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Sitapur News: नैमिष में लिंगधारिणी के रूप में विराजती हैं ललिता मैया
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Wed, 18 Mar 2026 11:48 PM IST
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फोटो-17मां ललिता देवी। संवाद
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नैमिषारण्य (सीतापुर)। आदि शक्तिपीठ मां ललिता देवी यहां लिंगधारिणी के रूप में विराजती हैं। नवरात्रि में देश, विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आकर दर्शन-पूजन करते हैं। मंदिर प्रांगण में दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। श्रद्धालु यहां ललिता मैया को छत्र, नारियल, चुनरी भेंटकर परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं।
मत्स्यपुराण के अनुसार नैमिषारण्य की पावन धरा पर मां सती का श्री विग्रह लिंगधारिणी के रूप में प्रतिष्ठित है। देवी भागवत के अनुसार जब मां सती देवादि देव के अपमान से क्षुब्ध होकर अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ कुंड में समा गई थीं, तब भगवान शिव के तीव्र क्रोध के फल स्वरूप उत्पन्न वीरभद्र ने राजा दक्ष के यज्ञ को तहस-नहस कर दिया था और राजा दक्ष का वध कर दिया था। इसके बाद भगवान शिव शोक संतृप्त होकर मां सती के शांत शरीर को लेकर यत्र-तत्र भ्रमण करने लगे थे, तब सुदर्शन चक्र धारण करने वाले भगवान विष्णु ने प्रभु शिव के शोक का नाश करने के लिए अपने दिव्य अस्त्र से मां सती के शरीर के 108 भाग किए। इन्हीं मां सती के दिव्य शरीर के भाग 108 स्थानों को प्राप्त हुए और प्रत्येक स्थान देवीपीठ के रूप में विख्यात हुआ। नैमिषारण्य तीर्थ स्थित मां ललिता देवी उन्हीं 108 देवीपीठों में से एक मुख्य देवीपीठ है। मां ललिता के पावन दरबार में नवरात्रि का समय विशेष पुण्यदायी होता है। ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु इन पावन दिनों में श्रद्धाभाव से माता का दर्शन व पूजन, व्रत, हवन करता है, मां उसकी सभी मनोकामना पूर्ण करती हैं।
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मत्स्यपुराण के अनुसार नैमिषारण्य की पावन धरा पर मां सती का श्री विग्रह लिंगधारिणी के रूप में प्रतिष्ठित है। देवी भागवत के अनुसार जब मां सती देवादि देव के अपमान से क्षुब्ध होकर अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ कुंड में समा गई थीं, तब भगवान शिव के तीव्र क्रोध के फल स्वरूप उत्पन्न वीरभद्र ने राजा दक्ष के यज्ञ को तहस-नहस कर दिया था और राजा दक्ष का वध कर दिया था। इसके बाद भगवान शिव शोक संतृप्त होकर मां सती के शांत शरीर को लेकर यत्र-तत्र भ्रमण करने लगे थे, तब सुदर्शन चक्र धारण करने वाले भगवान विष्णु ने प्रभु शिव के शोक का नाश करने के लिए अपने दिव्य अस्त्र से मां सती के शरीर के 108 भाग किए। इन्हीं मां सती के दिव्य शरीर के भाग 108 स्थानों को प्राप्त हुए और प्रत्येक स्थान देवीपीठ के रूप में विख्यात हुआ। नैमिषारण्य तीर्थ स्थित मां ललिता देवी उन्हीं 108 देवीपीठों में से एक मुख्य देवीपीठ है। मां ललिता के पावन दरबार में नवरात्रि का समय विशेष पुण्यदायी होता है। ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु इन पावन दिनों में श्रद्धाभाव से माता का दर्शन व पूजन, व्रत, हवन करता है, मां उसकी सभी मनोकामना पूर्ण करती हैं।
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