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Siddharthnagar News: अलम के जुलूस में गूंजे नौहे, शोक व गम में डूबे अकीदतमंद
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 18 Jun 2026 02:25 AM IST
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हल्लौर में मुहर्रम की पहली तारीख पर मरसिया-मजलिस का आयोजन, देर रात तक चला मातम
सिद्धार्थनगर। मुहर्रम की पहली तारीख पर बुधवार को इमामबाड़ों और घरों में मरसिया-मजलिस का आयोजन हुआ, जबकि मंगलवार रात निकाले गए अलम के जुलूस में अकीदतमंदों ने नौहा और मातम कर हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। हल्लौर कस्बा स्थित इमाम बारगाह हुसैनिया सेठ बाबा में अलम का जुलूस निकाला गया। जुलूस में शामिल अकीदतमंद नौहा पढ़ते और मातम करते रहे। देर रात तक नौहा और मरसिया की सदाएं बुलंद होती रहीं। मुहर्रम की शुरुआत के साथ ही शिया समुदाय के लोगों ने काले वस्त्र पहनकर शोक जताया।
मुहर्रम की पहली तारीख पर दिनभर विभिन्न इमामबाड़ों में मजलिसों का दौर चलता रहा। इमाम बारगाह हुसैनिया बाबुल पर आयोजित कार्यक्रम में हैदरे कर्रार और उनके सहयोगियों ने मरसियाख्वानी की। इसके बाद जाकिर काजिम कर्बलाई ने मजलिस को संबोधित करते हुए हजरत इमाम हुसैन के काफिले के मदीना से कर्बला पहुंचने की ऐतिहासिक घटनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने इमाम हुसैन के हक, इंसाफ, सच्चाई और मानवता के संदेश को विस्तार से बताया।
मजलिस से पहले इमाम बारगाह हुसैनिया बाबुल में परंपरागत सद्दा (अलम) सजाया गया, जहां अकीदतमंदों ने नौहा और मातम किया। वहीं, सुबह इमामबाड़ा सेठ बाबा में आयोजित मरसिया-मजलिस में हैदरे कर्रार और उनके सहयोगियों ने मरसियाख्वानी की। जाकिर जमाल हैदर ने कर्बला की दास्तान और इमाम हुसैन की कुर्बानी के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
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इस अवसर पर अकबर मेहदी, मंजर मास्टर, मोहम्मद हैदर, फिदा, आबिद, साजिद, अशरफ, शबलू, रैना हल्लौरी समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
सिद्धार्थनगर। मुहर्रम की पहली तारीख पर बुधवार को इमामबाड़ों और घरों में मरसिया-मजलिस का आयोजन हुआ, जबकि मंगलवार रात निकाले गए अलम के जुलूस में अकीदतमंदों ने नौहा और मातम कर हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। हल्लौर कस्बा स्थित इमाम बारगाह हुसैनिया सेठ बाबा में अलम का जुलूस निकाला गया। जुलूस में शामिल अकीदतमंद नौहा पढ़ते और मातम करते रहे। देर रात तक नौहा और मरसिया की सदाएं बुलंद होती रहीं। मुहर्रम की शुरुआत के साथ ही शिया समुदाय के लोगों ने काले वस्त्र पहनकर शोक जताया।
मुहर्रम की पहली तारीख पर दिनभर विभिन्न इमामबाड़ों में मजलिसों का दौर चलता रहा। इमाम बारगाह हुसैनिया बाबुल पर आयोजित कार्यक्रम में हैदरे कर्रार और उनके सहयोगियों ने मरसियाख्वानी की। इसके बाद जाकिर काजिम कर्बलाई ने मजलिस को संबोधित करते हुए हजरत इमाम हुसैन के काफिले के मदीना से कर्बला पहुंचने की ऐतिहासिक घटनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने इमाम हुसैन के हक, इंसाफ, सच्चाई और मानवता के संदेश को विस्तार से बताया।
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मजलिस से पहले इमाम बारगाह हुसैनिया बाबुल में परंपरागत सद्दा (अलम) सजाया गया, जहां अकीदतमंदों ने नौहा और मातम किया। वहीं, सुबह इमामबाड़ा सेठ बाबा में आयोजित मरसिया-मजलिस में हैदरे कर्रार और उनके सहयोगियों ने मरसियाख्वानी की। जाकिर जमाल हैदर ने कर्बला की दास्तान और इमाम हुसैन की कुर्बानी के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर अकबर मेहदी, मंजर मास्टर, मोहम्मद हैदर, फिदा, आबिद, साजिद, अशरफ, शबलू, रैना हल्लौरी समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।