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Sonebhadra News: मेडिसिन विभाग में पहुंच रहा हर चौथा मरीज हाइपरटेंशन से पीड़ित
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सोनभद्र। साइलेंट किलर कही जाने वाली उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) की बीमारी तेजी से लोगों को चपेट में ले रही है। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में आने वाले हर चौथा मरीज रक्तचाप की बीमारी से पीड़ित मिल रहा है। ज्यादातर मरीज 50 या उससे अधिक उम्र के पाए जा रहे हैं लेकिन 30 से 50 वर्ष की आयु वालों में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते बीमारी की पहचान कर इलाज शुरू नहीं किया गया तो दिल का दौरा-स्ट्रोक का खतरा बढ़ने के साथ ही कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
बिगड़ी जीवन शैली और अनियमित खान-पान ने कम उम्र के लोगों को भी उच्च रक्तचाप का मरीज बनाना शुरू कर दिया है। मेडिसिन विभाग में रोजाना आने वाले लगभग 300 मरीज में से 70-75 मरीज उच्च रक्तचाप की समस्या से पीड़ित पाए जा रहे हैं। कई मरीज ऐसे हैं जिन्हें बार-बार यह समस्या हो रही है जिसके चलते उन्हें आए दिन मेडिकल कॉलेज का चक्कर लगाना पड़ रहा है। डॉक्टर भी उन्हें जरूरी एहतियात बरतने की सलाह दे रहे है। इस मामले में शहरों में रहने वालों की स्थिति ज्यादा खराब बताई जा रही है। मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले रक्तचाप के मरीजों में भी ज्यादातर संख्या कस्बे में रहने वाले लोगों को बताई जा रही है।
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बिगड़ते परिवेश में भी गांव सुरक्षित पर एहतियात जरूरी :
आरोग्य मेला के जरिए प्रति सप्ताह की जाने वाली मरीजों की स्क्रीनिंग में भी गांव में निवास करने वालों के लिए खतरे की घंटी बजने लगी है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले वित्तीय वर्ष में 626498 लोगों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग की गई थी। इसमें 1483 लोगों को उच्च रक्तचाप से पीड़ित होने की पुष्टि हुई। उन्हें उपचार के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास रेफर किया गया।
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इन लक्षणों पर दें ध्यान, ऐसे करें बचाव :
120/80 एमएमएचजी रक्तचाप को सामान्य माना जाता है। इसे संतुलित रखने के लिए रोजाना आधा चम्मच से भी कम नमक खाएं। प्रोसेस्ड और डिब्बाबंद खाने का सेवन न करें। भोजन में ताजे फल, सब्जियां, साबूत अनाज और पानी को ज्यादा तरजीह दें। वजन नियंत्रित रखें। रोजाना कम से कम 30 मिनट की सैर या हल्का व्यायाम जरूर करें। खुद पर तनाव हावी न होने दें। इससे बचाव के लिए योग और ध्यान का सहारा लें। शराब और धूम्रपान बिल्कुल न करें। 18 साल से उपर उम्र होने पर साल में एक बार इसकी जांच अवश्य कराएं। 40 वर्ष से अधिक वाले दो बार, मोटापा, मधुमेह से ग्रसित हैं या परिवार में किसी को रक्तचाप की बीमारी है तो वह प्रत्येक तीन माह पर जांच कराते रहें।
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वर्जन -
उक्त रक्तचाप की बीमारी स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक है। इसी कारण इसे साइलेंट किलर का दर्जा दिया जाता है। बिगड़ी जीवनशैली और खराब खान-पान के चलते कम उम्र वाले भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। स्थिति यह है कि मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में पहुंचने वाला करीब-करीब हर चौथा मरीज रक्तचाप की समस्या से पीड़ित मिल रहा। इसको देखते हुए जरूरी है कि नशे से दूर रहें। तनाव कम से कम लें। व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। - डॉ. राहुल सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, मेडिकल कॉलेज।
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बिगड़ी जीवन शैली और अनियमित खान-पान ने कम उम्र के लोगों को भी उच्च रक्तचाप का मरीज बनाना शुरू कर दिया है। मेडिसिन विभाग में रोजाना आने वाले लगभग 300 मरीज में से 70-75 मरीज उच्च रक्तचाप की समस्या से पीड़ित पाए जा रहे हैं। कई मरीज ऐसे हैं जिन्हें बार-बार यह समस्या हो रही है जिसके चलते उन्हें आए दिन मेडिकल कॉलेज का चक्कर लगाना पड़ रहा है। डॉक्टर भी उन्हें जरूरी एहतियात बरतने की सलाह दे रहे है। इस मामले में शहरों में रहने वालों की स्थिति ज्यादा खराब बताई जा रही है। मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले रक्तचाप के मरीजों में भी ज्यादातर संख्या कस्बे में रहने वाले लोगों को बताई जा रही है।
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बिगड़ते परिवेश में भी गांव सुरक्षित पर एहतियात जरूरी :
आरोग्य मेला के जरिए प्रति सप्ताह की जाने वाली मरीजों की स्क्रीनिंग में भी गांव में निवास करने वालों के लिए खतरे की घंटी बजने लगी है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले वित्तीय वर्ष में 626498 लोगों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग की गई थी। इसमें 1483 लोगों को उच्च रक्तचाप से पीड़ित होने की पुष्टि हुई। उन्हें उपचार के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास रेफर किया गया।
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इन लक्षणों पर दें ध्यान, ऐसे करें बचाव :
120/80 एमएमएचजी रक्तचाप को सामान्य माना जाता है। इसे संतुलित रखने के लिए रोजाना आधा चम्मच से भी कम नमक खाएं। प्रोसेस्ड और डिब्बाबंद खाने का सेवन न करें। भोजन में ताजे फल, सब्जियां, साबूत अनाज और पानी को ज्यादा तरजीह दें। वजन नियंत्रित रखें। रोजाना कम से कम 30 मिनट की सैर या हल्का व्यायाम जरूर करें। खुद पर तनाव हावी न होने दें। इससे बचाव के लिए योग और ध्यान का सहारा लें। शराब और धूम्रपान बिल्कुल न करें। 18 साल से उपर उम्र होने पर साल में एक बार इसकी जांच अवश्य कराएं। 40 वर्ष से अधिक वाले दो बार, मोटापा, मधुमेह से ग्रसित हैं या परिवार में किसी को रक्तचाप की बीमारी है तो वह प्रत्येक तीन माह पर जांच कराते रहें।
वर्जन -
उक्त रक्तचाप की बीमारी स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक है। इसी कारण इसे साइलेंट किलर का दर्जा दिया जाता है। बिगड़ी जीवनशैली और खराब खान-पान के चलते कम उम्र वाले भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। स्थिति यह है कि मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में पहुंचने वाला करीब-करीब हर चौथा मरीज रक्तचाप की समस्या से पीड़ित मिल रहा। इसको देखते हुए जरूरी है कि नशे से दूर रहें। तनाव कम से कम लें। व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। - डॉ. राहुल सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, मेडिकल कॉलेज।