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Shahjahanpur News: 164 करोड़ रुपये खर्च...फिर भी फीडर दे रहे बार-बार झटके
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अंशिका गुप्ता, उपभोक्ता।
- फोटो : 1
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शाहजहांपुर। जिले की बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 164 करोड़ रुपये की रिवैंप योजना पर काम चल रहा है। योजना का 90 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा भी किया जा रहा है, लेकिन बिजली की ट्रिपिंग ने उपभोक्ताओं को अब भी परेशान कर रखा है। गर्मी और बारिश के मौसम में शहर से लेकर देहात तक कई फीडर बार-बार ट्रिप हो रहे हैं। कहीं पांच तो कहीं सात-आठ बार तक ट्रिपिंग हो रही है। फॉल्ट होने पर घंटों आपूर्ति ठप हो जाती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को शेड्यूल के मुताबिक बिजली नहीं मिल पा रही।
रिवैंप योजना के तहत जिले में बिजली नेटवर्क को मजबूत करने के लिए बंच लाइन डालने, जर्जर तार और खंभे बदलने समेत कई कार्य प्रस्तावित किए गए थे। योजना को अप्रैल 2025 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कार्यदायी संस्था अब तक शत-प्रतिशत काम पूरा नहीं कर सकी है।
विभाग की ओर से 90 प्रतिशत कार्य पूरा होने का दावा किया जा रहा है, वहीं शहर में जगह-जगह लटकते तार, जर्जर खंभे और बार-बार होने वाले फॉल्ट व्यवस्था में सुधार के दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। मंगलवार को उपकेंद्रों की पड़ताल में ट्रिपिंग और लोकल फॉल्ट के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित मिली। कर्मियों के मुताबिक ओवरलोडिंग, लंबी लाइन, मांझा फंसने और बारिश के दौरान होने वाले फॉल्ट से फीडर ट्रिप हो रहे हैं।
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हुंडालखेल और टेलीफोन एक्सचेंज फीडर से सबसे ज्यादा झटके
बहादुरगंज उपकेंद्र से निकलने वाले हुंडालखेल और टेलीफोन एक्सचेंज फीडर पर ट्रिपिंग की समस्या अधिक है। लंबी लाइन होने के साथ ही तारों में मांझा फंसने और ओवरलोडिंग के कारण जंपर फुंक जाते हैं। इससे दोनों फीडर पर 24 घंटों में दो से तीन बार ट्रिपिंग हो जाती है। पूरे उपकेंद्र पर सात से आठ बार तक ट्रिपिंग होना आम बात है। इसके अलावा लोकल फॉल्ट अलग से होते हैं। बिजली कर्मियों के अनुसार, पूरे महीने में करीब 300 बार ट्रिपिंग की समस्या सामने आई है। इसका सीधा असर आपूर्ति पर पड़ा है और उपभोक्ताओं को रोजाना दो से तीन घंटे तक बिजली कटौती झेलनी पड़ी है।
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गोविंदगंज फीडर पर लोड बढ़ते ही गुल हो जाती है बिजली
गोविंदगंज उपकेंद्र का गोविंदगंज फीडर भी बार-बार फॉल्ट और ट्रिपिंग की समस्या से जूझ रहा है। प्रमुख बाजार होने के कारण इस फीडर पर लोड अधिक रहता है। इससे दिन में दो से तीन बार ट्रिपिंग हो जाती है। गर्मी और बारिश के दौरान फॉल्ट आने पर आपूर्ति घंटों बाधित रहती है। इसी उपकेंद्र का पक्का तालाब फीडर भी ट्रिपिंग की समस्या से प्रभावित है। लाल इमली चौराहा समेत कई स्थानों पर तारों का जाल फैला है। आए दिन जंपर जलने और तार टूटने से आपूर्ति बाधित होती है।
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बाईपास फीडर पर रोज सात बार ट्रिपिंग
