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मणिकर्णिका घाट विवाद: रानी अहित्याबाई होल्कर की मूर्तियां तोड़े जाने पर सियासत तेज, घाट पर पहुंचे कई दिग्गज
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Fri, 16 Jan 2026 05:36 PM IST
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सार
मणिकर्णिका घाट विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया है। शुक्रवार को कांग्रेसियों ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर काशी की विरासत का विनाश किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं ने डीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन दिया।
मणिकर्णिका घाट पर पहुंचे दिग्गज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर कार्रवाई का वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। इसे लेकर किए जा रहे विरोध ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। इस मुद्दे पर इंदौर से काशी तक विरोध जताई जा रही है। रानी अहिल्याबाई होल्कर से जुड़े धार्मिक स्थलों और कलाकृतियों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के बीच शुक्रवार को मेयर अशोक तिवारी, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल व विधायक नीलकंठ तिवारी मणिकर्णिका घाट पहुंचे।
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विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने दिया ये बयान
विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि कोई मंदिर या मूर्ती क्षतिग्रस्त नहीं है। विपक्ष एआई द्वारा बनाए गए वीडियो को वायरल कर रहा है। मणिकर्णिका का नवनीकरण योजनाबद्ध तरिके से किया जा रहा है। जो मणि ड्रिलिंग के कारण हुए वाइब्रेशन से टूटे हैं, उनमें रखी मूर्तियों को संस्कृति विभाग के पास संरक्षित किया गया है। रानी अहिल्याबाई की मूर्ति को भी संरक्षित किया गया है। उसे भी स्थापित किया जाएगा। घाट के विकास कार्य का पंडा समाज, स्थानीय नागरिक व्यवसायी सभी समर्थन कर रहे हैं। मणिकर्णका घाट के साथ हरिशंचंद्र घाट का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है। कहा कि दोनों घाटों पर नवीनीकरण के बाद शौचालय, चेंजिंग रूम आदि सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध होंगी, जो मौजूदा समय मे नहीं हैं।
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अस्सी घाट पहुंचीं सपा महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष जूही सिंह
सपा महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष जूही सिंह काशी में हो रहे बुलडोजर कार्रवाई को लेकर भड़क गईं। उन्होंने कहा कि रानी अहिल्याबाई का मंदिर, दालमंडी तोड़ा जा रहा है। यह कैसा विकास है। यह उत्तर प्रदेश की संस्कृति है इसे हम लेकर रहेंगे। उन्होंने एसआईआर को लेकर कहा कि इसमें भारतीय नागरिकों के अधिकार का हनन हो रहा है। मायावती द्वारा अकेले विधानसभा चुनाव लड़ने पर जूही सिंह ने कहा कि मायावती का बीजेपी से गठबंधन टूट गया है क्या?
