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चाहे जितना भी प्यारा हो बेटा, बुरे कर्म बर्दाश्त न करें : कथा व्यास
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खुटार के गुलरहानाथ बाबा मंदिर पर कन्याभोज में शामिल कन्याएं और बच्चे। संवाद
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कुर्रियाकलां। पल्हौरा गांव के शिव मंदिर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को हरदोई से आए पं. छत्रपाल मिश्र ने दुर्योधन के हठ का प्रसंग सुनाया। कथा व्यास ने कहा कि बेटा कितना भी प्यारा हो, उसकी करतूतों को चुपचाप नहीं देखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पांडव जब वनवास एवं अज्ञातवास काटकर वापस आए तो अपने राजपाठ की मांग दुर्योधन से की। दुर्योधन ने अज्ञातवास भंग होने की बात कही और फिर से वनवास जाने के लिए कहा। विदुर और भीष्म पितामह ने दुर्योधन को समझाया कि समय पूरा हो चुका है।
पांडवों ने श्रीकृष्ण के हाथों पांच गांव देने का प्रस्ताव भेजा लेकिन दुर्योधन ने सुई की नोक बराबर भूमि भी देने से इन्कार कर दिया। दुर्योधन ने श्रीकृष्ण को बंदी बनाने का प्रयास किया। कथा श्रवण के दौरान भगवान शरण शर्मा, छत्रपाल शर्मा, मूलाराम गुप्ता, मुकेश त्रिवेदी, शिवकुमार तिवारी आदि मौजूद रहे। संवाद
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यज्ञ और कथा के बाद हुआ भंडारा
खुटार। गुलरहानाथ बाबा मंदिर परिसर में चल रहे शतचंडी महायज्ञ और कथा का विश्राम होने पर बृहस्पतिवार को कन्या भोज और भंडारे का आयोजन किया गया।
बुधवार शाम को कथा व्यास श्रीराम वाजपेयी ने सत्संग और यज्ञ का महत्व बताते हुए कहा कि सत्संग से अच्छे विचार आते हैं और अच्छे विचारों ने अच्छे परिवार, अच्छे समाज का निर्माण होता है। कुरीतियों और अंधविश्वासों से मुक्ति मिलती है। यज्ञ से वातावरण शुद्ध होता है और बीमारियां दूर होती हैं। इस प्रकार यज्ञ का लाभ आसपास के लोगों को भी मिलता है।
बृहस्पतिवार सुबह देव प्रतिमाओं को भोग लगाने के बाद कन्या भोज किया गया। इसके बाद भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में नगर और आसपास के गांवों के श्रद्धालुओं ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन में मंदिर समिति के साथ ही नगर के तमाम लोगों का सहयोग रहा। संवाद
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आत्मा के रूप में सभी मनुष्यों में विद्यमान भगवान : कथा व्यास
जलालाबाद। नगर के वार्ड रामनगर स्थित होली चौक पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा व्यास अक्षय मिश्रा ने कहा कि भगवान आत्मा के रूप में सभी मनुष्यों के अंदर विद्यमान है। उन्हें पाने के लिए धर्म के अनुसार आचरण करना होगा। लोभ, मोह और अहंकार को त्यागना होगा।
भगवान से अनुराग करने वाले लोग पत्थर में भी उनका रूप देखते हैं। भगवान मनुष्य में विषमता और अशुद्धता को दूर कर उसमें नई ऊर्जा का संचार करते हैं। बोले कि आध्यात्मिक श्रेष्ठता पाकर ही मनुष्य शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक रूप से स्वस्थ हो पाता है। उन्होंने कहा कि भगवान की शरण पाकर ही मनुष्य परिवार सहित मोक्ष को प्राप्त करता है। कथा के बाद में आरती कर प्रसाद वितरित किया गया। आयोजक राकेश शुक्ला ने कहा कि 30 जनवरी को कथा के समापन के बाद भंडारे का आयोजन होगा। संवाद
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सांसारिक वस्तुओं से नहीं मिलता स्थायी आनंद : स्वामी सत्यानंद
जलालाबाद। नगर के फर्रुखाबाद हाईवे स्थित सोअहम आश्रम में चल रहे सात दिवसीय सत्संग समारोह के चौथे दिन वृंदावन के सोअहम पीठाधीश्वर स्वामी सत्यानन्द महाराज ने कहा कि संसार की विभिन्न वस्तुओं से क्षणिक सुख भले मिल जाए लेकिन स्थायी शांति या आनंद नहीं मिल सकता। संसार मे आने वाले को विवेकपूर्वक सत्य व असत्य पर विचार कर कार्य करना चाहिए। सत्य को हृदय में धारण करने वाले मनुष्य ही सांसारिक माया-मोह से दूर रह पाते हैं।
स्वामी प्रीतमदास महाराज ने रामायण के विभिन्न प्रसंग सुनाकर सत्संग की महिमा का बखान किया तथा उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दी। स्वामी शिवानंद ने स्वयं तथा आत्मा को जानने के लिए प्रेरित किया। स्वामी सच्चिदानंद ने अपने प्रवचनों के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। अंत में प्रमोद गुप्ता, वेदप्रकाश, रामगोपाल, गोपाल गुप्ता आदि ने भगवान की आरती की। आयोजकों के अनुसार 31 जनवरी को संत सम्मेलन का समापन होगा।
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मनुष्य जो बोएगा, वही काटेगा : अतुल तिवारी
