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Sonebhadra News: ध्वस्त भवन की मरम्मत के नाम डकार गए तीन लाख रुपये, जांच अटकी
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तीन साल पहले जिस भवन को जर्जर बताते हुए ध्वस्त कर दिया गया था, उसकी रंगाई-पोताई और मरम्मत के नाम पर धन निकासी जारी रही। तीन साल तक ध्वस्त भवन की मरम्मत के नाम पर समग्र अनुदान की राशि निकाली जाती रही। महज एक विद्यालय में तीन लाख के गबन का दावा किया गया। मामला संज्ञान में आने पर सीडीओ ने जांच के निर्देश दिए, मगर 18 दिन बाद भी जांच पूरी नहीं हो पाई।
मामला नगवां ब्लाक के बड़ैला स्थित विद्यालय का है। गांव के ही राजकुमार ने शिकायत में कहा है कि उच्च प्राथमिक विद्यालय का मूल भवन जर्जर होने के कारण वित्तीय वर्ष 2023-24 में ध्वस्त करा दिया गया। इसके बाद इसकी कक्षाएं प्राथमिक विद्यालय में संचालित कराई जाने लगीं। दोनों विद्यालयों का प्रभार एक ही शिक्षक के पास है। आरोप है कि उच्च प्राथमिक विद्यालय का भवन ध्वस्त होने के बावजूद उसकी रंगाई-पोताई, दरवाजे, खिड़की आदि की मरम्मत के नाम पर वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में समग्र अनुदान के रूप में हर साल एक-एक लाख रुपये निकाल लिए गए। दिलचस्प बात है कि किसी भी भुगतान से पहले मौके का सत्यापन जरूरी होता है। बजट की मंजूरी के लिए जिले तक के अफसरों की मंजूरी और संबंधित पटल सहायक के टिप्पणी की जरूरत पड़ती है। बावजूद यहां सभी बेखबर बने रहे।
फाइलों में जारी होते रहे निर्देश, जांच अटकी
सीडीओ ने डीडीओ हेमंत कुमार सिंह को जांच अधिकारी नामित किया था। उन्होंने छह अप्रैल को बीएसए को पत्र भेजकर वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 व 2025-26 में समग्र अनुदान का व्यय विवरण और अतिरिक्त कक्षा कक्ष के निर्माण का प्राक्कलन व अभिलेख तीन दिन में तलब की। बीएसए ने सात अप्रैल को पटल सहायक देवेश-विवेक को नियमानुसार कार्रवाई का निर्देश दिया। इसी पत्र पर आठ अप्रैल को निर्देशित किया कि डीसी निर्माण और बीईओ नगवां संयुक्त जांच कर आख्या प्रस्तुत करें।
नौ को गठित की चार सदस्यीय टीम
बीएसए मुकुल आनंद पांडेय ने नौ अप्रैल को मामले की जांच के लिए टीम गठित की। निर्देश जारी किया कि तीन दिन में जांच कर साक्ष्यों सहित सुस्पष्ट आख्या प्रस्तुत करें, ताकि उससे डीडीओ को अवगत कराया जा सके। शिकायत एडी बेसिक अनिल वर्मा के पास भी पहुंची थी। चार अप्रैल को बीएसए को पत्र जारी कर निर्देश दिया था कि 20 अप्रैल की शाम तक लगाए गए आरोप से जुड़े सभी रिकॉर्ड उनके कार्यालय में उपलब्ध करा दिए जाएं। निर्देश की प्रति मंडलायुक्त, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, निदेशक मध्याह्न भोजन प्राधिकरण को भी भेजी गई थी
अभी हमें जांच के लिए दिए गए निर्देश की प्रति नहीं मिली है। कार्यालय से जानकारी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - महेंद्र मौर्य, बीईओ राबर्ट्सगंज।
नामांकन की व्यस्तता के कारण अभी जांच नहीं हो पाई है। जल्द ही जांच पूरी कर रिपोर्ट भेज दी जाएगी। - धनंजय कुमार सिंह, बीईओ, नगवां।
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मामला नगवां ब्लाक के बड़ैला स्थित विद्यालय का है। गांव के ही राजकुमार ने शिकायत में कहा है कि उच्च प्राथमिक विद्यालय का मूल भवन जर्जर होने के कारण वित्तीय वर्ष 2023-24 में ध्वस्त करा दिया गया। इसके बाद इसकी कक्षाएं प्राथमिक विद्यालय में संचालित कराई जाने लगीं। दोनों विद्यालयों का प्रभार एक ही शिक्षक के पास है। आरोप है कि उच्च प्राथमिक विद्यालय का भवन ध्वस्त होने के बावजूद उसकी रंगाई-पोताई, दरवाजे, खिड़की आदि की मरम्मत के नाम पर वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में समग्र अनुदान के रूप में हर साल एक-एक लाख रुपये निकाल लिए गए। दिलचस्प बात है कि किसी भी भुगतान से पहले मौके का सत्यापन जरूरी होता है। बजट की मंजूरी के लिए जिले तक के अफसरों की मंजूरी और संबंधित पटल सहायक के टिप्पणी की जरूरत पड़ती है। बावजूद यहां सभी बेखबर बने रहे।
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फाइलों में जारी होते रहे निर्देश, जांच अटकी
सीडीओ ने डीडीओ हेमंत कुमार सिंह को जांच अधिकारी नामित किया था। उन्होंने छह अप्रैल को बीएसए को पत्र भेजकर वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 व 2025-26 में समग्र अनुदान का व्यय विवरण और अतिरिक्त कक्षा कक्ष के निर्माण का प्राक्कलन व अभिलेख तीन दिन में तलब की। बीएसए ने सात अप्रैल को पटल सहायक देवेश-विवेक को नियमानुसार कार्रवाई का निर्देश दिया। इसी पत्र पर आठ अप्रैल को निर्देशित किया कि डीसी निर्माण और बीईओ नगवां संयुक्त जांच कर आख्या प्रस्तुत करें।
नौ को गठित की चार सदस्यीय टीम
बीएसए मुकुल आनंद पांडेय ने नौ अप्रैल को मामले की जांच के लिए टीम गठित की। निर्देश जारी किया कि तीन दिन में जांच कर साक्ष्यों सहित सुस्पष्ट आख्या प्रस्तुत करें, ताकि उससे डीडीओ को अवगत कराया जा सके। शिकायत एडी बेसिक अनिल वर्मा के पास भी पहुंची थी। चार अप्रैल को बीएसए को पत्र जारी कर निर्देश दिया था कि 20 अप्रैल की शाम तक लगाए गए आरोप से जुड़े सभी रिकॉर्ड उनके कार्यालय में उपलब्ध करा दिए जाएं। निर्देश की प्रति मंडलायुक्त, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, निदेशक मध्याह्न भोजन प्राधिकरण को भी भेजी गई थी
अभी हमें जांच के लिए दिए गए निर्देश की प्रति नहीं मिली है। कार्यालय से जानकारी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - महेंद्र मौर्य, बीईओ राबर्ट्सगंज।
नामांकन की व्यस्तता के कारण अभी जांच नहीं हो पाई है। जल्द ही जांच पूरी कर रिपोर्ट भेज दी जाएगी। - धनंजय कुमार सिंह, बीईओ, नगवां।

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