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Bageshwar News: महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ी प्रेमा के गांव में पेयजल संकट गहराया
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बागेश्वर। एक तरफ जहां जनपद के सुमटी गांव की बेटी प्रेमा रावत वर्तमान में भारतीय महिला क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए विश्वकप में देश का गौरव बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनका अपना ही गांव बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। पिछले साल आई प्राकृतिक आपदा के जख्म सुमटी गांव में आज तक हरे हैं और ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।
बीते वर्ष 28 जुलाई 2025 को क्षेत्र में भारी प्राकृतिक आपदा आई थी। इस आपदा में गांव की मुख्य पेयजल लाइन पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी। तब विभाग ने तात्कालिक राहत के तौर पर प्लास्टिक के पाइप बिछाकर पानी की आपूर्ति सुचारू की थी लेकिन करीब एक साल बीत जाने के बाद भी इस लाइन को स्थायी नहीं किया जा सका है। वर्तमान में ये प्लास्टिक के पाइप जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं जिससे गांव में पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों को दूर-दराज के प्राकृतिक स्रोतों से पानी ढोना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आगामी मानसून सीजन सिर पर है। ऐसे में पहाड़ी रास्तों और गधेरों में खुले में पड़े ये प्लास्टिक के पाइप तेज बारिश और भूस्खलन की पहली ही बौछार में बह जाएंगे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि देश का नाम रोशन करने वाली खिलाड़ी के गांव की इस दुर्दशा पर प्रशासनिक अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
.........कोट
आपदा के बाद से ही पेयजल व्यवस्था बदहाल है। इस गंभीर समस्या के समाधान और मुख्य पेयजल लाइन की मरम्मत के लिए कई बार संबंधित विभाग और डीएम को लिखित में अवगत कराया है लेकिन अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिली। वर्तमान में कामचलाऊ प्लास्टिक पाइपों से किसी तरह पानी की आपूर्ति हो रही है, लेकिन आगामी बरसात में इस व्यवस्था का टिक पाना बिल्कुल असंभव है। हमारी मांग है कि विभाग तत्काल स्थलीय निरीक्षण कर स्थायी लाइन के लिए धनराशि स्वीकृत करे। -विमला देवी, ग्राम प्रधान, सुमटी
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......कोट
बीते साल पौंसारी आपदा के दौरान क्षेत्र की कई पेयजल लाइनों को नुकसान पहुंचा है। नुकसान का आकलन कर डीपीआर शासन को भेजी गई है, शासन से धनराशि आवंटित होने के बाद लाइन का निर्माण कराया जाएगा। -अब्दुल रशीद, ईई, जल संस्थान बागेश्वर
बीते वर्ष 28 जुलाई 2025 को क्षेत्र में भारी प्राकृतिक आपदा आई थी। इस आपदा में गांव की मुख्य पेयजल लाइन पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी। तब विभाग ने तात्कालिक राहत के तौर पर प्लास्टिक के पाइप बिछाकर पानी की आपूर्ति सुचारू की थी लेकिन करीब एक साल बीत जाने के बाद भी इस लाइन को स्थायी नहीं किया जा सका है। वर्तमान में ये प्लास्टिक के पाइप जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं जिससे गांव में पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों को दूर-दराज के प्राकृतिक स्रोतों से पानी ढोना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आगामी मानसून सीजन सिर पर है। ऐसे में पहाड़ी रास्तों और गधेरों में खुले में पड़े ये प्लास्टिक के पाइप तेज बारिश और भूस्खलन की पहली ही बौछार में बह जाएंगे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि देश का नाम रोशन करने वाली खिलाड़ी के गांव की इस दुर्दशा पर प्रशासनिक अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
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आपदा के बाद से ही पेयजल व्यवस्था बदहाल है। इस गंभीर समस्या के समाधान और मुख्य पेयजल लाइन की मरम्मत के लिए कई बार संबंधित विभाग और डीएम को लिखित में अवगत कराया है लेकिन अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिली। वर्तमान में कामचलाऊ प्लास्टिक पाइपों से किसी तरह पानी की आपूर्ति हो रही है, लेकिन आगामी बरसात में इस व्यवस्था का टिक पाना बिल्कुल असंभव है। हमारी मांग है कि विभाग तत्काल स्थलीय निरीक्षण कर स्थायी लाइन के लिए धनराशि स्वीकृत करे। -विमला देवी, ग्राम प्रधान, सुमटी
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बीते साल पौंसारी आपदा के दौरान क्षेत्र की कई पेयजल लाइनों को नुकसान पहुंचा है। नुकसान का आकलन कर डीपीआर शासन को भेजी गई है, शासन से धनराशि आवंटित होने के बाद लाइन का निर्माण कराया जाएगा। -अब्दुल रशीद, ईई, जल संस्थान बागेश्वर