उधर, कांग्रेस पार्टी भी खुलकर मैदान में उतर आई है। शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि वाराणसी में विकास के नाम पर लगातार सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट किया जा रहा है।
कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पहले काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर सैकड़ों मंदिरों को तोड़ा गया, फिर स्वतंत्रता संग्राम की विरासत से जुड़े सर्वसेवा संघ आश्रम को उजाड़ा गया। अब दालमंडी क्षेत्र, जहां लगभग 10 हजार लोगों की आजीविका जुड़ी है, वहां भी तोड़फोड़ की जा रही है। इसके बाद अब मणिकर्णिका घाट पर मां अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित धार्मिक स्थलों, मूर्तियों और कलाकृतियों को क्षति पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं।
कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की सच्चाई जनता के सामने लाई जाए। इसके लिए एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल द्वारा स्थल निरीक्षण की मांग की गई है, जिसमें जिला प्रशासन, स्थानीय नागरिक और कांग्रेस प्रतिनिधि शामिल हों। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो अनशन और फिर आमरण अनशन शुरू करने को बाध्य होंगे।
प्रदेश प्रवक्ता संजीव सिंह ने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि वह पारदर्शिता के साथ पूरे मामले की जांच करें। यदि हमारी धरोहर सुरक्षित नहीं की गई तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी, आंदोलन और तेज किया जाएगा।
मणिकर्णका घाट प्रकरण को लेकर सारनाथ में पाल समाज की ओर से की गई प्रेसवार्ता
मर्णिकर्णिका तीर्थ घाट पर चल रहे पुर्निमाण के कार्य में मूर्तियों का विग्रह तोड़े जाने से पाल समिति के संरक्षक व संस्थापक भैयालाल पाल ने कहा कि घाट पर महारानी अहिल्याबाई की मूर्ति महादेव, गणेश जी की प्रतिमा क्षतिग्रस्त कर दी गई है। उन प्रतिमाओं को प्रशासन द्वारा सुरक्षित रखा गया है। जिलाधिकारी द्वारा कहा गया है कि विग्रह मूर्तियों को पुनःस्थापित किया जाएगा। कुछ ऐसे अधिकारी हैं जो कि शासन व सरकार की छवि धूमिल करने का कार्य कर रहे हैं। उनको चेतावनी दी जाती है कि ऐसा कोई दोबारा कृत्य मूर्तियों को तोड़-फोड़ व नष्ट करते हैं तो पाल समाज के द्वारा माननीय सीएम- पीएम को लिखित रूप से अवगत कराएंगे।
पाल समाज का शासन व प्रशासन से मांग है कि अहिल्याबाई द्वारा स्थापित घाटों का जीर्णोद्धार कराया है, उसमें मुख्य रूप से मर्णिकर्णिका घाट भी शामिल है। जीर्णोद्धार के समय से ही काशी तीर्थ पुरोहितों को गंगापुत्र के नाम से स्थापित किया गया है। यह सनातन धर्म का धरोहर है। पाल समाज की मांग है कि जो विकास कार्य का मॉडल शासन से तैयार किया गया है, उसमें पाल समाज के लिए शवदाह में आए हुए व्यक्ति के लिए अहिल्याबाई के वंशज पाल समाज के लिए व्यवस्थित एक हॉल तैयार किया जाए।
मर्णिकर्णिका तीर्थ घाट पर चल रहे पुर्निमाण के कार्य में मूर्तियों का विग्रह तोड़े जाने से पाल समिति के संरक्षक व संस्थापक भैयालाल पाल ने कहा कि घाट पर महारानी अहिल्याबाई की मूर्ति महादेव, गणेश जी की प्रतिमा क्षतिग्रस्त कर दी गई है। उन प्रतिमाओं को प्रशासन द्वारा सुरक्षित रखा गया है। जिलाधिकारी द्वारा कहा गया है कि विग्रह मूर्तियों को पुनःस्थापित किया जाएगा। कुछ ऐसे अधिकारी हैं जो कि शासन व सरकार की छवि धूमिल करने का कार्य कर रहे हैं। उनको चेतावनी दी जाती है कि ऐसा कोई दोबारा कृत्य मूर्तियों को तोड़-फोड़ व नष्ट करते हैं तो पाल समाज के द्वारा माननीय सीएम- पीएम को लिखित रूप से अवगत कराएंगे।
पाल समाज का शासन व प्रशासन से मांग है कि अहिल्याबाई द्वारा स्थापित घाटों का जीर्णोद्धार कराया है, उसमें मुख्य रूप से मर्णिकर्णिका घाट भी शामिल है। जीर्णोद्धार के समय से ही काशी तीर्थ पुरोहितों को गंगापुत्र के नाम से स्थापित किया गया है। यह सनातन धर्म का धरोहर है। पाल समाज की मांग है कि जो विकास कार्य का मॉडल शासन से तैयार किया गया है, उसमें पाल समाज के लिए शवदाह में आए हुए व्यक्ति के लिए अहिल्याबाई के वंशज पाल समाज के लिए व्यवस्थित एक हॉल तैयार किया जाए।
