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Bageshwar News: अपनों के लिए गैर हो गया गैरलेख, बुजुर्गों के सहारे ले रहा सांस
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गरुड़ (बागेश्वर)। पहाड़ की ढलान पर बसे गैरलेख गांव की जिंदगी में धीरे-धीरे सन्नाटा भर रहा है। युवा पीढ़ी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए गांव छोड़ रही है। अपनों के लिए गैर हो चला गैरलेख बुजुर्गों के सहारे ही अपनी सांसें बचाए हुए है।
तहसील मुख्यालय से करीब 18 किमी दूर स्थित गैरलेख तक पहुंचने के लिए आज भी डेढ़ किमी पैदल चलना पड़ता है। गांव में कदम रखते ही सन्नाटा साफ महसूस होता है। पुराने नक्काशीदार दरवाजों वाले घर, खाली आंगन और बंजर होते खेत सुनहरे अतीत की ओर इशारा करते हैं। करीब डेढ़ दशक पहले तक यहां का जीवन अलग ही था। घरों के आंगन में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं। खेतों में फसलें लहलहाती थीं और जंगलों में मवेशियों की आवाजाही आम थी।
धीरे-धीरे गांव की तस्वीर बदलती चली गई। बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की तलाश में युवा शहरों की ओर निकलते गए और गांव खाली होता चला गया। अब यहां की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी पलायन कर चुकी है। गांव के कई घरों के दरवाजों पर ताले लटके दिखाई देते हैं। इलाके की उपजाऊ जमीन भी धीरे-धीरे बंजर होती जा रही है।
बूढ़ी आंखों को है अपनों का इंतजार
जिन घरों में कभी कई परिवारों की आवाजाही रहती थी वहां अब या तो सन्नाटा है या फिर एक-दो बुजुर्ग ही रह गए हैं। पथराई बूढ़ी आंखों में अपने लोगों की याद साफ झलकती है। अब तीज-त्योहार या किसी पारिवारिक आयोजन के समय ही गांव में थोड़ी चहल-पहल दिखाई देती है। गांव में बचे बुजुर्गों को ऐसे माैकों का इंतजार रहता है।
डेढ़ दशक में पसर गई वीरानी
गैरलेख गांव की आबादी पिछले 12-15 वर्षों में तेजी से घटी है। पहले यहां 250 से अधिक लोग रहते थे। अब यह संख्या घटकर करीब 100 रह गई है। अधिकांश घरों में ताले लगे हैं या उनमें केवल बुजुर्ग ही रह रहे हैं। उनका कहना है कि अगर गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की बेहतर सुविधाएं होतीं तो शायद युवा यहां से नहीं जाते।
कोट
बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए गांव छोड़कर शहरों की ओर जाना पड़ा। रोजगार की तलाश में युवा भी चले गए। अब गांव में अधिकतर बुजुर्ग ही रह गए हैं। गांव धीरे-धीरे सूना होता जा रहा है। -भगवती देवी (75), ग्रामीण
गांव में न स्वास्थ्य सुविधा है और न ही शिक्षा के पर्याप्त साधन। युवा पीढ़ी बेहतर भविष्य की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर रही है। पलायन रोकने के लिए कोई ठोस पहल भी नजर नहीं आती। -चंद्रकला मिश्रा (70), ग्रामीण
लोगों के जाने से जंगली जानवरों की संख्या बढ़ गई है। घर के आसपास के खेतों में सब्जी उगाना भी मुश्किल हो गया है। गांव में रहकर भी कई चीजें खरीदनी पड़ती हैं। मूलभूत सुविधाओं की कमी ही पलायन की बड़ी वजह है। -सावित्री देवी (73), ग्रामीण
गैरलेख आज भी कई बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। यातायात की समुचित व्यवस्था नहीं है और रोजमर्रा का सामान गांव तक लाना भी कठिन है। बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं न होने से लोग मजबूर होकर गांव छोड़ रहे हैं। अब अधिकतर घर बुजुर्गों के सहारे ही खुले हैं। -कृष्ण सिंह बिष्ट, ग्राम प्रधान, गैरलेख
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धीरे-धीरे गांव की तस्वीर बदलती चली गई। बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की तलाश में युवा शहरों की ओर निकलते गए और गांव खाली होता चला गया। अब यहां की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी पलायन कर चुकी है। गांव के कई घरों के दरवाजों पर ताले लटके दिखाई देते हैं। इलाके की उपजाऊ जमीन भी धीरे-धीरे बंजर होती जा रही है।
बूढ़ी आंखों को है अपनों का इंतजार
जिन घरों में कभी कई परिवारों की आवाजाही रहती थी वहां अब या तो सन्नाटा है या फिर एक-दो बुजुर्ग ही रह गए हैं। पथराई बूढ़ी आंखों में अपने लोगों की याद साफ झलकती है। अब तीज-त्योहार या किसी पारिवारिक आयोजन के समय ही गांव में थोड़ी चहल-पहल दिखाई देती है। गांव में बचे बुजुर्गों को ऐसे माैकों का इंतजार रहता है।
डेढ़ दशक में पसर गई वीरानी
गैरलेख गांव की आबादी पिछले 12-15 वर्षों में तेजी से घटी है। पहले यहां 250 से अधिक लोग रहते थे। अब यह संख्या घटकर करीब 100 रह गई है। अधिकांश घरों में ताले लगे हैं या उनमें केवल बुजुर्ग ही रह रहे हैं। उनका कहना है कि अगर गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की बेहतर सुविधाएं होतीं तो शायद युवा यहां से नहीं जाते।
कोट
बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए गांव छोड़कर शहरों की ओर जाना पड़ा। रोजगार की तलाश में युवा भी चले गए। अब गांव में अधिकतर बुजुर्ग ही रह गए हैं। गांव धीरे-धीरे सूना होता जा रहा है। -भगवती देवी (75), ग्रामीण
गांव में न स्वास्थ्य सुविधा है और न ही शिक्षा के पर्याप्त साधन। युवा पीढ़ी बेहतर भविष्य की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर रही है। पलायन रोकने के लिए कोई ठोस पहल भी नजर नहीं आती। -चंद्रकला मिश्रा (70), ग्रामीण
लोगों के जाने से जंगली जानवरों की संख्या बढ़ गई है। घर के आसपास के खेतों में सब्जी उगाना भी मुश्किल हो गया है। गांव में रहकर भी कई चीजें खरीदनी पड़ती हैं। मूलभूत सुविधाओं की कमी ही पलायन की बड़ी वजह है। -सावित्री देवी (73), ग्रामीण
गैरलेख आज भी कई बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। यातायात की समुचित व्यवस्था नहीं है और रोजमर्रा का सामान गांव तक लाना भी कठिन है। बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं न होने से लोग मजबूर होकर गांव छोड़ रहे हैं। अब अधिकतर घर बुजुर्गों के सहारे ही खुले हैं। -कृष्ण सिंह बिष्ट, ग्राम प्रधान, गैरलेख