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कुत्तों के बाद बंदरों का आतंक: मासूम बच्ची समेत चार को काटा, कॉलोनीवासी सहमे; रोज 500 पीड़ित पहुंच रहे अस्पताल

Sun, 25 Oct 2026 05:54 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 25 Oct 2026 05:54 AM IST
सार

वाराणसी के कई इलाकाें में कुत्तों के बाद अब बंदरों का आतंक बढ़ रहा है। बंदरों ने चार साल की बच्ची समेत चार लोगों को काटकर घायल कर दिया। अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने पहुंच रहे लोगों में करीब 30 प्रतिशत बंदरों के शिकार बताए जा रहे हैं। बंदरों के बढ़ते हमलों से कॉलोनीवासी सहमे हुए हैं।

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पेड़ पर बंदर और बच्चे के चोट के निशान। - फोटो : संवाद

विस्तार

वाराणसी जिले में आवारा कुत्तों के बाद अब बंदरों का आतंक है। पॉश कॉलोनियों से लेकर मोहल्लों तक, बंदरों के हमलों से नागरिक सहमे हुए हैं। स्वास्थ्य केंद्रों और सरकारी अस्पतालों के आंकड़े, इस समस्या की पुष्टि कर रहे हैं। वर्तमान में एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने आ रहे मरीजों में से 30 फीसदी मामले बंदरों के काटने से घायल हुए हैं। 

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पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल, मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा, लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल और सीएचसी-पीएचसी पर रेबीज से बचाव के लिए रोज 500 पीड़ित एआरवी लगवाने पहुंच रहे हैं।

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चिकित्सकों के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में बंदरों के हमले के मामलों में बढ़ोतरी हुई है, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और छोटे बच्चे शिकार बन रहे हैं। कंदवा वार्ड के गौरव नगर कॉलोनी में एक सप्ताह में बंदरों के झुंड ने चार मासूम बच्चों को निशाना बनाया। शनिवार को घर के बाहर खेल रही चार साल की बच्ची सुकन्या पर एक बंदर ने अचानक हमला कर उसके पैर में घाव कर दिया। 

लोग लाठी-डंडे लेकर दौड़े और बंदर को खदेड़ा। इसी क्षेत्र में साहिल (8), अवनीश (10) और धीरज (12) भी बंदरों के काटने से घायल हो चुके हैं। क्षेत्र के दिनेश चंद ने बताया कि छतों और गलियों में बंदरों का जमावड़ा रहने से रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। नगर निगम व वन विभाग से बंदरों को पकड़ने और जंगलों में छोड़ने की मांग की है।

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ये करें उपाय

  • बंदरों, लावारिस कुत्तों के काटने पर किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें।
  • घाव को तुरंत बहते पानी और साबुन से कम से कम 10 से 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं और बिना समय गंवाए नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर एआरवी जरूर लगवाएं।
  • किसी भी तरह के घरेलू उपचार या झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें और स्वास्थ्यकर्मियों की सलाह के अनुसार वैक्सीन का पूरा कोर्स अनिवार्य रूप से पूरा करें।
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जिले के सभी प्रमुख अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी पर वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी में भी कुत्ता, बिल्ली और बंदर के काटने से घायल लोगों के इलाज की व्यवस्था की गई है। - डॉ. एनपी सिंह, सीएमओ

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