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Bageshwar News: आपदा के जख्म से दर्द दे रहा खूबसूरत वादियों का सफर
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बागेश्वर। ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन चरम पर है। रोमांच के शौकीन जिले की विश्व प्रसिद्ध पिंडारी ग्लेशियर और सुंदरढूंगा घाटी का रुख कर रहे हैं। प्राकृतिक खूबसूरती और जैव विविधता से भरपूर वादियां सैलानियों को खूब आकर्षित कर रही हैं लेकिन सुंदरढूंगा ट्रैक रूट कड़ा इम्तिहान भी ले रहा है। इस रूट पर वर्ष 2013 की आपदा के जख्म अब भी ट्रैकर्स की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।
सुंदरढूंगा घाटी की रोमांचक यात्रा के लिए खाती तक वाहन सुविधा उपलब्ध है। यहां से आगे की दूरी पैदल तय की जाती है। खाती से जातोली तक सात किमी, यहां से कठलिया 14 किमी और कठलिया से करीब छह किमी का ट्रैक रूट है। जातोली से कठलिया के बीच की यात्रा मुश्किलों भरी हो रही है। वर्ष 2013 की आपदा में चार स्थानों पर ट्रैक रूट ध्वस्त हो गया था। अब तक इसकी पूरी मरम्मत नहीं हो सकी है। एक स्थान पर सुंदरढूंगा नदी से पहाड़ चढ़कर जाना पड़ता है। खड़ी चढ़ाई और फिसलन भरा रास्ता होने से कम अनुभवी और शौकिया रूप से जाने वाले ट्रैकरों के लिए जोखिम बढ़ जाता है। बाकी स्थानों पर अपेक्षाकृत परेशानी कम है।
कोट
जातोली से कठलिया के बीच 100 मीटर से अधिक की चढ़ाई पार करना जोखिम भरा है। मूल ट्रैक रूट की बजाय नदी के किनारे से रास्ता बनाया गया है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर नदी पार करने के लिए किनारे पर रस्सी लटकाई गई हैं। इनको पकड़कर नदी किनारे का रास्ता पार करना भी खतरनाक हो सकता है। । - नीरज पांडेय, ट्रैकर, बागेश्वर
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कोट
सुंदरढूंगा मुश्किल ट्रैक है लेकिन साहसिक यात्राओं के शौकीन यहां प्राथमिकता से जाना चाहते हैं। 13 साल पहले आई आपदा ने ट्रैक रूट को काफी नुकसान पहुंचाया था। अधिकांश स्थानों पर मरम्मत हो गई है। एक-दो जगह अब भी यात्रा करना चुनौतीपूर्ण है। - दिनेश सिंह दानू, टूर गाइड, जातोली
कोट
सुंदरढूंगा ट्रैकिंग रूट की मरम्मत का कार्य पूरा हो चुका है। एक स्थान पर पहाड़ी कटान की जरूरत है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। - एके पटेल, ईई लोनिवि, कपकोट
फोटो 27 बीजीएस 02 और 03 पी
सुंदरढूंगा घाटी की रोमांचक यात्रा के लिए खाती तक वाहन सुविधा उपलब्ध है। यहां से आगे की दूरी पैदल तय की जाती है। खाती से जातोली तक सात किमी, यहां से कठलिया 14 किमी और कठलिया से करीब छह किमी का ट्रैक रूट है। जातोली से कठलिया के बीच की यात्रा मुश्किलों भरी हो रही है। वर्ष 2013 की आपदा में चार स्थानों पर ट्रैक रूट ध्वस्त हो गया था। अब तक इसकी पूरी मरम्मत नहीं हो सकी है। एक स्थान पर सुंदरढूंगा नदी से पहाड़ चढ़कर जाना पड़ता है। खड़ी चढ़ाई और फिसलन भरा रास्ता होने से कम अनुभवी और शौकिया रूप से जाने वाले ट्रैकरों के लिए जोखिम बढ़ जाता है। बाकी स्थानों पर अपेक्षाकृत परेशानी कम है।
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जातोली से कठलिया के बीच 100 मीटर से अधिक की चढ़ाई पार करना जोखिम भरा है। मूल ट्रैक रूट की बजाय नदी के किनारे से रास्ता बनाया गया है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर नदी पार करने के लिए किनारे पर रस्सी लटकाई गई हैं। इनको पकड़कर नदी किनारे का रास्ता पार करना भी खतरनाक हो सकता है। । - नीरज पांडेय, ट्रैकर, बागेश्वर
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सुंदरढूंगा मुश्किल ट्रैक है लेकिन साहसिक यात्राओं के शौकीन यहां प्राथमिकता से जाना चाहते हैं। 13 साल पहले आई आपदा ने ट्रैक रूट को काफी नुकसान पहुंचाया था। अधिकांश स्थानों पर मरम्मत हो गई है। एक-दो जगह अब भी यात्रा करना चुनौतीपूर्ण है। - दिनेश सिंह दानू, टूर गाइड, जातोली
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सुंदरढूंगा ट्रैकिंग रूट की मरम्मत का कार्य पूरा हो चुका है। एक स्थान पर पहाड़ी कटान की जरूरत है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। - एके पटेल, ईई लोनिवि, कपकोट
फोटो 27 बीजीएस 02 और 03 पी