Cough Syrup Case: शुभम संग आकाश ने हेल्थकेयर कंपनी खोली, अनबन पर अलग हुआ, कमाई देख फिर जुड़ा
Varanasi News: कफ सिरप कांड में गिरफ्तार आरोपियों ने कई राज खोले। पूछताछ के दौरान सामने आया कि शुभम के साथ आकाश ने पहले हेल्थकेयर कंपनी खोली, लेकिन अनबन पर अलग हो गया। इसके बाद कमाई देखकर फिर जुड़ गया।
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कोडिन कफ सिरप में शुभम जायसवाल से जो भी जुड़ा करोड़पति बन गया। कफ सिरप प्रकरण में गिरफ्तार विकास सिंह नरवे, आकाश पाठक और अंकित श्रीवास्तव ने पुलिस पूछताछ में कई राज खोले। कफ सिरप की कालाबाजारी से मिली रकम को नकदी में लेकर हवाला के जरिये वाराणसी पहुंचाया जाता था, करोड़ों की रकम को सफेद करने के लिए कफ सिरप की खरीदारी दिखाते थे और पैसे को काला से सफेद बनाते थे।
तीनों ने शुभम जायसवाल के साथ मिलकर फर्जी दवा फर्म कंपनियां बनाकर करोड़ों का खेल खेला। तीन साल में 34 करोड़ की काली कमाई विकास नरवे और अंकित श्रीवास्तव ने की। जबकि 2022 में आकाश पाठक शुभम से जुड़ा मेडरिमिडी हेल्थकेयर कंपनी खोली।
इस बीच शुभम जायसवाल से व्यापार को लेकर हुए लेनदेन में अबनब के बाद जीएसटी सरेंडर कर दिया। लेकिन जब देखा कि शुभम के साथ जुड़े प्रशांत उपाध्याय, शिल्पी फार्मा का प्रतीक गुजराती, सिंंडिकेट फार्मा का मनोज यादव, लोकेश फार्मा का धर्मेंद्र अग्रवाल करोड़ों कमाने लगे तो आकाश पाठक फिर से शुभम से जुड़ा और फिर पलटकर नहीं देखा। तीन साल में करोड़ों का काला कारोबार कर डाला।
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सप्तसागर मंडी में विकास सिंह नरवे की पहली मुलाकात शुभम जायसवाल से हुई। यहीं से दोनों आगे बढ़े और दोनों को जोड़ने में मुख्य भूमिका अमित सिंह टाटा और बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह ने निभाई।
शुभम के कहने पर विकास ने बड़ागांव में देवनाथ फार्मेसी खोली। दूसरी तरफ रांची में शैली ट्रेडर्स से माल वाराणसी या प्रयागराज के लिए फर्जी बिल पर सप्लाई के लिए दिखाया गया जबकि माल को तस्करी कर बिहार बंगाल और त्रिपुरा के रास्ते सीधे बांग्लादेश में भेजा जाता रहा।
तस्करी से प्राप्त रकम को हवाला से वाराणसी लाकर यहां कफ सिरप की खरीदारी दिखाकर ब्लैक से व्हाइट किया जाता था। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि शुभम ने नजदीकी लोगों और रिश्तेदारों के नाम पर बने फर्मों में नकदी और आरटीजीएस से धन जमा कराया। वहीं, विकास नरवे ने अपनी फर्म से छह लाख न्यू फैंसिडल कफ सिरप का कारोबार किया, जिसे अवैध रूप से बाजार में खपाया गया।
विकास सिंह नरवे के काले कारोबार को अंकित श्रीवास्तव संभालता था। विकास के कहने पर अंकित ने जौनपुर में पूर्वांचल एसोसिएट नाम की फर्म खुलवाई थी। विकास सिंह, अंकित श्रीवास्तव ने शैली ट्रेडर्स से कारोबार दिखाकर फर्जी बिल और फर्म के नाम पर बड़े पैमाने पर कफ सिरफ की तस्करी की।
महीने में चार बार होती थी शुभम से मीटिंग
महीने में तीन से चार बाद दोनों के बीच वाराणसी के अलावा देश के अन्य स्थानों समेत विदेश में बैठकर मीटिंग होती थी। इस खेल में शामिल अन्य को कमीशन के तौर पर मोटी रकम दी गई।
पुलिस की जांच में सामने आया कि बांग्लादेश सीमा पर तीन तस्कर जो शुभम का काम देखते थे वह माल को बांग्लादेश भिजवाते और रकम नकदी में लेते थे। विकास और अंकित ने दोनों के फर्म से छह छह लाख शीशियों का कागजों पर कारोबार किया। विकास सिंह ने दो बार नेपाल भागने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
आईपीएल बेटिंग में साथियों के साथ लगाई मोटी रकम
करोड़ों की कमाई को आईपीएल सट्टेबाजी में लगाने का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क का अहम किरदार विकास नरवे रहा है, जो पहले भी इसी मामले में जेल जा चुका है। कफ सिरप मामले में बांग्लादेश से नकद में व्यापार होता था। हवाला के तहत पैसा कोलकाता, झारखंड और बिहार के रास्ते बनारस पहुंचता था।
दुबई में बैठे शुभम को कुर्की का नहीं डर
दुबई में रह रहा शुभम फिलहाल भारत लौटने से बच रहा है। जांच कर रही टीम के अनुसार वह जानता है कि पुलिस की गिरफ्त में आते ही पूरे मामले की परतें खुल सकती हैं। शुभम करोड़ों रुपये की रकम को इधर-उधर खपाने में लगा हुआ है। वह विदेश में बैठकर अपने लोगों के साथ ये काम कर रहा है।
