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Shamli News: पान-सुपारी से शुरू हुआ खेल, अब आईएसआई की जासूसी तक पहुंचा
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कैराना। 90 के दशक में क्षेत्र में प्रचलित गठरी व्यवसाय समय के साथ तस्करी के रास्ते होते हुए अब देशविरोधी गतिविधियों और जासूसी तक पहुंच चुका है। शुरुआती दौर में यह कारोबार भारत-पाकिस्तान के बीच छोटे स्तर के व्यापार के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन बाद में यह अवैध गतिविधियों में तब्दील हो गया।
बताया जाता है कि उस समय क्षेत्र के कई लोगों की रिश्तेदारी पाकिस्तान में होने के कारण दोनों देशों के लोगों का आना-जाना लगा रहता था। भारत से पान और सुपारी पाकिस्तान ले जाई जाती थी, जबकि वहां से मिर्जा चप्पल और डिस्को कपड़ा भारत लाया जाता था, जो स्थानीय बाजार में काफी लोकप्रिय था।
बाद में पाकिस्तान में सोने के सस्ते होने के चलते उसकी तस्करी भी शुरू हो गई। इसी दौरान कैराना निवासी दिलशाद मिर्जा और इकबाल काना इस नेटवर्क से जुड़े और पासपोर्ट-वीजा बनवाने का काम करने लगे। आरोप है कि बाद में उन्होंने महिलाओं को दैनिक मजदूरी और खर्च देकर तस्करी में शामिल किया, जिसे गठरी व्यवसाय कहा जाने लगा।
समय के साथ जब सोने की तस्करी कम हुई, तो यह नेटवर्क नकली नोटों और अवैध हथियारों की तस्करी में बदल गया। 1995 में दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पाकिस्तान निर्मित पिस्टल की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद इस नेटवर्क पर शिकंजा कसा गया। इसके बाद दिलशाद मिर्जा और इकबाल काना पाकिस्तान भाग गए थे।
दोनों वर्तमान में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रहकर आईएसआई के लिए काम कर रहे हैं और भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त हैं। आरोप है कि क्षेत्र में अपने पुराने संपर्कों और रिश्तेदारियों के जरिए वे यहां के युवाओं को गुमराह कर जासूसी गतिविधियों में शामिल करने का प्रयास करते हैं।
पिछले वर्ष पानीपत पुलिस ने मोहल्ला बेगमपुरा निवासी नोमान इलाही को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया था कि वह इकबाल काना के संपर्क में था और उसी के निर्देश पर गतिविधियां संचालित कर रहा था।
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बताया जाता है कि उस समय क्षेत्र के कई लोगों की रिश्तेदारी पाकिस्तान में होने के कारण दोनों देशों के लोगों का आना-जाना लगा रहता था। भारत से पान और सुपारी पाकिस्तान ले जाई जाती थी, जबकि वहां से मिर्जा चप्पल और डिस्को कपड़ा भारत लाया जाता था, जो स्थानीय बाजार में काफी लोकप्रिय था।
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बाद में पाकिस्तान में सोने के सस्ते होने के चलते उसकी तस्करी भी शुरू हो गई। इसी दौरान कैराना निवासी दिलशाद मिर्जा और इकबाल काना इस नेटवर्क से जुड़े और पासपोर्ट-वीजा बनवाने का काम करने लगे। आरोप है कि बाद में उन्होंने महिलाओं को दैनिक मजदूरी और खर्च देकर तस्करी में शामिल किया, जिसे गठरी व्यवसाय कहा जाने लगा।
समय के साथ जब सोने की तस्करी कम हुई, तो यह नेटवर्क नकली नोटों और अवैध हथियारों की तस्करी में बदल गया। 1995 में दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पाकिस्तान निर्मित पिस्टल की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद इस नेटवर्क पर शिकंजा कसा गया। इसके बाद दिलशाद मिर्जा और इकबाल काना पाकिस्तान भाग गए थे।
दोनों वर्तमान में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रहकर आईएसआई के लिए काम कर रहे हैं और भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त हैं। आरोप है कि क्षेत्र में अपने पुराने संपर्कों और रिश्तेदारियों के जरिए वे यहां के युवाओं को गुमराह कर जासूसी गतिविधियों में शामिल करने का प्रयास करते हैं।
पिछले वर्ष पानीपत पुलिस ने मोहल्ला बेगमपुरा निवासी नोमान इलाही को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया था कि वह इकबाल काना के संपर्क में था और उसी के निर्देश पर गतिविधियां संचालित कर रहा था।