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Shahjahanpur News: ‘शहीदों के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए नए नाटकों के मंचन की आवश्यकता’
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शाहजहांपुर में शहीद अशफाक उल्ला खां की मजार परिसर में काकोरी की ऐतिहासिकता पर राष्ट्रीय संगोष्
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शाहजहांपुर। शहर के एमनजई जलालनगर स्थित शहीद अशफाक उल्ला खां के मजार परिसर में हिंदी रंगमंच और काकोरी की ऐतिहासिकता विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें शहीदों के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए नए नाटकों के मंचन पर जोर दिया गया।
गोष्ठी में साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी ने काकोरी केस के अमर नायकों की मूर्तियां तोड़े जाने की घटना पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शहीदों के जीवन और संघर्ष पर यहां नाटकों के माध्यम से काम हो रहा है। उनके विचारों को आगे पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की जरूरत है।
उन्होंने शाहजहांपुर में आधुनिक नाटकों के दौर की शुरुआत को भी याद किया। बताया कि वर्ष 1980 में यहां आधुनिक नाटकों का दौर शुरू हुआ था। प्रोफेसर सैयद नोमान ने कहा कि युवा पीढ़ी तक शहीदों की गाथा को पहुंचाए जाने की जरूरत है।
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वरिष्ठ रंगकर्मी शमीम आजाद ने कहा कि शहीदों की बातें और उनकी विचारधारा नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए नए नाटकों की आवश्यकता है। नाटक दृश्य और श्रव्य दोनों माध्यमों का प्रभावी मिश्रण है। इसके माध्यम से क्रांतिकारियों के विचारों को प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। इस मौके पर वरिष्ठ रंगकर्मी आलोक सक्सेना, समाजसेवी अशफाक उल्ला खां, मनीष मुनी आदि मौजूद रहे।
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गोष्ठी में साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी ने काकोरी केस के अमर नायकों की मूर्तियां तोड़े जाने की घटना पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शहीदों के जीवन और संघर्ष पर यहां नाटकों के माध्यम से काम हो रहा है। उनके विचारों को आगे पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की जरूरत है।
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उन्होंने शाहजहांपुर में आधुनिक नाटकों के दौर की शुरुआत को भी याद किया। बताया कि वर्ष 1980 में यहां आधुनिक नाटकों का दौर शुरू हुआ था। प्रोफेसर सैयद नोमान ने कहा कि युवा पीढ़ी तक शहीदों की गाथा को पहुंचाए जाने की जरूरत है।
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वरिष्ठ रंगकर्मी शमीम आजाद ने कहा कि शहीदों की बातें और उनकी विचारधारा नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए नए नाटकों की आवश्यकता है। नाटक दृश्य और श्रव्य दोनों माध्यमों का प्रभावी मिश्रण है। इसके माध्यम से क्रांतिकारियों के विचारों को प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। इस मौके पर वरिष्ठ रंगकर्मी आलोक सक्सेना, समाजसेवी अशफाक उल्ला खां, मनीष मुनी आदि मौजूद रहे।