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Bageshwar News: बर्फबारी के बाद खुला मौसम, चांदी से चमक रहे कपकोट के पहाड़
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बागेश्वर/कपकोट। जिले में बारिश और बर्फबारी के बाद मौसम साफ हो गया है। तेज धूप खिलने से कपकोट के ऊंचाई वाले क्षेत्रों की चोटियां और गांव चांदी के समान चमक रहे हैं। निचले इलाकों में गिरी बर्फ पिघलने लगी है। बारिश और बर्फबारी के बाद किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।
शुक्रवार को दोपहर बाद से कपकोट की पिंडर घाटी के गांवों में बर्फबारी शुरू हो गई थी। पूरी रात पिघ्र घाटी के बोरबलड़ा, बदियाकोट, खाती, वाछम, जातोली, सोराग धूर, विनायक, सरयू घाटी के झूनी, खलझूनी, वैछम, कर्मी, बिचला दानपुर के कीमू, गोगिना, रातिरकेटी, शामा, भनार, झोपड़ा आदि क्षेत्राें में आधा फुट से अधिक बर्फ गिरी। इस दौरान जिला मुख्यालय समेत जिले के निचले इलाकों में बारिश का दौर जारी रहा। सुबह चार बजे बाद बारिश-बर्फबारी थमी और मौसम साफ होना शुरू हो गया। दिन के समय लोगों ने धूप का आनंद लिया।
कौसानी, कमेड़ीदेवी और पालड़ीछीना में छह साल बाद हुई बर्फबारी
कौसानी/काफलीगैर/कांडा। वर्ष 2019 के बाद से पर्यटन नगरी कौसानी में हिमपात नहीं हुआ था लेकिन इस साल की पहली बर्फबारी से पर्यटन नगरी लकदक हो गई। बर्फ गिरने से होटल कारोबारी और क्षेत्र के व्यापारी खासे उत्साहित हैं। यहां पहुंचें सैलानियों ने भी बर्फबारी का जमकर लुत्फ उठाया। यही हाल काफलीगैर तहसील के पालीड़ीछीना क्षेत्र का भी है। वहीं पालड़ीछीना और कमेड़ीदेवी क्षेत्र में भी लंबे समय बाद अच्छी बर्फ गिरी है। कांडा के कमेड़ीदेवी, भंतोला, रतघर, जाखनी, दुगनाकुरी तहसील के धरमघर, स्यांकोट, मझेड़ा आदि क्षेत्रों में 13 दिसंबर 2019 को हिमपात हुआ था। बीच के वर्षों में एक-दो बार हल्की बर्फ गिरी लेकिन टिक नहीं सकी। शुक्रवार को हुई बर्फबारी से क्षेत्रवासी बेहद उत्साहित हैं। कौसानी के कारोबारी मनोज अरोड़ा, बलवंत सिंह नेगी, कुशाल रावत आदि ने बताया कि ऐसी ही बर्फबारी हर साल होती रही तो सैलानी पहले की तरह यहां का रुख करेंगे। पालड़ीछीना के किसान हरीश सिंह, दीपेंद्र सिंह आदि ने बताया कि बर्फबारी होने से फल और खेती से अच्छी उपज मिलेगी। गरुड़ के उड़खुली, छत्यानी, मजकोट, ग्वालदम से सटे गांवों में भी अच्छी बर्फबारी होने से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।
बर्फबारी ने थामी वाहनों की रफ्तार, कई सड़कों पर बाधित रहा यातायात
बागेश्वर। जिले में भारी बर्फबारी का असर यातायात पर पड़ा। कई सड़कों पर भारी मात्रा में बर्फ गिरने के कारण यातायात बाधित रहा। पिंडर घाटी के लोगों को सड़कों के बंद रहने से काफी परेशानी उठानी पड़ी। शुक्रवार की रातभर कपकोट के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होती रही। इस दौरान कांडा-कमेड़ीदेवी सड़क पर हुड़मधार के पास बर्फ गिरने से वाहन फंस गए थे। गिरेछीना-बागेश्वर सड़क भी बंद हो गई। दोनों सड़कों पर रात को ही जेसीबी भेजकर यातायात सुचारू कराया गया। शनिवार की सुबह कपकोट के पिंडर घाटी की बदियाकोट-कुंवारी, बदियाकोट-बोरबलड़ा, धूर-वाछम, वाछम-खाती, लीती-गोगिना, बालीघाट-धरमघर और धूर-विनायक सड़क पर यातायात बाधित हो गया था। पूरे दिन बंद सड़कों को खोलने का काम चलता रहा। सड़कों के बंद होने से पिंडर घाटी के गांवों से तहसील मुख्यालय आने-वालों को अधिक परेशानी झेलनी पड़ी।
इनसेट
बस और टैक्सियों का संचालन हुआ बाधित
