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Sant Kabir Nagar News: मोहिया-घूरापाली मार्ग पर नहीं चलते वाहन, परेशान होते हैं लोग
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मेंहदावल। तहसील क्षेत्र में पूर्वी कछार में आवागमन के लिए मोहिया-घूरापाली मार्ग पर वाहनों की कमी से लोग जूझ रहे हैं। 16 किमी की दूरी तय करने में खुद के वाहन या बुकिंग के सहारे ही आवागमन संभव हो पाता है। ग्रामीणों ने बताया कि रात में हम लोगों को अचानक ही कुछ आवश्यकता पड़ने पर काफी समस्या का सामना करना पड़ जाता है।
छपिया अगंद निवासी अजय कुमार त्रिपाठी, कृष्ण कांत त्रिपाठी, थरौली के सोहनलाल, राजू, बेलौली निवासी दिनकर प्रसाद, राजीव त्रिपाठी, रत्नाकर, शिवम आदि ने बताया कि कुछ निजी वाहन यात्रियों को ढो रहे हैं। आरोप है कि इनमें से कई वाहन बिना आवश्यक परमिट और परिवहन दस्तावेजों के संचालित हैं। निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने के कारण यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में रहती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सबसे अधिक दिक्कत छात्राओं, महिलाओं और बुजुर्गों को होती है। एकाध वाहन पर्याप्त सवारी नहीं मिलने पर यात्रियों को बीच रास्ते में उतार देते हैं, जिससे परेशानी और बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि यह मार्ग हम लोगों के लिए जीवनी की तरह है। मोहिया होते हुए तहसील व जिला मुख्यालय तो घूरापाली से सिसई घाट होते हुए गोरखपुर जाने पर हम लोगों के लिए यह मार्ग काफी नजदीक है।
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आवागमन सुविधा न होने के कारण हम लोगों को 35 किमी की जगह 50 किमी की दूरी तय करनी पड़ जाती है।
छपिया अगंद निवासी अजय कुमार त्रिपाठी, कृष्ण कांत त्रिपाठी, थरौली के सोहनलाल, राजू, बेलौली निवासी दिनकर प्रसाद, राजीव त्रिपाठी, रत्नाकर, शिवम आदि ने बताया कि कुछ निजी वाहन यात्रियों को ढो रहे हैं। आरोप है कि इनमें से कई वाहन बिना आवश्यक परमिट और परिवहन दस्तावेजों के संचालित हैं। निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने के कारण यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में रहती है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि सबसे अधिक दिक्कत छात्राओं, महिलाओं और बुजुर्गों को होती है। एकाध वाहन पर्याप्त सवारी नहीं मिलने पर यात्रियों को बीच रास्ते में उतार देते हैं, जिससे परेशानी और बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि यह मार्ग हम लोगों के लिए जीवनी की तरह है। मोहिया होते हुए तहसील व जिला मुख्यालय तो घूरापाली से सिसई घाट होते हुए गोरखपुर जाने पर हम लोगों के लिए यह मार्ग काफी नजदीक है।
आवागमन सुविधा न होने के कारण हम लोगों को 35 किमी की जगह 50 किमी की दूरी तय करनी पड़ जाती है।