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Bageshwar News: बंजर खेतों में सोना उगा रहे कांडा के किसान

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 23 Feb 2026 11:15 PM IST
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Kanda farmers are growing gold in barren fields
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बागेश्वर। पहाड़ की विषम परिस्थितियों और जंगली जानवरों की चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए बागेश्वर के कांडा क्षेत्र के किसान आधुनिक तरीके से खेती कर मिसाल पेश कर रहे हैं। उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में अब यहां के बंजर खेतों में मटर और गोभी की रिकॉर्ड पैदावार हो रही है। प्रगतिशील किसान दीप पांडेय, माया जोशी और रेवाधर अंडोला की मेहनत को उद्यान सचल केंद्र के प्रभारी कमल किशोर पंत का तकनीकी सहयोग मिल रहा है। कीट प्रबंधन और उन्नत बीजों के सही चयन से फसलों की गुणवत्ता में भारी सुधार आया है। किसानों की इस सफलता उनका विशेष योगदान है।

जल्थाकोट के 77 वर्षीय बुजुर्ग किसान रेवाधर अंडोला आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं, जिन्होंने अनुभव और आधुनिक तकनीक के समन्वय से खेती का परिदृश्य बदल दिया है। किसान जंगली जानवरों के खतरे को घेराबंदी और प्रबंधन से कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
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पलायन रोकने की दिशा में बड़ा कदम
बंजर खेतों में लहलहाती मटर और गोभी की फसलें इस बात का प्रमाण हैं कि यदि सही मार्गदर्शन और उचित बाजार उपलब्ध हो, तो पहाड़ की मिट्टी भी ''''सोना'''' उगल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सफल कृषि मॉडल न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारेंगे, बल्कि पहाड़ से हो रहे पलायन पर भी प्रभावी अंकुश लगाएंगे।




.........कोट



खेती केवल मिट्टी का काम नहीं, बल्कि सब्र का इम्तिहान है। आज की नई पीढ़ी अगर सही तकनीक और लगन के साथ बंजर पड़ रही जमीन को संभाले, तो पहाड़ से पलायन का दर्द काफी हद तक कम हो सकता है। उम्र के इस पड़ाव पर भी जब मैं फसल को लहलहाते देखता हूं, तो लगता है कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।

........रेवाधर अंडोला, 77 वर्षीय बुजुर्ग किसान जल्थाकोट

.......कोट



जंगली जानवरों की समस्या हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है, दिन-रात की मेहनत पर पल भर में पानी फिर जाता है लेकिन संतोष इस बात का है कि अब हमें बाजार के लिए भटकना नहीं पड़ रहा। पहले फसल बेचने की चिंता रहती थी, पर अब अच्छा बाजार मिलने से हौसला बढ़ा है। हमें बस सुरक्षा और सरकारी सहयोग की दरकार है।



...........माया प्रसाद जोशी, प्रगतिशील किसान, कोटगांव

.....कोट



पहाड़ की विषम परिस्थितियों के बीच आधुनिक बागवानी एक बेहतर स्वरोजगार है। अगर बाजार की सुलभता और सही मार्गदर्शन मिले तो हमारे किसान किसी भी बड़े शहर की मार्केट को टक्कर दे सकते हैं। बीते पांच साल से सब्जियों का उत्पादन कर आजीविका चला रहा हूं।

.......दीप चंद्र पांडेय, प्रगतिशील किसान, जौलगांव
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