बागेश्वर। बर्फबारी के दौरान सड़कों के बंद होने से शामा-हल्द्वानी और पांखू-हल्द्वानी केमू बस का संचालन नहीं हो सका। पांखू और शामा क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण दोनों बसें नियत समय पर नहीं आ सकीं। रोडवेज की मुनस्यारी-दिल्ली बस, पिथौरागढ़-दिल्ली-धरमघर, धरमघर-बागेश्वर-दिल्ली भी नहीं पहुंच सकी। बसों का संचालन बाधित होने के कारण लंबी दूरी के यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी। रातिरकेटी, कीमू, बोरबलड़ा, बदियाकोट, खाती, कर्मी आदि क्षेत्रों की टैक्सियों का संचालन नहीं होने से वाहन कारोबारियों को भी नुकसान उठाना पड़ा।
कोट
18 प्रतिशत खेती को हो गया था नुकसान
बागेश्वर। जिले में 47,218 हेक्टेयर में खेती की जाती है। इसमें 10,949 हेक्टेयर सिंचित और 36,269 हेक्टेयर भूमि असिंचित है। मुख्य कृषि अधिकारी राजेंद्र उप्रेती ने बताया कि 100 से अधिक दिन तक बारिश और बर्फबारी नहीं होने से रबी की फसल को 18 से 20 प्रतिशत तक नुकसान हो गया था। करीब 15 प्रतिशत फसल में जमाव ही नहीं हुआ। कुछ जगहों पर गेहूं, जौं, मसूर के पौधों की बढ़वार थम गई थी। फसल पीली भी पड़ने लगी थी। खुले में उगाई जा रही मटर, लाही और अन्य सब्जियों पर भी विपरीत असर पड़ रहा था। बारिश और बर्फबारी के बाद बढ़वार और पौधों के मुरझाने की समस्या का निदान हो गया है।
इनसेट
कीवी, सेब के लिए मुफीद है बर्फबारी
बागेश्वर। इस साल बारिश और बर्फबारी देर से हुई लेकिन जिस मात्रा में हिमपात हुआ है वह फलों के लिए बेहद मुफीद बताया जा रहा है। जिला उद्यान अधिकारी हरीश चंद्र आर्या ने बताया कि कीवी, सेब आदि फसलों को माइनस तापमान की जरूरत पड़ती है। ऊंचाई वाले इलाकों में हुई बर्फबारी का लाभ इन फलों को मिलेगा। इस समय बर्फ नहीं गिरती तो करीब 20 से 25 प्रतिशत तक उपज घट सकती थी।
कोट
जिले में बर्फबारी के बाद मौसम खुल गया है। ऊंचाई वाले इलाकों में भारी हिमपात के कारण बंद हुईं सड़कों को खोलने का काम तेजी से चला। शाम तक सभी सड़कों की बर्फ हटाकर यातायात सुचारू करा दिया गया। - शिखा सुयाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, बागेश्वर
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शुक्रवार को दोपहर बाद से कपकोट की पिंडर घाटी के गांवों में बर्फबारी शुरू हो गई थी। पूरी रात पिघ्र घाटी के बोरबलड़ा, बदियाकोट, खाती, वाछम, जातोली, सोराग धूर, विनायक, सरयू घाटी के झूनी, खलझूनी, वैछम, कर्मी, बिचला दानपुर के कीमू, गोगिना, रातिरकेटी, शामा, भनार, झोपड़ा आदि क्षेत्राें में आधा फुट से अधिक बर्फ गिरी। इस दौरान जिला मुख्यालय समेत जिले के निचले इलाकों में बारिश का दौर जारी रहा। सुबह चार बजे बाद बारिश-बर्फबारी थमी और मौसम साफ होना शुरू हो गया। दिन के समय लोगों ने धूप का आनंद लिया।
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कौसानी, कमेड़ीदेवी और पालड़ीछीना में छह साल बाद हुई बर्फबारी
कौसानी/काफलीगैर/कांडा। वर्ष 2019 के बाद से पर्यटन नगरी कौसानी में हिमपात नहीं हुआ था लेकिन इस साल की पहली बर्फबारी से पर्यटन नगरी लकदक हो गई। बर्फ गिरने से होटल कारोबारी और क्षेत्र के व्यापारी खासे उत्साहित हैं। यहां पहुंचें सैलानियों ने भी बर्फबारी का जमकर लुत्फ उठाया। यही हाल काफलीगैर तहसील के पालीड़ीछीना क्षेत्र का भी है। वहीं पालड़ीछीना और कमेड़ीदेवी क्षेत्र में भी लंबे समय बाद अच्छी बर्फ गिरी है। कांडा के कमेड़ीदेवी, भंतोला, रतघर, जाखनी, दुगनाकुरी तहसील के धरमघर, स्यांकोट, मझेड़ा आदि क्षेत्रों में 13 दिसंबर 2019 को हिमपात हुआ था। बीच के वर्षों में एक-दो बार हल्की बर्फ गिरी लेकिन टिक नहीं सकी। शुक्रवार को हुई बर्फबारी से क्षेत्रवासी बेहद उत्साहित हैं। कौसानी के कारोबारी मनोज अरोड़ा, बलवंत सिंह नेगी, कुशाल रावत आदि ने बताया कि ऐसी ही बर्फबारी हर साल होती रही तो सैलानी पहले की तरह यहां का रुख करेंगे। पालड़ीछीना के किसान हरीश सिंह, दीपेंद्र सिंह आदि ने बताया कि बर्फबारी होने से फल और खेती से अच्छी उपज मिलेगी। गरुड़ के उड़खुली, छत्यानी, मजकोट, ग्वालदम से सटे गांवों में भी अच्छी बर्फबारी होने से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।
