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Unnao News: आक्रामक हुए कुत्ते-बंदर...जीना किया दुश्वार
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उन्नाव। आवारा कुत्तों और बंदरों की बढ़ती आक्रामकता लोगों को मुसीबत में डाल रही है। शुक्रवार को हिलौली में स्कूल से लौट रहे छह बच्चों पर कुत्ते ने हमला कर घायल कर दिया। जिला अस्पताल में रोजा औसतन 30 लोग एंटी रैबीज टीका लगवाने पहुंच रहे हैं। वहीं जिले की 16 सीएचसी में भी रोज औसतन दस नए मरीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं।
जिले में कुत्तों और बंदरों के हमलों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पशु चिकित्सक डॉ. संदीप सिंह ने बताया कि खुले में खाना मिलना, कचरे के पास भोजन की उपलब्धता, प्रजनन पर नियंत्रण अभियान में कमी और लोगों द्वारा परेशान या चोट पहुंचाने जैसी घटनाएं उन्हें आक्रामक बना रही हैं। मौसम परिवर्तन, भूख, चोट या संक्रमण के दौर में कुत्ते-बंदर असामान्य व्यवहार कर रहे हैं। वही बंदर अक्सर खाने की तलाश में आवासीय क्षेत्रों में घुसते हैं और बच्चों से खाना छीनने या भीड़ में घबराने के बाद हमला करते हैं। उन्होंने बताया कि बीमारी से संक्रमित कुत्ते और बंदर की लार में रैबीज का वायरस होता है। इनके काटने या खरोंचने पर वायरस, घाव से शरीर में नसों के जरिये रीढ़ और दिमाग तक पहुंचता है। खुले घाव, आंख, मुंह या नाक पर संक्रमित लार लगने से भी खतरा हो सकता है।
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बचाव
पशु चिकित्सक ने बताया कि कुत्ते के काटने के बाद तुरंत घाव को साफ पानी और साबुन से 15 मिनट तक धोना चाहिए। इसके बाद एंटीसेप्टिक लगाकर जल्द से जल्द सरकारी अस्पताल पहुंचकर एंटी रैबीज की डोज लगवानी चाहिए। गहरे घाव, चेहरे, गर्दन या हाथ पर काटने की स्थिति में इम्युनोग्लोबुलिन की भी जरूरत पड़ सकती है। कई लोग कुत्ते-बंदर के काटने के बाद घाव पर मिर्च, तेल, राख, पत्थर या जड़ी-बूटी लगाते हैं, जो बेहद खतरनाक है। विशेषज्ञ के अनुसार शुरुआत में लापरवाही और रैबीज के लक्षण प्रभावी होने के बाद इलाज लगभग असंभव होता है।
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दुली खेड़ा में खेलते बच्चे को काटा
बारासगवां थाना क्षेत्र के दुली खेड़ा गांव में 22 अक्तूबर की देर शाम सत्यनारायण का 13 वर्षीय बेटा नीलेश कुमार घर के पास खेल रहा था। तभी एक कुत्ते ने उसे काट लिया। परिजनों ने उसे 23 अक्तूबर को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोपालगंज ले जाया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद उसे छुट्टी दी गई।
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हिलौली में छह बच्चों पर हमला
हिलौली गांव में शुक्रवार को स्कूल से लौट रहे छह बच्चों पर एक पागल कुत्ते ने हमला कर दिया। घटना में तीन से 14 साल की उम्र के बच्चे घायल हुए। परिजनों ने अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज कर सभी को एंटी रैबीज टीका लगाया गया है।
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सलेमपुर में किशोर को घसीटा
हसनगंज के सलेमपुर गांव में 21 सितंबर को फूलचंद्र यादव का 14 वर्षीय बेटा नीरज घर से करीब 200 मीटर दूर खेल रहा था। तीन-चार कुत्तों ने हमला कर करीब 50 मीटर दूर आम के बाग तक खींच ले गए। राहगीरों ने चीख सुनकर उसे बचाया। घायल किशोर का इलाज कराया गया।
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टीका छोड़ना पड़ा भारी
डिथुआ गांव निवासी 33 वर्षीय शोभनाथ को पिछले साल कुत्ते ने काटा था, लेकिन उसने एंटी रैबीज की सभी डोज समय पर नहीं लीं। 24 जनवरी 2026 को उसकी हालत बिगड़ गई और उसे जिला अस्पताल में गंभीर हालत में पहुंचाया गया। बाद में केजीएमयू रेफर कर दिया गया।
