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Unnao News: जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की आवाजाही का गार्ड दर्ज करेंगे ब्योरा
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उन्नाव। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के पीछे सात दिन पहले मृत मिले अज्ञात मरीज की मौत खाली पेट होने से पुष्टि होने के बाद भोजन देने पर तो सवाल खड़े ही हुए हैं, साथ ही वार्डों में लगे सीसीटीवी की निगरानी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इसका मतलब सीसीटीवी से उनकी निगरानी भी नहीं की जा रही है। नहीं तो ऐसा कैसे हो कि मरीज बेड से उठकर चला जाए और बाद में उसका इमरजेंसी वार्ड के पास ही शव पड़ा मिले, यह निगरानी पर बड़ा सवाल है। नई व्यवस्था में अब गार्डों की ड्यूटी लगाई गई है कि वह वार्ड से जाने वाले मरीजों का ब्योरा अपने पास रखेंगे। अगर मरीज नहीं आता है तो पुलिस को इसकी जानकारी देंगे।
जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीज अचानक से गायब हो जाता है और 27 फरवरी को उसका शव अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के पीछे बरगद के पेड़ के नीचे मृत मिलता है। उसके हाथ में वीगो लगा होने से यह पता चला था कि वह 15 फरवरी को भर्ती हुआ था। उसके बाद भी अस्पताल प्रशासन ने इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, यही नहीं पता लगाने तक का प्रयास नहीं किया कि वह कब और कैसे वार्ड से निकल गया। लेकिन बुधवार को हुए पोस्टमार्टम में जब मरीज का पेट खाली मिला तो खाने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए। उस पर भी जिम्मेदार से सवाल किया गया तो उनका कहना था कि बहुत सारे अज्ञात मरीज नशे के लती होते हैं, वह उठकर चले जाते हैं, ऐसे में उनका ध्यान कहां तक रखा जाए। लेकिन जब उच्चाधिकारियों तक मामला पहुंचा तो अस्पताल प्रशासन अब हरकत में आया है। बता दें कि वार्ड नंबर दो में मौजूदा समय में एक अज्ञात मरीज का इलाज चल रहा है।
जिला अस्पताल की मैनेजर ममता श्रीवास्तव ने इमरजेंसी वार्ड से लेकर वार्ड नंबर तक तक ड्यूटी में तैनात गार्डों को निर्देश दिए हैं कि वह वार्ड में भर्ती होने वाले मरीज जो अपने मन से चले जाते हैं, गेट पर निकलते समय अपनी डायरी में उनका नाम-पता नोट करेंगे और तीन से चार घंटे तक उनके आने का इंतजार करेंगे। इस दौरान अगर वह नहीं आते तो पुलिस को उस मरीज की सूचना देंगे, फिर पुलिस उसका पता लगाएगी।
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जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीज अचानक से गायब हो जाता है और 27 फरवरी को उसका शव अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के पीछे बरगद के पेड़ के नीचे मृत मिलता है। उसके हाथ में वीगो लगा होने से यह पता चला था कि वह 15 फरवरी को भर्ती हुआ था। उसके बाद भी अस्पताल प्रशासन ने इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, यही नहीं पता लगाने तक का प्रयास नहीं किया कि वह कब और कैसे वार्ड से निकल गया। लेकिन बुधवार को हुए पोस्टमार्टम में जब मरीज का पेट खाली मिला तो खाने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए। उस पर भी जिम्मेदार से सवाल किया गया तो उनका कहना था कि बहुत सारे अज्ञात मरीज नशे के लती होते हैं, वह उठकर चले जाते हैं, ऐसे में उनका ध्यान कहां तक रखा जाए। लेकिन जब उच्चाधिकारियों तक मामला पहुंचा तो अस्पताल प्रशासन अब हरकत में आया है। बता दें कि वार्ड नंबर दो में मौजूदा समय में एक अज्ञात मरीज का इलाज चल रहा है।
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जिला अस्पताल की मैनेजर ममता श्रीवास्तव ने इमरजेंसी वार्ड से लेकर वार्ड नंबर तक तक ड्यूटी में तैनात गार्डों को निर्देश दिए हैं कि वह वार्ड में भर्ती होने वाले मरीज जो अपने मन से चले जाते हैं, गेट पर निकलते समय अपनी डायरी में उनका नाम-पता नोट करेंगे और तीन से चार घंटे तक उनके आने का इंतजार करेंगे। इस दौरान अगर वह नहीं आते तो पुलिस को उस मरीज की सूचना देंगे, फिर पुलिस उसका पता लगाएगी।