जलालाबाद। क्षेत्र के गांव नौसारा लहसड़ी स्थित श्री देवधाम आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान पं. अतुल तिवारी ने राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि कलयुग का जुआ, सट्टा, मदिरा, वेश्यावृत्ति, मांस आदि में वास होता है इसलिए मनुष्य को इनसे बचना चाहिए।
कथा व्यास ने कौरव-पांडवों के बीच हुए महाभारत के युद्ध का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि मनुष्य जो बोएगा, वही काटेगा। इस दौरान आश्रम के स्वामी सत्यदेव महाराज ने उपस्थित लोगों से जीवन में सत्कर्म करते रहने तथा आपसी सामंजस्य बनाकर राष्ट्र को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश का युवा भगवान श्रीकृष्ण व श्रीराम जैसा चरित्र अपने जीवन में उतारने का प्रयास करे, जिससे परिवार, समाज और देश उन्नति के पथ पर आगे बढ़ सके। संवाद
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उन्होंने कहा कि पांडव जब वनवास एवं अज्ञातवास काटकर वापस आए तो अपने राजपाठ की मांग दुर्योधन से की। दुर्योधन ने अज्ञातवास भंग होने की बात कही और फिर से वनवास जाने के लिए कहा। विदुर और भीष्म पितामह ने दुर्योधन को समझाया कि समय पूरा हो चुका है।
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पांडवों ने श्रीकृष्ण के हाथों पांच गांव देने का प्रस्ताव भेजा लेकिन दुर्योधन ने सुई की नोक बराबर भूमि भी देने से इन्कार कर दिया। दुर्योधन ने श्रीकृष्ण को बंदी बनाने का प्रयास किया। कथा श्रवण के दौरान भगवान शरण शर्मा, छत्रपाल शर्मा, मूलाराम गुप्ता, मुकेश त्रिवेदी, शिवकुमार तिवारी आदि मौजूद रहे। संवाद
यज्ञ और कथा के बाद हुआ भंडारा
खुटार। गुलरहानाथ बाबा मंदिर परिसर में चल रहे शतचंडी महायज्ञ और कथा का विश्राम होने पर बृहस्पतिवार को कन्या भोज और भंडारे का आयोजन किया गया।
बुधवार शाम को कथा व्यास श्रीराम वाजपेयी ने सत्संग और यज्ञ का महत्व बताते हुए कहा कि सत्संग से अच्छे विचार आते हैं और अच्छे विचारों ने अच्छे परिवार, अच्छे समाज का निर्माण होता है। कुरीतियों और अंधविश्वासों से मुक्ति मिलती है। यज्ञ से वातावरण शुद्ध होता है और बीमारियां दूर होती हैं। इस प्रकार यज्ञ का लाभ आसपास के लोगों को भी मिलता है।
बृहस्पतिवार सुबह देव प्रतिमाओं को भोग लगाने के बाद कन्या भोज किया गया। इसके बाद भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में नगर और आसपास के गांवों के श्रद्धालुओं ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन में मंदिर समिति के साथ ही नगर के तमाम लोगों का सहयोग रहा। संवाद
आत्मा के रूप में सभी मनुष्यों में विद्यमान भगवान : कथा व्यास
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भगवान से अनुराग करने वाले लोग पत्थर में भी उनका रूप देखते हैं। भगवान मनुष्य में विषमता और अशुद्धता को दूर कर उसमें नई ऊर्जा का संचार करते हैं। बोले कि आध्यात्मिक श्रेष्ठता पाकर ही मनुष्य शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक रूप से स्वस्थ हो पाता है। उन्होंने कहा कि भगवान की शरण पाकर ही मनुष्य परिवार सहित मोक्ष को प्राप्त करता है। कथा के बाद में आरती कर प्रसाद वितरित किया गया। आयोजक राकेश शुक्ला ने कहा कि 30 जनवरी को कथा के समापन के बाद भंडारे का आयोजन होगा। संवाद
सांसारिक वस्तुओं से नहीं मिलता स्थायी आनंद : स्वामी सत्यानंद
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स्वामी प्रीतमदास महाराज ने रामायण के विभिन्न प्रसंग सुनाकर सत्संग की महिमा का बखान किया तथा उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दी। स्वामी शिवानंद ने स्वयं तथा आत्मा को जानने के लिए प्रेरित किया। स्वामी सच्चिदानंद ने अपने प्रवचनों के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। अंत में प्रमोद गुप्ता, वेदप्रकाश, रामगोपाल, गोपाल गुप्ता आदि ने भगवान की आरती की। आयोजकों के अनुसार 31 जनवरी को संत सम्मेलन का समापन होगा।
मनुष्य जो बोएगा, वही काटेगा : अतुल तिवारी
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कथा व्यास ने कौरव-पांडवों के बीच हुए महाभारत के युद्ध का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि मनुष्य जो बोएगा, वही काटेगा। इस दौरान आश्रम के स्वामी सत्यदेव महाराज ने उपस्थित लोगों से जीवन में सत्कर्म करते रहने तथा आपसी सामंजस्य बनाकर राष्ट्र को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश का युवा भगवान श्रीकृष्ण व श्रीराम जैसा चरित्र अपने जीवन में उतारने का प्रयास करे, जिससे परिवार, समाज और देश उन्नति के पथ पर आगे बढ़ सके। संवाद

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