दीवान जोगराज उपकेंद्र से सरायकाइयां और बाइपास फीडर निकलते हैं। बाइपास फीडर से शहर के उपभोक्ताओं के साथ चौढ़ेरा, रौसर कोठी, दनियापुर समेत पांच गांवों की आपूर्ति जुड़ी है। ग्रामीण क्षेत्र की लाइन जर्जर होने के कारण फीडर पर रोजाना करीब सात बार ट्रिपिंग होना आम बात है। बिजली कर्मियों के अनुसार, बार-बार ट्रिपिंग के कारण इस उपकेंद्र से जुड़े इलाकों को 24 घंटे के बजाय प्रतिदिन करीब 19 से 21 घंटे ही बिजली मिल पाती है।
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90 फीसदी काम पूरा, फिर भी तारों का जाल बरकरार
रिवैंप योजना का 90 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन शहर के प्रमुख मार्गों और मोहल्लों में बिजली व्यवस्था की तस्वीर इससे अलग है। कई स्थानों पर बंच लाइन नीचे की ओर लटक रही हैं और जर्जर खंभे हादसे को न्योता दे रहे हैं। चूड़ी वाली गली, सदर बाजार, लाल इमली चौराहा, अंटा चौराहा और घंटाघर समेत कई स्थानों पर तारों का जाल फैला है। यही वजह है कि हल्की बारिश या तेज हवा के बाद भी कई इलाकों में घंटों बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है।
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उपभोक्ताओं ने कहा- नहीं मिल रही राहत
गोविंदगंज फीडर की हालत पूरी गर्मी खराब रही है। अब भी सुबह बिजली गुल हो जाती है और आने का समय तय नहीं रहता। इंवर्टर से सिर्फ पंखे ही चल पाते हैं। फीडर की आपूर्ति दुरुस्त कराई जानी चाहिए।
- इशिता गुप्ता, सदर बाजार
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पक्का तालाब क्षेत्र में बिजली की समस्या काफी ज्यादा है। घंटों बिजली गायब रहती है। उपकेंद्र पर फोन करने पर बात होना भी मुश्किल होता है। इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बाद भी बिजली नेटवर्क में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
- अदनान, मोहल्ला बाडूजई
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रिवैंप योजना के तहत बंच लाइन डालने और खंभे लगाने समेत कई कार्य किए गए हैं। बिजनेस प्लान के तहत करीब 25 करोड़ रुपये से बिजली व्यवस्था में और सुधार किया जाएगा। इसके लिए कार्यों की सूची तैयार कर ली गई है।
- अनुज प्रताप सिंह, अधीक्षण अभियंता, बिजली निगम
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रिवैंप योजना के तहत जिले में बिजली नेटवर्क को मजबूत करने के लिए बंच लाइन डालने, जर्जर तार और खंभे बदलने समेत कई कार्य प्रस्तावित किए गए थे। योजना को अप्रैल 2025 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कार्यदायी संस्था अब तक शत-प्रतिशत काम पूरा नहीं कर सकी है।
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विभाग की ओर से 90 प्रतिशत कार्य पूरा होने का दावा किया जा रहा है, वहीं शहर में जगह-जगह लटकते तार, जर्जर खंभे और बार-बार होने वाले फॉल्ट व्यवस्था में सुधार के दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। मंगलवार को उपकेंद्रों की पड़ताल में ट्रिपिंग और लोकल फॉल्ट के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित मिली। कर्मियों के मुताबिक ओवरलोडिंग, लंबी लाइन, मांझा फंसने और बारिश के दौरान होने वाले फॉल्ट से फीडर ट्रिप हो रहे हैं।
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हुंडालखेल और टेलीफोन एक्सचेंज फीडर से सबसे ज्यादा झटके
