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Siddharthnagar News: 18.2 मिमी बारिश ने बिगाड़ी किसानों की उम्मीद, धान की फसल पर संकट
Sat, 31 Oct 2026 12:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 31 Oct 2026 12:14 AM IST
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शहर के बांसी मार्ग पर बारिश के दौरान आवागमन करते लोग संवाद
- बेमौसम बारिश से धान की फसल पर संकट, गेहूं और आलू की बुवाई भी पिछड़ने की आशंका
- सुबह से शुरू हुई बारिश दोपहर में हुई तेज, खेतों में भरा पानी; शहर में कीचड़ और जलभराव से जनजीवन प्रभावित
सिद्धार्थनगर। मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिस धान की फसल को किसान घर लाने की तैयारी कर रहे थे, बारिश और तेज हवाओं ने उस पर संकट खड़ा कर दिया है। शुक्रवार सुबह से शुरू हुई बूंदाबांदी दोपहर 11 बजे के बाद तेज हो गई। दिनभर रुक-रुककर हुई बारिश से खेतों में पानी भर गया और कई स्थानों पर तैयार धान की फसल प्रभावित हुई। वहीं, खेतों में नमी बढ़ने से गेहूं की बुवाई और आलू की खेती की तैयारी भी पिछड़ने की आशंका है।
बारिश का असर शहर की दिनचर्या पर भी पड़ा। सड़कों और गलियों में कीचड़ फैल गया। कई जगह जलभराव से आवागमन प्रभावित हुआ। बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही कम रही। ठंडी हवाओं के चलते लोगों को सर्दी का अहसास भी हुआ। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को जिले में 18.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। अधिकतम तापमान 22.2 और न्यूनतम 20.4 डिग्री सेल्सियस रहा। अधिकतम सापेक्षिक आर्द्रता 90 और न्यूनतम 70 प्रतिशत दर्ज की गई। उत्तरी-पूर्वी दिशा से पांच किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली।
तैयार धान की फसल गिरने और दाने खराब होने का खतरा
जिले के कई क्षेत्रों में धान की फसल पककर तैयार है। किसान कटाई और मड़ाई की तैयारी में जुटे थे। ऐसे समय बारिश होने से खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। हवा के साथ बारिश से पौधों के गिरने और खेतों में पानी भरने से कटाई-मड़ाई का काम प्रभावित हो सकता है। जिन किसानों ने धान काटकर खेतों में रखा है, उन्हें भी फसल सुरक्षित रखने की चिंता सता रही है। बारिश जारी रहने पर दानों की गुणवत्ता और पैदावार प्रभावित हो सकती है।
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गेहूं और आलू की खेती पर भी असर
बारिश का असर आगामी रबी सीजन की तैयारियों पर भी पड़ सकता है। खाली खेतों में किसान गेहूं की बुवाई के लिए जुताई करने की तैयारी में थे, लेकिन खेतों में नमी और जलभराव से काम प्रभावित हो सकता है। वहीं, आलू की बुवाई के लिए खेत तैयार करने में भी देरी होने की आशंका है।
बारिश से धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। जिन खेतों में अभी फसल नहीं है, वहां अधिक नमी के कारण अगली फसल की बुवाई में देरी हो सकती है। आलू की बुवाई भी प्रभावित होने की आशंका है। अगले 24 घंटे में पूर्वी उत्तर प्रदेश में मध्यम बादल छाए रहने और कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है। ऐसे में किसानों की चिंता बनी हुई है।
- डॉ. मार्कंडेय सिंह, कृषि वैज्ञानिक
एक नजर में मौसम का हाल
अधिकतम तापमान : 22.2 डिग्री सेल्सियस
न्यूनतम तापमान : 20.4 डिग्री सेल्सियस
बारिश : 18.2 मिलीमीटर
अधिकतम आर्द्रता : 90 प्रतिशत
न्यूनतम आर्द्रता : 70 प्रतिशत
हवा की गति : पांच किमी प्रति घंटा
हवा की दिशा : उत्तरी-पूर्वी
जोगिया में धान की फसल को भारी नुकसान, मुआवजे की मांग
जोगिया। बेमौसम बारिश ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। शुक्रवार सुबह से हुई बारिश से क्षेत्र में तैयार धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। किसानों का कहना है कि खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर पहले ही काफी खर्च हो चुका है। अब कटाई के समय बारिश होने से लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
किसान दीनानाथ, राजेश, भुलन, राखीराम, रामप्रकाश, विंदा, दुखीराम, कृष्ण, रामशब्द पांडेय, हरिद्वार, धनेई यादव और अशोक ने बताया कि इस बार धान की अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कपिया निवासी किसान बलराम लोधी ने बताया कि बारिश से धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। बढ़ती लागत से पहले ही किसान परेशान हैं। वहीं, महुआ निवासी नंदू यादव ने कहा कि फसल खराब होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों ने संबंधित अधिकारियों से खेतों में पहुंचकर नुकसान का जायजा लेने और प्रभावित फसलों का निष्पक्ष आकलन कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है।
