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Shamli News: एचडीएफसी फाइनेंस पर 1.05 लाख का जुर्माना
Sat, 24 Oct 2026 01:11 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sat, 24 Oct 2026 01:11 AM IST
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शामली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने ऋण पर बताई गई ब्याज दर से अधिक ब्याज वसूलने और अनुचित व्यापार व्यवहार के मामले में सुनवाई की। आयोग ने एचडीएफसी फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड पर 1.05 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
गांव म्यान कस्बा बिडोली निवासी धर्मेंद्र कुमार ने आयोग में 21 मार्च 2024 को परिवाद दाखिल किया था। आरोप था कि फाइनेंस एजेंटों और उसके अधिकारियों ने उन्हें 10 लाख रुपये से अधिक के ऋण पर 10 वर्ष के लिए नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर बताई थी।
इसके आधार पर उन्होंने ऋण के लिए आवेदन किया। कंपनी ने 30 नवंबर 2022 को 20,57,280 रुपये का ऋण स्वीकृत किया, जिसमें से 1,14,653 रुपये विभिन्न चार्ज के नाम पर काट लिए गए। उन्हें 19,42,627 रुपये का चेक दिया गया, जिसकी धनराशि 27 जनवरी 2023 को खाते में आई।
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परिवादी का आरोप था कि कंपनी ने सुरक्षा के तौर पर 13 ब्लैंक चेक लिए और बिना पर्याप्त धनराशि की जानकारी दिए दो चेक बैंक में लगा दिए, जो बाउंस हो गए।
इससे उनके खाते से जुर्माने की राशि भी काटी गई। ऋण की धनराशि खाते में आने के अगले दिन पहली किस्त के 37,069 रुपये काट लिए गए। दूसरी किस्त भी निर्धारित समय से पहले काटने का आरोप लगाया गया। बाद में कंपनी ने ब्याज दर 18 प्रतिशत वार्षिक बताई, जबकि पहले नौ प्रतिशत बताई गई थी।
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने शुक्रवार को बताया कि इस मामले में परिवाद स्वीकार करते हुए विपक्षी फाइनेंस कंपनी को परिवादी को 50 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और पांच हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने के आदेश दिए।
वहीं, 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड की धनराशि राजकोष में जमा कराई जाएगी। आयोग ने 45 दिन के अंदर आदेश का पालन नहीं करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी।
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गांव म्यान कस्बा बिडोली निवासी धर्मेंद्र कुमार ने आयोग में 21 मार्च 2024 को परिवाद दाखिल किया था। आरोप था कि फाइनेंस एजेंटों और उसके अधिकारियों ने उन्हें 10 लाख रुपये से अधिक के ऋण पर 10 वर्ष के लिए नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर बताई थी।
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इसके आधार पर उन्होंने ऋण के लिए आवेदन किया। कंपनी ने 30 नवंबर 2022 को 20,57,280 रुपये का ऋण स्वीकृत किया, जिसमें से 1,14,653 रुपये विभिन्न चार्ज के नाम पर काट लिए गए। उन्हें 19,42,627 रुपये का चेक दिया गया, जिसकी धनराशि 27 जनवरी 2023 को खाते में आई।
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परिवादी का आरोप था कि कंपनी ने सुरक्षा के तौर पर 13 ब्लैंक चेक लिए और बिना पर्याप्त धनराशि की जानकारी दिए दो चेक बैंक में लगा दिए, जो बाउंस हो गए।
इससे उनके खाते से जुर्माने की राशि भी काटी गई। ऋण की धनराशि खाते में आने के अगले दिन पहली किस्त के 37,069 रुपये काट लिए गए। दूसरी किस्त भी निर्धारित समय से पहले काटने का आरोप लगाया गया। बाद में कंपनी ने ब्याज दर 18 प्रतिशत वार्षिक बताई, जबकि पहले नौ प्रतिशत बताई गई थी।
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने शुक्रवार को बताया कि इस मामले में परिवाद स्वीकार करते हुए विपक्षी फाइनेंस कंपनी को परिवादी को 50 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और पांच हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने के आदेश दिए।
वहीं, 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड की धनराशि राजकोष में जमा कराई जाएगी। आयोग ने 45 दिन के अंदर आदेश का पालन नहीं करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी।