पानी से घिरी पाठशाला, नाव से आ रहे गुरुजी

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 20 Sep 2021 11:37 PM IST
20.21. बल्दीराय के कांकरकोला गांव में नदी के सहारे आवागन करते लोग।
20.21. बल्दीराय के कांकरकोला गांव में नदी के सहारे आवागन करते लोग। - फोटो : SULTANPUR
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सुल्तानपुर। बारिश से गोमती नदी में आई बाढ़ से तराई क्षेत्र के दर्जन भर गांव पानी से घिर गए हैं। सड़क डूबने से बल्दीराय क्षेत्र के एक कंपोजटि विद्यालय में शिक्षकों को नाव से जाना पड़ा। खेत डूबने से फसलों के नष्ट होने की आशंका बनी है। हालांकि सोमवार को चौथे दिन गोमती नदी का जलस्तर थम गया लेकिन नदी की कटान जारी है। पानी घटने पर कटान में तेजी आने की आशंका बनी है। तराई क्षेत्र की करीब 30 हजार आबादी पर संकट बना है। पिछले दिनों लगातार दो दिनों तक हुई बारिश से गोमती नदी में बाढ़ आ गई है। नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। हालांकि नदी का जलस्तर स्थिर होने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
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बल्दीराय क्षेत्र के कांकरकोला में स्थित कंपोजिट विद्यालय का मार्ग गोमती नदी में आई बाढ़ के पानी से डूब गया है। तराई क्षेत्र में स्थित गांव के विद्यालय में सोमवार को सुबह पहुंचने के लिए शिक्षकों को नाव का सहारा लेना पड़ा। केवटों ने शिक्षकों को कई चक्कर में नाव से विद्यालय तक पहुंचाया। विद्यालय में सोमवार को सिर्फ कांकरकोला के ही बच्चे आए। शिक्षकों का कहना है कि इस विद्यालय में अधिकांश कांकरकोला के ही बच्चे अध्ययनरत हैं। वापसी में भी शिक्षकों को नाव का सहारा लेना पड़ा।

दर्जन भर गांवों की फसलें पानी में डूबीं
दो दिनों की लगातार बारिश के बाद बल्दीराय, कुड़वार व धनपतगंज क्षेत्र के तराई में स्थित दर्जन भर गांव पानी से घिर गए हैं। टापू पर बसे गांवों के चारों ओर नदी का पानी पहुंचने से ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हुआ है। नदी का जलस्तर बढ़ने से नौगवांतीर, भंडरा, लाला का पुरवा, जज्जौर, नीरसहिया, दहलवा, गोसाईं का परुवा, अमउजासरपुर, कांकरकोला समेत कई गांव पानी से घिर गए हैं। नदी के कछार में स्थित किसानों की फसलें डूब गई हैं। फसलें डूबने से उनके नष्ट होने की आशंका से किसान चिंतित हैं। अमउजासरपुर गांव में कई घरों में पानी घुस गया है। ग्रामीणों ने अपने जानवरों को दूर ऊंचे स्थानों पर बांध रखा है। नदी का जलस्तर सोमवार को स्थित होने से ग्रामीणों को कटान की आशंका बनी है। कटान से कई वर्ष पहले धनपतगंज क्षेत्र के कई गांवों की कृषि योग्य भूमि नदी में समा गई थी। शहर के सीताकुंड घाट पर पानी का जलस्तर बढ़ने से सीढ़ियां डूब गई हैं।

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