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सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है। 24 घंटे के भीतर एंटी रैबीज की वैक्सीन लगवानी चाहिए, हालांकि कई बार लोग लापरवाही बरतते हैं। ऐसे में लोगों को एंटी रैबीज लगवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।-डॉ. एके शर्मा, सीएमओ
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जिले में कुत्तों और बंदरों के हमलों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पशु चिकित्सक डॉ. संदीप सिंह ने बताया कि खुले में खाना मिलना, कचरे के पास भोजन की उपलब्धता, प्रजनन पर नियंत्रण अभियान में कमी और लोगों द्वारा परेशान या चोट पहुंचाने जैसी घटनाएं उन्हें आक्रामक बना रही हैं। मौसम परिवर्तन, भूख, चोट या संक्रमण के दौर में कुत्ते-बंदर असामान्य व्यवहार कर रहे हैं। वही बंदर अक्सर खाने की तलाश में आवासीय क्षेत्रों में घुसते हैं और बच्चों से खाना छीनने या भीड़ में घबराने के बाद हमला करते हैं। उन्होंने बताया कि बीमारी से संक्रमित कुत्ते और बंदर की लार में रैबीज का वायरस होता है। इनके काटने या खरोंचने पर वायरस, घाव से शरीर में नसों के जरिये रीढ़ और दिमाग तक पहुंचता है। खुले घाव, आंख, मुंह या नाक पर संक्रमित लार लगने से भी खतरा हो सकता है।
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बचाव
पशु चिकित्सक ने बताया कि कुत्ते के काटने के बाद तुरंत घाव को साफ पानी और साबुन से 15 मिनट तक धोना चाहिए। इसके बाद एंटीसेप्टिक लगाकर जल्द से जल्द सरकारी अस्पताल पहुंचकर एंटी रैबीज की डोज लगवानी चाहिए। गहरे घाव, चेहरे, गर्दन या हाथ पर काटने की स्थिति में इम्युनोग्लोबुलिन की भी जरूरत पड़ सकती है। कई लोग कुत्ते-बंदर के काटने के बाद घाव पर मिर्च, तेल, राख, पत्थर या जड़ी-बूटी लगाते हैं, जो बेहद खतरनाक है। विशेषज्ञ के अनुसार शुरुआत में लापरवाही और रैबीज के लक्षण प्रभावी होने के बाद इलाज लगभग असंभव होता है।
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दुली खेड़ा में खेलते बच्चे को काटा
बारासगवां थाना क्षेत्र के दुली खेड़ा गांव में 22 अक्तूबर की देर शाम सत्यनारायण का 13 वर्षीय बेटा नीलेश कुमार घर के पास खेल रहा था। तभी एक कुत्ते ने उसे काट लिया। परिजनों ने उसे 23 अक्तूबर को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोपालगंज ले जाया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद उसे छुट्टी दी गई।
हिलौली में छह बच्चों पर हमला
हिलौली गांव में शुक्रवार को स्कूल से लौट रहे छह बच्चों पर एक पागल कुत्ते ने हमला कर दिया। घटना में तीन से 14 साल की उम्र के बच्चे घायल हुए। परिजनों ने अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज कर सभी को एंटी रैबीज टीका लगाया गया है।
सलेमपुर में किशोर को घसीटा
हसनगंज के सलेमपुर गांव में 21 सितंबर को फूलचंद्र यादव का 14 वर्षीय बेटा नीरज घर से करीब 200 मीटर दूर खेल रहा था। तीन-चार कुत्तों ने हमला कर करीब 50 मीटर दूर आम के बाग तक खींच ले गए। राहगीरों ने चीख सुनकर उसे बचाया। घायल किशोर का इलाज कराया गया।
टीका छोड़ना पड़ा भारी
डिथुआ गांव निवासी 33 वर्षीय शोभनाथ को पिछले साल कुत्ते ने काटा था, लेकिन उसने एंटी रैबीज की सभी डोज समय पर नहीं लीं। 24 जनवरी 2026 को उसकी हालत बिगड़ गई और उसे जिला अस्पताल में गंभीर हालत में पहुंचाया गया। बाद में केजीएमयू रेफर कर दिया गया।
सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है। 24 घंटे के भीतर एंटी रैबीज की वैक्सीन लगवानी चाहिए, हालांकि कई बार लोग लापरवाही बरतते हैं। ऐसे में लोगों को एंटी रैबीज लगवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।-डॉ. एके शर्मा, सीएमओ