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Sant Kabir Nagar News: दो माह में दो बेटों की मौत ने पिता और परिवार को गहरे सदमे में डाला
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संवाद न्यूज एजेंसी
महुली। दो माह के भीतर दो बेटों की अर्थी को कंधा देने वाले पिता की जिंदगी में अब जैसे कुछ बचा ही नहीं है। एक के बाद एक जवान बेटों की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
भिनखिनी गांव निवासी रामप्रीत के बड़े बेटे विजय की आठ जून को मैंसिर के पास सड़क हादसे में मौत हो गई थी। बेटे की मौत की खबर सुनकर मलयेशिया में काम करने वाला छोटा बेटा अजय घर लौटा था। परिवार अभी विजय की मौत के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि मंगलवार रात महुली-बस्ती मार्ग पर छितहीं के पास हुए हादसे में अजय भी गंभीर रूप से घायल हो गया।
इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। रामप्रीत पर दुखों का पहाड़ एक साथ टूट पड़ा है। उन्होंने बताया कि इसी साल मई में उनकी पत्नी की भी मौत हो गई। इसके बाद आठ जून को बड़े बेटे विजय की सड़क हादसे में जान चली गई। विजय की मौत के बाद परिवार को संभालने और पिता का सहारा बनने के लिए अजय मलयेशिया से घर आया था लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। मंगलवार रात हुए हादसे में अजय की भी जान चली गई।
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रोते हुए रामप्रीत ने बताया कि अजय चार भाइयों में सबसे छोटा था। वही परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाता था। उसकी कमाई से घर का खर्च चलता था। बेटे की मौत ने बुढ़ापे का आखिरी सहारा भी छीन लिया। दो बेटों की मौत के बाद पिता की हालत ऐसी है कि परिजन और रिश्तेदार उन्हें संभालने में जुटे हैं।
अजय की मौत की खबर मिलते ही भिनखिनी गांव में मातम पसर गया। आसपास के गांवों के लोग और रिश्तेदार घर पहुंचने लगे। हर किसी की जुबान पर परिवार के साथ हुए इस दर्दनाक हादसे की चर्चा थी।
घर में रोने-बिलखने की आवाजें सुनकर माहौल गमगीन हो गया। परिजन को सांत्वना देने पहुंचे लोगों के पास भी उन्हें ढांढस बंधाने के लिए शब्द कम पड़ गए।
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महुली। दो माह के भीतर दो बेटों की अर्थी को कंधा देने वाले पिता की जिंदगी में अब जैसे कुछ बचा ही नहीं है। एक के बाद एक जवान बेटों की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
भिनखिनी गांव निवासी रामप्रीत के बड़े बेटे विजय की आठ जून को मैंसिर के पास सड़क हादसे में मौत हो गई थी। बेटे की मौत की खबर सुनकर मलयेशिया में काम करने वाला छोटा बेटा अजय घर लौटा था। परिवार अभी विजय की मौत के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि मंगलवार रात महुली-बस्ती मार्ग पर छितहीं के पास हुए हादसे में अजय भी गंभीर रूप से घायल हो गया।
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इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। रामप्रीत पर दुखों का पहाड़ एक साथ टूट पड़ा है। उन्होंने बताया कि इसी साल मई में उनकी पत्नी की भी मौत हो गई। इसके बाद आठ जून को बड़े बेटे विजय की सड़क हादसे में जान चली गई। विजय की मौत के बाद परिवार को संभालने और पिता का सहारा बनने के लिए अजय मलयेशिया से घर आया था लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। मंगलवार रात हुए हादसे में अजय की भी जान चली गई।
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रोते हुए रामप्रीत ने बताया कि अजय चार भाइयों में सबसे छोटा था। वही परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाता था। उसकी कमाई से घर का खर्च चलता था। बेटे की मौत ने बुढ़ापे का आखिरी सहारा भी छीन लिया। दो बेटों की मौत के बाद पिता की हालत ऐसी है कि परिजन और रिश्तेदार उन्हें संभालने में जुटे हैं।
अजय की मौत की खबर मिलते ही भिनखिनी गांव में मातम पसर गया। आसपास के गांवों के लोग और रिश्तेदार घर पहुंचने लगे। हर किसी की जुबान पर परिवार के साथ हुए इस दर्दनाक हादसे की चर्चा थी।
घर में रोने-बिलखने की आवाजें सुनकर माहौल गमगीन हो गया। परिजन को सांत्वना देने पहुंचे लोगों के पास भी उन्हें ढांढस बंधाने के लिए शब्द कम पड़ गए।