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Almora News: बकरे को तेंदुए के जबड़े से छुड़ाने के लिए भिड़ गया 18 वर्षीय युवक, झटके से छूटी पकड़
Wed, 12 Aug 2026 11:47 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Wed, 12 Aug 2026 11:47 PM IST
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मौलेखाल(अल्मोड़ा)। अमेता गांव का 18 वर्षीय विवेक अपने बकरे की जान बचाने के लिए तेंदुए से भिड़ गया। उसने एक तरफ से बकरे के सींग पकड़ रखे थे जबकि दूसरी तरफ तेंदुआ उसे अपने जबड़े में दबाए हुए था। कुछ देर तक दोनों तरफ से नूरा कुश्ती देखने को मिली। आखिरकार तेंदुए का झटका विवेक के साहस पर भारी पड़ गया। गनीमत रही कि इस दौरान तेंदुए ने विवेक पर हमला नहीं किया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।
ग्रामीण दिनेश चंद्र का पुत्र विवेक मंगलवार को बकरियों को चुगाने जंगल गया था। वह अपने एक बकरे के सींग पकड़कर खेल रहा था, इसी दौरान अचानक एक तेंदुए ने हमला कर दिया। तेंदुए ने जैसे ही बकरे को अपने जबड़े में दबाया, विवेक ने हिम्मत दिखाते हुए बकरे का सींग कसकर पकड़ लिया। कुछ देर तक दोनों के बीच बकरे को लेकर खींचतान होती रही। इसके बाद तेंदुए ने बकरे को जोरदार झटका दिया, जिससे विवेक की पकड़ छूट गई। तेंदुए ने बकरे को नीचे की ओर दूसरे खेत में फेंका और छलांग लगाकर उसे उठाते हुए जंगल की ओर ले गया।
विवेक ने बताया कि उस समय उसके दिमाग में सिर्फ अपने बकरे की जान बचाने की बात थी। उसे इस बात का अंदाजा तक नहीं था कि सामने इतना बड़ा खतरा मौजूद है। मंगलवार को हुई इस घटना की जानकारी मिलने के बाद विवेक के पिता दिनेश काफी डर गए। उन्होंने बताया कि शाम को भैरंगखाल स्थित अपनी दुकान बंद करने के बाद घर जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके। पत्नी और बच्चों को बुलाकर उनके साथ घर गए। शाम को दुकान से घर लौटते समय वह इतने भयभीत थे कि रास्ते में ही पत्नी और बच्चों को बुला लिया और उन्हें साथ लेकर घर पहुंचे। दिनेश चंद्र ने बताया कि पिछले नौ महीनों में तेंदुआ उनकी पांच बकरियों और दो गाय की बछियों को निवाला बना चुका है, लेकिन मुआवजे के नाम पर उनके हाथ खाली हैं।
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विद्यालय की छत पर भी दिख चुका है तेंदुआ, पिंजरा लगाने के बाद निगरानी नहीं
ग्रामीणों के अनुसार अमेता गांव के प्राथमिक विद्यालय की छत पर भी बीते दिनों तेंदुआ देखा गया था। घटना के बाद वन विभाग ने विद्यालय के पास एक पिंजरा लगाया, लेकिन वन विभाग का कोई कर्मचारी मौके पर नजर नहीं आया। इससे विद्यालय आने वाले बच्चों के अभिभावकों में भी भय बना हुआ है। अभिभावक अपनी जिम्मेदारी पर बच्चों को स्कूल छोड़ने और वापस लेने के लिए मजबूर हैं। मांग की कि विद्यालय और आबादी के आसपास तेंदुए की सक्रियता को देखते हुए वन विभाग को लगातार निगरानी और गश्त करनी चाहिए। पिंजरे में शिकार के लिए कोई व्यवस्था नहीं किए जाने से भी तेंदुआ उसके आसपास नहीं फटक रहा है।-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
कोट
घटना की जानकारी मिली है। समय समय पर उस क्षेत्र में गश्त भी की जा रही है। बृहस्पतिवार को वन विभाग के फॉरेस्टर और अन्य कर्मचारी गांव जाएंगे। पिंजरे में शिकार रखने के साथ ही ग्रामीणों को जागरूक भी किया जायेगा।
-आशुतोष जोशी, वन क्षेत्राधिकारी, जौरासी
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ग्रामीण दिनेश चंद्र का पुत्र विवेक मंगलवार को बकरियों को चुगाने जंगल गया था। वह अपने एक बकरे के सींग पकड़कर खेल रहा था, इसी दौरान अचानक एक तेंदुए ने हमला कर दिया। तेंदुए ने जैसे ही बकरे को अपने जबड़े में दबाया, विवेक ने हिम्मत दिखाते हुए बकरे का सींग कसकर पकड़ लिया। कुछ देर तक दोनों के बीच बकरे को लेकर खींचतान होती रही। इसके बाद तेंदुए ने बकरे को जोरदार झटका दिया, जिससे विवेक की पकड़ छूट गई। तेंदुए ने बकरे को नीचे की ओर दूसरे खेत में फेंका और छलांग लगाकर उसे उठाते हुए जंगल की ओर ले गया।
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विवेक ने बताया कि उस समय उसके दिमाग में सिर्फ अपने बकरे की जान बचाने की बात थी। उसे इस बात का अंदाजा तक नहीं था कि सामने इतना बड़ा खतरा मौजूद है। मंगलवार को हुई इस घटना की जानकारी मिलने के बाद विवेक के पिता दिनेश काफी डर गए। उन्होंने बताया कि शाम को भैरंगखाल स्थित अपनी दुकान बंद करने के बाद घर जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके। पत्नी और बच्चों को बुलाकर उनके साथ घर गए। शाम को दुकान से घर लौटते समय वह इतने भयभीत थे कि रास्ते में ही पत्नी और बच्चों को बुला लिया और उन्हें साथ लेकर घर पहुंचे। दिनेश चंद्र ने बताया कि पिछले नौ महीनों में तेंदुआ उनकी पांच बकरियों और दो गाय की बछियों को निवाला बना चुका है, लेकिन मुआवजे के नाम पर उनके हाथ खाली हैं।
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विद्यालय की छत पर भी दिख चुका है तेंदुआ, पिंजरा लगाने के बाद निगरानी नहीं
ग्रामीणों के अनुसार अमेता गांव के प्राथमिक विद्यालय की छत पर भी बीते दिनों तेंदुआ देखा गया था। घटना के बाद वन विभाग ने विद्यालय के पास एक पिंजरा लगाया, लेकिन वन विभाग का कोई कर्मचारी मौके पर नजर नहीं आया। इससे विद्यालय आने वाले बच्चों के अभिभावकों में भी भय बना हुआ है। अभिभावक अपनी जिम्मेदारी पर बच्चों को स्कूल छोड़ने और वापस लेने के लिए मजबूर हैं। मांग की कि विद्यालय और आबादी के आसपास तेंदुए की सक्रियता को देखते हुए वन विभाग को लगातार निगरानी और गश्त करनी चाहिए। पिंजरे में शिकार के लिए कोई व्यवस्था नहीं किए जाने से भी तेंदुआ उसके आसपास नहीं फटक रहा है।
कोट
घटना की जानकारी मिली है। समय समय पर उस क्षेत्र में गश्त भी की जा रही है। बृहस्पतिवार को वन विभाग के फॉरेस्टर और अन्य कर्मचारी गांव जाएंगे। पिंजरे में शिकार रखने के साथ ही ग्रामीणों को जागरूक भी किया जायेगा।
-आशुतोष जोशी, वन क्षेत्राधिकारी, जौरासी