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Siddharthnagar News: यूजीसी के नए नियमों के विरोध में किया दो किमी पैदल मार्च
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 04 Feb 2026 12:31 AM IST
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कलेक्ट्रेट पर यूजीसी एक्ट काे लेकर प्रदर्शन करते सवर्ण समाज के लोग। संवाद
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सिद्धार्थनगर। नए नियमों और यूजीसी एक्ट-2026 के विरोध में मंगलवार को सवर्ण समाज के लोगों ने बीएसए ग्राउंड में धरना प्रदर्शन किया। इसके बाद नारेबाजी करते हुए लगभग दो किलोमीटर पैदल जुलूस निकालकर कलक्ट्रेट पहुंचे।
एक्ट को काला कानून बताते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद मांगों के समर्थन में प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम न्यायिक को सौंपा। मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। बीएसए ग्राउंड से निकला जुलूस जैसे ही कलक्ट्रेट परिसर पहुंचा। प्रदर्शन और तेज हो गया। यहां करीब एक घंटे तक सवर्ण समाज के लोगों ने धरना-प्रदर्शन कर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इस दौरान प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ भी आक्रोश व्यक्त किया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि यूजीसी के नए नियम शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने के साथ-साथ समाज में जातीय विभाजन को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन के दौरान राम कृष्ण पांडेय, प्रेम पांडेय, पंडित सुधीर पांडेय उर्फ फरसा बाबा, अखंड प्रताप सिंह, दिव्यांशु, सुनील पांडेय, राकेश सिंह, विजय सिंह आदि ने कहा कि देश की आजादी और राष्ट्र निर्माण में सवर्ण एवं सामान्य वर्ग का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बावजूद इसके वर्तमान नीतियों में इस वर्ग की उपेक्षा की जा रही है। सभी का तर्क था कि आरक्षण का आधार जाति नहीं बल्कि आर्थिक स्थिति होनी चाहिए, ताकि समाज के सभी कमजोर वर्गों को समान अवसर मिल सके। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि यूजीसी के नए नियमों को जल्द वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
इस मौके पर अभिषेक पाठक, नीरज पांडेय, गणेश शंकर पांडेय, प्रदीप सिंह, उमेश सिंह, राम रूप पांडेय, निखिल दुबे आदि मौजूद रहे।
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एक्ट को काला कानून बताते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद मांगों के समर्थन में प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम न्यायिक को सौंपा। मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। बीएसए ग्राउंड से निकला जुलूस जैसे ही कलक्ट्रेट परिसर पहुंचा। प्रदर्शन और तेज हो गया। यहां करीब एक घंटे तक सवर्ण समाज के लोगों ने धरना-प्रदर्शन कर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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इस दौरान प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ भी आक्रोश व्यक्त किया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि यूजीसी के नए नियम शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने के साथ-साथ समाज में जातीय विभाजन को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन के दौरान राम कृष्ण पांडेय, प्रेम पांडेय, पंडित सुधीर पांडेय उर्फ फरसा बाबा, अखंड प्रताप सिंह, दिव्यांशु, सुनील पांडेय, राकेश सिंह, विजय सिंह आदि ने कहा कि देश की आजादी और राष्ट्र निर्माण में सवर्ण एवं सामान्य वर्ग का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बावजूद इसके वर्तमान नीतियों में इस वर्ग की उपेक्षा की जा रही है। सभी का तर्क था कि आरक्षण का आधार जाति नहीं बल्कि आर्थिक स्थिति होनी चाहिए, ताकि समाज के सभी कमजोर वर्गों को समान अवसर मिल सके। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि यूजीसी के नए नियमों को जल्द वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
इस मौके पर अभिषेक पाठक, नीरज पांडेय, गणेश शंकर पांडेय, प्रदीप सिंह, उमेश सिंह, राम रूप पांडेय, निखिल दुबे आदि मौजूद रहे।