बहादुरगंज उपकेंद्र से निकलने वाले हुंडालखेल और टेलीफोन एक्सचेंज फीडर पर ट्रिपिंग की समस्या अधिक है। लंबी लाइन होने के साथ ही तारों में मांझा फंसने और ओवरलोडिंग के कारण जंपर फुंक जाते हैं। इससे दोनों फीडर पर 24 घंटों में दो से तीन बार ट्रिपिंग हो जाती है। पूरे उपकेंद्र पर सात से आठ बार तक ट्रिपिंग होना आम बात है। इसके अलावा लोकल फॉल्ट अलग से होते हैं। बिजली कर्मियों के अनुसार, पूरे महीने में करीब 300 बार ट्रिपिंग की समस्या सामने आई है। इसका सीधा असर आपूर्ति पर पड़ा है और उपभोक्ताओं को रोजाना दो से तीन घंटे तक बिजली कटौती झेलनी पड़ी है।
गोविंदगंज फीडर पर लोड बढ़ते ही गुल हो जाती है बिजली
गोविंदगंज उपकेंद्र का गोविंदगंज फीडर भी बार-बार फॉल्ट और ट्रिपिंग की समस्या से जूझ रहा है। प्रमुख बाजार होने के कारण इस फीडर पर लोड अधिक रहता है। इससे दिन में दो से तीन बार ट्रिपिंग हो जाती है। गर्मी और बारिश के दौरान फॉल्ट आने पर आपूर्ति घंटों बाधित रहती है। इसी उपकेंद्र का पक्का तालाब फीडर भी ट्रिपिंग की समस्या से प्रभावित है। लाल इमली चौराहा समेत कई स्थानों पर तारों का जाल फैला है। आए दिन जंपर जलने और तार टूटने से आपूर्ति बाधित होती है।
बाईपास फीडर पर रोज सात बार ट्रिपिंग
दीवान जोगराज उपकेंद्र से सरायकाइयां और बाइपास फीडर निकलते हैं। बाइपास फीडर से शहर के उपभोक्ताओं के साथ चौढ़ेरा, रौसर कोठी, दनियापुर समेत पांच गांवों की आपूर्ति जुड़ी है। ग्रामीण क्षेत्र की लाइन जर्जर होने के कारण फीडर पर रोजाना करीब सात बार ट्रिपिंग होना आम बात है। बिजली कर्मियों के अनुसार, बार-बार ट्रिपिंग के कारण इस उपकेंद्र से जुड़े इलाकों को 24 घंटे के बजाय प्रतिदिन करीब 19 से 21 घंटे ही बिजली मिल पाती है।
90 फीसदी काम पूरा, फिर भी तारों का जाल बरकरार
रिवैंप योजना का 90 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन शहर के प्रमुख मार्गों और मोहल्लों में बिजली व्यवस्था की तस्वीर इससे अलग है। कई स्थानों पर बंच लाइन नीचे की ओर लटक रही हैं और जर्जर खंभे हादसे को न्योता दे रहे हैं। चूड़ी वाली गली, सदर बाजार, लाल इमली चौराहा, अंटा चौराहा और घंटाघर समेत कई स्थानों पर तारों का जाल फैला है। यही वजह है कि हल्की बारिश या तेज हवा के बाद भी कई इलाकों में घंटों बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है।
उपभोक्ताओं ने कहा- नहीं मिल रही राहत
गोविंदगंज फीडर की हालत पूरी गर्मी खराब रही है। अब भी सुबह बिजली गुल हो जाती है और आने का समय तय नहीं रहता। इंवर्टर से सिर्फ पंखे ही चल पाते हैं। फीडर की आपूर्ति दुरुस्त कराई जानी चाहिए।
- इशिता गुप्ता, सदर बाजार
पक्का तालाब क्षेत्र में बिजली की समस्या काफी ज्यादा है। घंटों बिजली गायब रहती है। उपकेंद्र पर फोन करने पर बात होना भी मुश्किल होता है। इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बाद भी बिजली नेटवर्क में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
- अदनान, मोहल्ला बाडूजई
रिवैंप योजना के तहत बंच लाइन डालने और खंभे लगाने समेत कई कार्य किए गए हैं। बिजनेस प्लान के तहत करीब 25 करोड़ रुपये से बिजली व्यवस्था में और सुधार किया जाएगा। इसके लिए कार्यों की सूची तैयार कर ली गई है।
- अनुज प्रताप सिंह, अधीक्षण अभियंता, बिजली निगम

अंशिका गुप्ता, उपभोक्ता।- फोटो : 1

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