रॉबर्ट्सगंज के श्रीराम जानकी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास आचार्य मनोहर कृष्ण महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्ति, धर्म और मर्यादा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा और अखंड भक्ति से भगवान की प्राप्ति संभव है। महाराज खटवांग का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि इक्ष्वाकु वंश के इस प्रतापी राजा ने अपनी अटूट भक्ति और विश्वास के बल पर भगवान को प्राप्त कर लिया था। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति निष्कपट भाव से भगवान का स्मरण करता है, वह निश्चित रूप से उनकी कृपा का पात्र बनता है। कथा के दौरान आचार्य ने सूर्यवंश की वंशावली का वर्णन करते हुए बताया कि राजा सत्यव्रत की रक्षा के लिए भगवान नारायण ने मत्स्य अवतार धारण किया था। उन्होंने कहा कि भगवान सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। माता सीता के हरण और वानर सेना के सहयोग से रावण वध की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि रावण अहंकार का प्रतीक था, जबकि भगवान राम धर्म और सत्य के प्रतीक हैं। आचार्य ने चंद्रवंश, यदुवंश और भगवान परशुराम की कथाओं का भी वर्णन किया। कृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग पर श्रद्धालु भक्ति में सराबोर हो उठे और आकर्षक झांकियों का दर्शन किया। इस अवसर पर डॉ. मारकंडेय पाठक, ओमप्रकाश पाठक, महेंद्र प्रसाद शुक्ला, आशुतोष पाठक, अजीत शुक्ला, प्रदीप चौरसिया, जेवी सिंह, राजेश देव पांडेय आदि मौजूद रहे।