पर्यटन: ताजमहल से आगे निकली काशी, 23 लाख विदेशी आए; एक साल में पहुंचे रिकॉर्ड 14.70 करोड़ पर्यटक
Varanasi News: काशी का विकास विदेशी पर्यटकों को काफी प्रभावित कर रहा है। यही कारण है कि ताज नगरी से ज्यादा काशी नगरी में विदेश से लोग आ रहे हैं। इस कारण वाराणसी में खरीदारी भी जमकर हो रही है।
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Tourism: आगरा के ताजमहल दिल्ली के लालकिला और कुतुब मीनार से अधिक पर्यटक अब बनारस आ रहे हैं। बनारस धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बनकर सामने आ रहा है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक वर्ष में बनारस में 14.70 करोड़ पर्यटक आए, जिनमें 23.25 लाख विदेशी शामिल हैं। वहीं, एएसआई के आंकड़ों के अनुसार दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल को देखने मात्र 69.09 लाख पर्यटक पहुंचे, जिनमें विदेशी सैलानियों की संख्या लगभग 6.45 लाख रही।
इसी तरह 2025 में कुतुब मीनार को देखने लगभग 34.20 लाख पर्यटक आए, जिनमें 2.20 लाख विदेशी सैलानी थे। लालकिला देखने 29.59 लाख भारतीय और 79,000 विदेशी सैलानी पहुंचे। आंकड़े बताते हैं कि भारत आने वाले सैलानियों का रुझान अब ऐतिहासिक इमारतों से हटकर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्रों की ओर तेजी से बढ़ा है। जहां देश के अन्य बड़े स्मारक विदेशी सैलानियों के लिए तरसते दिखे, वहीं बनारस में एक वर्ष के भीतर 23.25 लाख विदेशी पर्यटक आए।
सबसे ज्यादा राजस्व देता है ताजमहल
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल आज भी भारत का सबसे अधिक राजस्व देने वाला स्मारक है, लेकिन पर्यटकों की संख्या के मामले में यह वाराणसी से काफी पीछे छूट गया है। यहां आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या वाराणसी के 23.25 लाख विदेशी पर्यटकों के मुकाबले काफी कम है।
2025 के अंत में क्रिसमस और नए साल के दौरान ताजमहल में भारी भीड़ उमड़ी और 25 दिसंबर को 40,000 से अधिक पर्यटक पहुंचे, लेकिन वार्षिक तुलना में विदेशी पर्यटकों की संख्या में 5.24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
| स्थान | कुल पर्यटक (भारतीय + विदेशी) | विदेशी पर्यटक |
| वाराणसी | 14.70 करोड़ | 23.25 लाख |
| ताजमहल (आगरा) | 69.09 लाख | 6.45 लाख |
| कुतुब मीनार (दिल्ली) | 34.20 लाख | 2.20 लाख |
| लाल किला (दिल्ली) | 30.38 लाख | 79,000 |
राजधानी दिल्ली के पर्यटन मानचित्र पर कुतुब मीनार ने विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के मामले में लाल किले को पीछे छोड़ दिया है। 2025 में कुतुब मीनार को देखने लगभग 2.20 लाख विदेशी पर्यटक आए, जिससे यह दिल्ली में विदेशियों के लिए ‘सबसे बड़ा आकर्षण’ बन गया। वहीं, लाल किले में विदेशी पर्यटकों की संख्या में 5.8 प्रतिशत की गिरावट आई और यह मात्र 79,000 पर सिमट गई।
बीते कुछ वर्षों में काशी का जिस तरह से कायाकल्प हुआ है, उससे देश के साथ ही विदेशों से भी पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। पर्यटन अब ‘हेरिटेज टूरिज्म’ से आगे बढ़कर आध्यात्मिक पर्यटन की दिशा में बढ़ रहा है। - दिनेश सिंह, संयुक्त निदेशक, पर्यटन विभाग