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- सुबह से शुरू हुई बारिश दोपहर में हुई तेज, खेतों में भरा पानी
सिद्धार्थनगर। मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिस धान की फसल को किसान घर लाने की तैयारी कर रहे थे, बारिश और तेज हवाओं ने उस पर संकट खड़ा कर दिया है। शुक्रवार सुबह से शुरू हुई बूंदाबांदी दोपहर 11 बजे के बाद तेज हो गई। दिनभर रुक-रुककर हुई बारिश से खेतों में पानी भर गया और कई स्थानों पर तैयार धान की फसल प्रभावित हुई। वहीं, खेतों में नमी बढ़ने से गेहूं की बुवाई और आलू की खेती की तैयारी भी पिछड़ने की आशंका है।
बारिश का असर शहर की दिनचर्या पर भी पड़ा। सड़कों और गलियों में कीचड़ फैल गया। कई जगह जलभराव से आवागमन प्रभावित हुआ। बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही कम रही। ठंडी हवाओं के चलते लोगों को सर्दी का अहसास भी हुआ। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को जिले में 18.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। अधिकतम तापमान 22.2 और न्यूनतम 20.4 डिग्री सेल्सियस रहा। अधिकतम सापेक्षिक आर्द्रता 90 और न्यूनतम 70 प्रतिशत दर्ज की गई। उत्तरी-पूर्वी दिशा से पांच किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली।
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तैयार धान की फसल गिरने और दाने खराब होने का खतरा
जिले के कई क्षेत्रों में धान की फसल पककर तैयार है। किसान कटाई और मड़ाई की तैयारी में जुटे थे। ऐसे समय बारिश होने से खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। हवा के साथ बारिश से पौधों के गिरने और खेतों में पानी भरने से कटाई-मड़ाई का काम प्रभावित हो सकता है। जिन किसानों ने धान काटकर खेतों में रखा है, उन्हें भी फसल सुरक्षित रखने की चिंता सता रही है। बारिश जारी रहने पर दानों की गुणवत्ता और पैदावार प्रभावित हो सकती है।
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गेहूं और आलू की खेती पर भी असर
बारिश का असर आगामी रबी सीजन की तैयारियों पर भी पड़ सकता है। खाली खेतों में किसान गेहूं की बुवाई के लिए जुताई करने की तैयारी में थे, लेकिन खेतों में नमी और जलभराव से काम प्रभावित हो सकता है। वहीं, आलू की बुवाई के लिए खेत तैयार करने में भी देरी होने की आशंका है।
बारिश से धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। जिन खेतों में अभी फसल नहीं है, वहां अधिक नमी के कारण अगली फसल की बुवाई में देरी हो सकती है। आलू की बुवाई भी प्रभावित होने की आशंका है। अगले 24 घंटे में पूर्वी उत्तर प्रदेश में मध्यम बादल छाए रहने और कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है। ऐसे में किसानों की चिंता बनी हुई है।
- डॉ. मार्कंडेय सिंह, कृषि वैज्ञानिक
एक नजर में मौसम का हाल
अधिकतम तापमान : 22.2 डिग्री सेल्सियस
न्यूनतम तापमान : 20.4 डिग्री सेल्सियस
बारिश : 18.2 मिलीमीटर
अधिकतम आर्द्रता : 90 प्रतिशत
न्यूनतम आर्द्रता : 70 प्रतिशत
हवा की गति : पांच किमी प्रति घंटा
हवा की दिशा : उत्तरी-पूर्वी
जोगिया में धान की फसल को भारी नुकसान, मुआवजे की मांग
जोगिया। बेमौसम बारिश ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। शुक्रवार सुबह से हुई बारिश से क्षेत्र में तैयार धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। किसानों का कहना है कि खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर पहले ही काफी खर्च हो चुका है। अब कटाई के समय बारिश होने से लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
किसान दीनानाथ, राजेश, भुलन, राखीराम, रामप्रकाश, विंदा, दुखीराम, कृष्ण, रामशब्द पांडेय, हरिद्वार, धनेई यादव और अशोक ने बताया कि इस बार धान की अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कपिया निवासी किसान बलराम लोधी ने बताया कि बारिश से धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। बढ़ती लागत से पहले ही किसान परेशान हैं। वहीं, महुआ निवासी नंदू यादव ने कहा कि फसल खराब होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों ने संबंधित अधिकारियों से खेतों में पहुंचकर नुकसान का जायजा लेने और प्रभावित फसलों का निष्पक्ष आकलन कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है।

शहर के बांसी मार्ग पर बारिश के दौरान आवागमन करते लोग संवाद