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चौंकाने वाले आंकड़े: बनारस में 365 दिन में 325 की मौत, पैदल चलने वाले 23 लोगों ने गंवाई जान
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 09 Jan 2026 11:06 AM IST
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सार
Varanasi News: वाराणसी में सड़क हादसे और हादसों के शिकार हुए लोगों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। यहां 365 दिन में 325 की मौत हुई। इनमें 23 पैदल चलने वालों ने जान गंवाई। इस दौरान बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में 10 महीने में 900 लोग गंभीर अवस्था में इलाज के लिए पहुंचे।
road accident in kashi
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
काशी की सड़कों पर पैदल चलना अब सुरक्षित नहीं रहा। एक साल के अस्पताल और पुलिस विभाग से मिले आंकड़े चौंकाने वाले हैं। सिर्फ बनारस में एक साल के अंदर सड़क हादसों में 340 लोगों की जान चली गई, पैदल चलने वाले 23 राहगीर भी हैं। आसपास के जिलों के आंकड़ें शामिल करें तो सालाना 3100 लोग सड़क हादसे का शिकार हो रहे हैं। मौत के आंकड़ों में 20 प्रतिशत युवा हैं।
बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में 10 महीने में 900 सड़क हादसे में घायल इलाज कराने पहुंचे। जबकि जिला अस्पताल और मंडलीय अस्पताल समेत निजी अस्पतालों में रोज 7-8 लोग पहुंच रहे हैं। जिले में ब्लैक स्पॉट पहले नौ थे, जो अब बढ़कर 14 हो गए हैं।
इसे भी पढ़ें; वीडीए की योजना: वाराणसी में अवैध निर्माण पर लगाम लगाएगा ड्रोन, हर तीन महीने में अपडेट होंगी तस्वीरें
संकेतक, स्पीड ब्रेकर, लाइटिंग और मार्ग सुधार समय पर पूरा न होने से हादसे हो रहे हैं। आशापुर में साइकिल ट्रैक और पाथवे पर दुकानदारों का कब्जा है। नतीजा यह कि साइकिल सवार मुख्य सड़क पर चलते हैं और हादसों का शिकार होते हैं। वाराणसी में एक दो सड़कों को छोड़ दें तो कहीं भी पैदल यात्रियों के लिए पाथवे नहीं है। एक साल में 23 पैदल चलने वाले जान गंवा चुके हैं।
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बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में 10 महीने में 900 सड़क हादसे में घायल इलाज कराने पहुंचे। जबकि जिला अस्पताल और मंडलीय अस्पताल समेत निजी अस्पतालों में रोज 7-8 लोग पहुंच रहे हैं। जिले में ब्लैक स्पॉट पहले नौ थे, जो अब बढ़कर 14 हो गए हैं।
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संकेतक, स्पीड ब्रेकर, लाइटिंग और मार्ग सुधार समय पर पूरा न होने से हादसे हो रहे हैं। आशापुर में साइकिल ट्रैक और पाथवे पर दुकानदारों का कब्जा है। नतीजा यह कि साइकिल सवार मुख्य सड़क पर चलते हैं और हादसों का शिकार होते हैं। वाराणसी में एक दो सड़कों को छोड़ दें तो कहीं भी पैदल यात्रियों के लिए पाथवे नहीं है। एक साल में 23 पैदल चलने वाले जान गंवा चुके हैं।
चार थाना क्षेत्रों में हादसों का खतरा बरकरार
बड़ागांव, चौबेपुर, मिर्जामुराद और फूलपुर थाना क्षेत्रों में ओवर स्पीडिंग, गलत लेन में वाहन चलाने और अवैध पार्किंग के चलते हादसे बढ़ रहे हैं। शहर में मंडुवाडीह चौराहा हादसों की दृष्टि से संवेदनशील जबकि मिर्जामुराद के मेहंदीगंज इलाके में नेशनल हाईवे किनारे खड़े ट्रक हादसों की वजह हैं। रामनगर के विश्वसुंदरी पुल और पीएसी तिराहा पर गलत लेन में वाहन चलाना और ओवरस्पीडिंग। शिवपुर में भेल गेट के सामने तेज गति से वाहन चलाना और अचानक लेन बदलना।