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UP News: अब एसआईटी करेगी मुख्तार गैंग के शस्त्र लाइसेंसों की जांच, तत्कालीन अफसरों की भूमिका भी खंगालेगी

Wed, 29 Jul 2026 09:53 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर। Published by: Pragati Chand Updated Wed, 29 Jul 2026 09:53 AM IST
सार

शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़ा मामले में अब एसआईटी जांच करेगी। एसआईटी इस खेल में शामिल अन्य तत्कालीन व वर्तमान अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच करेगी।

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SIT will investigate arms licenses of Mukhtar gang in Ghazipur
मुख्तार अंसारी (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

विस्तार

माफिया मुख्तार अंसारी के अंतरराज्यीय गैंग (आईएस-191) पर पुलिस और प्रशासन का शिकंजा कसता जा रहा है। अब मुख्तार गैंग के शस्त्र लाइसेंसों की जांच के लिए डीआईजी वाराणसी परिक्षेत्र वैभव कृष्ण ने अपर पुलिस अधीक्षक नगर (गाजीपुर) डॉ. राकेश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में विशेष विवेचना दल (एसआईटी) का गठन किया है। एसआईटी इस खेल में शामिल अन्य तत्कालीन व वर्तमान अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच करेगी।

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गैंग के परिजनों, सदस्यों और सहयोगियों को पूर्व में जारी शस्त्र लाइसेंसों और हथियारों के भौतिक सत्यापन के दौरान भारी अनियमितताएं और गंभीर फर्जीवाड़े का खुलासा होने और मामले में जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से पत्रावलियां गायब कराने और फर्जी पते पर लाइसेंस लेने के आरोप में शहर कोतवाली व मुहम्मदाबाद थाने में कुल पांच प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
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इस कार्रवाई की जद में सपा सांसद अफजाल अंसारी और मुख्तार की पत्नी आफ्शा बेगम समेत तत्कालीन मुहम्मदाबाद कोतवाल व तत्कालीन क्षेत्रीय लेखपाल के अलावा शस्त्र अनुभाग के सात तत्कालीन पटल सहायक भी आ गए हैं।

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तीन चरणों में खुला फर्जीवाड़े का जाल
पुलिस उपमहानिरीक्षक, वाराणसी परिक्षेत्र वैभव कृष्ण की देखरेख में पुलिस ने कुल 43 व्यक्तियों के शस्त्र लाइसेंसों और 80 से अधिक शस्त्रों का भौतिक सत्यापन कराया। यह जांच तीन भागों में पूरी की गई। पहले भाग में मुख्तार अंसारी और उसके 5 परिजनों के शस्त्रों की वर्तमान स्थिति, दूसरे भाग में गैंग (आईएस-191) के 11 सदस्यों और सहयोगियों के शस्त्रों की जांच तथा तीसरे भाग में शस्त्र लिपिकों और अधिकारियों द्वारा बिना तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट की स्वीकृति के 27 व्यक्तियों को फर्जी ढंग से जारी किए गए शस्त्र लाइसेंस की जांच की गई।

पत्रावलियां गायब कर दी गई सहूलियत
जांच में यह तथ्य सामने आया कि लाइसेंसों की मूल पत्रावलियां और हथियारों के क्रय-विक्रय से जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेख जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय, गाजीपुर से ही गायब करा दिए गए थे। यह सब लाइसेंसधारकों और तत्कालीन शस्त्र लिपिकों की मिलीभगत से आपराधिक षड्यंत्र के तहत किया गया, ताकि हथियारों का वास्तविक इस्तेमाल और उनका दुरुपयोग छिपाया जा सके।

इन पर दर्ज हुई हैं प्राथमिकी
  • अफजाल अंसारी (सांसद) – तीन प्राथमिकी में नामजद असफाक अहमद – तत्कालीन शस्त्र लिपिक प्रथम
  • गौरीशंकर राम – तत्कालीन शस्त्र लिपिक द्वितीय अफसा बेगम – मुख्तार अंसारी की पत्नी (फरार) बृजनारायण राम – तत्कालीन पटल सहायक
  • भीष्म सिंह यादव – तत्कालीन पटल सहायक
  • प्रेमशंकर वर्मा – तत्कालीन शस्त्र लिपिक
  • गौरीशंकर लाल – तत्कालीन शस्त्र लिपिक प्रथम
  • सुग्रीव तिवारी – तत्कालीन शस्त्र लिपिक द्वितीय
  • मो. शाहिद – मुख्तार अंसारी का सहयोगी
  • तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक, मुहम्मदाबाद तत्कालीन क्षेत्रीय लेखपाल

पूरे प्रकरण की गहराई से जांच के लिए एक सदस्यीय एसआईटी का गठन किया। प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपियों ने सरकारी तंत्र का ही दुरुपयोग करके अवैध असलहे हासिल किया था। इस प्रकरण में आगे भी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-वैभव कृष्ण, डीआईजी वाराणसी परिक्षेत्र

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