{"_id":"697a49b6fec7af706a0c83c6","slug":"a-constable-involved-in-smuggling-had-been-running-a-gang-for-eight-years-was-arrested-with-smack-sonbhadra-news-c-194-1-son1018-141087-2026-01-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonebhadra News: तस्करी में संलिप्त सिपाही आठ साल से चला रहा था गिरोह, स्मैक के साथ हुई थी गिरफ्तारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonebhadra News: तस्करी में संलिप्त सिपाही आठ साल से चला रहा था गिरोह, स्मैक के साथ हुई थी गिरफ्तारी
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले की पुलिस के हत्थे चढ़े सिपाही सुनील कुमार यादव के चौंकाने वाले कारनामे सामने आए हैं। पिछले आठ साल से जहां वह यूपी के कई जिलों के साथ ओडिशा से दिल्ली तक मादक पदार्थों की तस्करी का गैंग चला रहा है।
वहीं वर्ष 2018 में लखनऊ में पकड़ी गई तस्करी और अमेठी में नकली शराब की फैक्ट्री के संचालन भी उसकी संलिप्तता उजागर हुई थी। इसके बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया था।
वर्ष 2022 में अमेठी में नेपाल से स्मैक लाते समय उसकी गिरफ्तारी भी हुई थी। जेल से छूटने के बाद उसने अदालत की शरण ली। अदालत के आदेश पर उसकी बहाली हुई और सुल्तानपुर में तैनाती भी मिल गई लेकिन उसके संरक्षण और देखरेख में चल रहा तस्करी का खेल बना रहा।
18 मार्च 2018 को सुनील का नाम तस्करों की सूची में तब पहली बार सामने आया था जब लखनऊ के चौक थाने में एक नाले पर गोमांस से लदा वाहन पकड़ा गया था। पशु चिकित्सा विभाग के परीक्षण में इसकी पुष्टि होने के बाद पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो उसमें रायबरेली के आदर्शपुरम रतापुर निवासी सुनील कुमार यादव का नाम सामने आया।
कुछ माह बाद ही आठ दिसंबर 2018 को कमरौली में एक गोदाम के भीतर संचालित हो रहे नकली शराब के कारखाने का भंडाफोड़ हुआ तो इसमें भी सुनील का नाम सामने आने के बाद खाकी पर सवाल खड़े होने लगे। अगले दिन ही एक वाहन पकड़ में आया जिसमें राजकीय चिन्ह का लोगो लगा हुआ था और उससे शराब की तस्करी जा रही थी।
वर्दी पर दाग की स्थिति को देखते हुए उसे उसी साल बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद भी उसने सुधार का रास्ता अपनाने की बजाय अपराध की ही राह थामे रखी। 2022 में उसे दो साथियों के साथ स्मैक लाते पकड़ा गया। जिस कार से इसे लाया जा रहा था उसे खुद सुनील चला रहा था। पूछताछ में उसने ओडिशा से गांजा लाने की भी बात स्वीकार की थी।
Trending Videos
वहीं वर्ष 2018 में लखनऊ में पकड़ी गई तस्करी और अमेठी में नकली शराब की फैक्ट्री के संचालन भी उसकी संलिप्तता उजागर हुई थी। इसके बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
वर्ष 2022 में अमेठी में नेपाल से स्मैक लाते समय उसकी गिरफ्तारी भी हुई थी। जेल से छूटने के बाद उसने अदालत की शरण ली। अदालत के आदेश पर उसकी बहाली हुई और सुल्तानपुर में तैनाती भी मिल गई लेकिन उसके संरक्षण और देखरेख में चल रहा तस्करी का खेल बना रहा।
18 मार्च 2018 को सुनील का नाम तस्करों की सूची में तब पहली बार सामने आया था जब लखनऊ के चौक थाने में एक नाले पर गोमांस से लदा वाहन पकड़ा गया था। पशु चिकित्सा विभाग के परीक्षण में इसकी पुष्टि होने के बाद पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो उसमें रायबरेली के आदर्शपुरम रतापुर निवासी सुनील कुमार यादव का नाम सामने आया।
कुछ माह बाद ही आठ दिसंबर 2018 को कमरौली में एक गोदाम के भीतर संचालित हो रहे नकली शराब के कारखाने का भंडाफोड़ हुआ तो इसमें भी सुनील का नाम सामने आने के बाद खाकी पर सवाल खड़े होने लगे। अगले दिन ही एक वाहन पकड़ में आया जिसमें राजकीय चिन्ह का लोगो लगा हुआ था और उससे शराब की तस्करी जा रही थी।
वर्दी पर दाग की स्थिति को देखते हुए उसे उसी साल बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद भी उसने सुधार का रास्ता अपनाने की बजाय अपराध की ही राह थामे रखी। 2022 में उसे दो साथियों के साथ स्मैक लाते पकड़ा गया। जिस कार से इसे लाया जा रहा था उसे खुद सुनील चला रहा था। पूछताछ में उसने ओडिशा से गांजा लाने की भी बात स्वीकार की थी।
