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Bageshwar News: सड़क नहीं होने से बलिदानियों के गांव तक नहीं पहुंच सके थे पार्थिव शरीर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Wed, 21 Jan 2026 11:25 PM IST
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बागेश्वर। देश को आजाद हुए भले ही 78 साल हो गए हों लेकिन पहाड़ की जिंदगी आज भी पहाड़ जैसी ही पथरीली बनी हुई है। किश्तवाड़ में शहीद हुए हवलदार गजेंद्र सिंह गढि़या के माता-पिता को उनको अंतिम विदाई देने के लिए कपकोट आना पड़ा था। इससे पूर्व भी कई अन्य बलिदानियों के पार्थिव शरीर भी सड़क नहीं होने से गांव तक नहीं पहुंच सके थे।
विगत मंगलवार को शहीद गजेंद्र सिंह की माता को गांव की महिलाओं ने पीठ पर और पिता को लाठी टेककर मोटर मार्ग तक आना पड़ा। यह दर्द केवल गजेंद्र सिंह के परिवार का नहीं है। सात जुलाई 1999 को शहीद हुए मोहन सिंह दानू के गांव दोबाड़ तक सड़क नहीं थी। सरकार ने शहीद के नाम पर सड़क का वादा किया था लेकिन 27 साल बाद भी गांव सड़क को तरस रहा है।
आज भी उनके गांव तक सड़क नहीं बन सकी है। पेठी निवासी 15 कुमाऊं रेजिमेंट के शहीद नायक केदार सिंह देवली ने साल 1999 में हुए ऑपरेशन विजय में अपनी शहादत दी थी। उनका पार्थिव शरीर गांव नहीं लाया जा सका था। पूर्व प्रधान तारा सिंह देवली ने बताया कि सड़क के अभाव में उनका अंतिम संस्कार जिला मुख्यालय में सरयू गोमती के संगम पर हुआ। हालांकि वर्तमान में गांव रिखाड़ी-बाछम सड़क से जुड़ गया है। ऑपरेशन विजय में शहीद नायक मोहन सिंह नगरकोटी के गांव किमोली में भी 1999 में सड़क नहीं बनी थी। ग्रामीण महेश नगरकोटी ने बताया कि उनके पार्थिव शरीर को जिला मुख्यालय तक ही लाया जा सका था। ग्रामीणों और परिजनों ने बागेश्वर जाकर ही उनके अंतिम दर्शन किए थे। अब गांव बागेश्वर-दफौट सड़क से जुड़ गया है। विधायक सुरेश गढि़या ने बताया कि क्षेत्र के प्रत्येक गांव को सड़क से जोड़ने का काम किया जा रहा है। दोबाड़ गांव को भी जल्द वाहन सुविधा मिल जाएगी।
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विगत मंगलवार को शहीद गजेंद्र सिंह की माता को गांव की महिलाओं ने पीठ पर और पिता को लाठी टेककर मोटर मार्ग तक आना पड़ा। यह दर्द केवल गजेंद्र सिंह के परिवार का नहीं है। सात जुलाई 1999 को शहीद हुए मोहन सिंह दानू के गांव दोबाड़ तक सड़क नहीं थी। सरकार ने शहीद के नाम पर सड़क का वादा किया था लेकिन 27 साल बाद भी गांव सड़क को तरस रहा है।
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आज भी उनके गांव तक सड़क नहीं बन सकी है। पेठी निवासी 15 कुमाऊं रेजिमेंट के शहीद नायक केदार सिंह देवली ने साल 1999 में हुए ऑपरेशन विजय में अपनी शहादत दी थी। उनका पार्थिव शरीर गांव नहीं लाया जा सका था। पूर्व प्रधान तारा सिंह देवली ने बताया कि सड़क के अभाव में उनका अंतिम संस्कार जिला मुख्यालय में सरयू गोमती के संगम पर हुआ। हालांकि वर्तमान में गांव रिखाड़ी-बाछम सड़क से जुड़ गया है। ऑपरेशन विजय में शहीद नायक मोहन सिंह नगरकोटी के गांव किमोली में भी 1999 में सड़क नहीं बनी थी। ग्रामीण महेश नगरकोटी ने बताया कि उनके पार्थिव शरीर को जिला मुख्यालय तक ही लाया जा सका था। ग्रामीणों और परिजनों ने बागेश्वर जाकर ही उनके अंतिम दर्शन किए थे। अब गांव बागेश्वर-दफौट सड़क से जुड़ गया है। विधायक सुरेश गढि़या ने बताया कि क्षेत्र के प्रत्येक गांव को सड़क से जोड़ने का काम किया जा रहा है। दोबाड़ गांव को भी जल्द वाहन सुविधा मिल जाएगी।

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