों शास्त्र सम्मत नहीं है। उन्होंने कहा कि 15 जनवरी 2026 को ही मकर संक्रांति मनाई जाएगी। मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालु विभिन्न नदियों तालाबों में स्नान करके पुण्य अर्जित करेंगे। बृहस्पतिवार को मकर संक्रांति के अवसर पर सरयू नदी के विभिन्न घाटों पर स्नान करने के लिए श्रद्धालु बुधवार को ही पहुंचने शुरू कर दिए।