बर्फबारी ने थामी वाहनों की रफ्तार, कई सड़कों पर बाधित रहा यातायात
बागेश्वर। जिले में भारी बर्फबारी का असर यातायात पर पड़ा। कई सड़कों पर भारी मात्रा में बर्फ गिरने के कारण यातायात बाधित रहा। पिंडर घाटी के लोगों को सड़कों के बंद रहने से काफी परेशानी उठानी पड़ी। शुक्रवार की रातभर कपकोट के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होती रही। इस दौरान कांडा-कमेड़ीदेवी सड़क पर हुड़मधार के पास बर्फ गिरने से वाहन फंस गए थे। गिरेछीना-बागेश्वर सड़क भी बंद हो गई। दोनों सड़कों पर रात को ही जेसीबी भेजकर यातायात सुचारू कराया गया। शनिवार की सुबह कपकोट के पिंडर घाटी की बदियाकोट-कुंवारी, बदियाकोट-बोरबलड़ा, धूर-वाछम, वाछम-खाती, लीती-गोगिना, बालीघाट-धरमघर और धूर-विनायक सड़क पर यातायात बाधित हो गया था। पूरे दिन बंद सड़कों को खोलने का काम चलता रहा। सड़कों के बंद होने से पिंडर घाटी के गांवों से तहसील मुख्यालय आने-वालों को अधिक परेशानी झेलनी पड़ी।
इनसेट
बस और टैक्सियों का संचालन हुआ बाधित
बागेश्वर। बर्फबारी के दौरान सड़कों के बंद होने से शामा-हल्द्वानी और पांखू-हल्द्वानी केमू बस का संचालन नहीं हो सका। पांखू और शामा क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण दोनों बसें नियत समय पर नहीं आ सकीं। रोडवेज की मुनस्यारी-दिल्ली बस, पिथौरागढ़-दिल्ली-धरमघर, धरमघर-बागेश्वर-दिल्ली भी नहीं पहुंच सकी। बसों का संचालन बाधित होने के कारण लंबी दूरी के यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी। रातिरकेटी, कीमू, बोरबलड़ा, बदियाकोट, खाती, कर्मी आदि क्षेत्रों की टैक्सियों का संचालन नहीं होने से वाहन कारोबारियों को भी नुकसान उठाना पड़ा।
कोट
18 प्रतिशत खेती को हो गया था नुकसान
बागेश्वर। जिले में 47,218 हेक्टेयर में खेती की जाती है। इसमें 10,949 हेक्टेयर सिंचित और 36,269 हेक्टेयर भूमि असिंचित है। मुख्य कृषि अधिकारी राजेंद्र उप्रेती ने बताया कि 100 से अधिक दिन तक बारिश और बर्फबारी नहीं होने से रबी की फसल को 18 से 20 प्रतिशत तक नुकसान हो गया था। करीब 15 प्रतिशत फसल में जमाव ही नहीं हुआ। कुछ जगहों पर गेहूं, जौं, मसूर के पौधों की बढ़वार थम गई थी। फसल पीली भी पड़ने लगी थी। खुले में उगाई जा रही मटर, लाही और अन्य सब्जियों पर भी विपरीत असर पड़ रहा था। बारिश और बर्फबारी के बाद बढ़वार और पौधों के मुरझाने की समस्या का निदान हो गया है।
इनसेट
कीवी, सेब के लिए मुफीद है बर्फबारी
बागेश्वर। इस साल बारिश और बर्फबारी देर से हुई लेकिन जिस मात्रा में हिमपात हुआ है वह फलों के लिए बेहद मुफीद बताया जा रहा है। जिला उद्यान अधिकारी हरीश चंद्र आर्या ने बताया कि कीवी, सेब आदि फसलों को माइनस तापमान की जरूरत पड़ती है। ऊंचाई वाले इलाकों में हुई बर्फबारी का लाभ इन फलों को मिलेगा। इस समय बर्फ नहीं गिरती तो करीब 20 से 25 प्रतिशत तक उपज घट सकती थी।
कोट
जिले में बर्फबारी के बाद मौसम खुल गया है। ऊंचाई वाले इलाकों में भारी हिमपात के कारण बंद हुईं सड़कों को खोलने का काम तेजी से चला। शाम तक सभी सड़कों की बर्फ हटाकर यातायात सुचारू करा दिया गया। - शिखा सुयाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, बागेश्वर

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