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बागेश्वर बना साइबर ठगों का सॉफ्ट टारगेट: 2.76 करोड़ की साइबर ठगी; 49 दिनों में 60 मामले सामने आए

कमल कांडपाल Published by: गायत्री जोशी Updated Tue, 10 Mar 2026 12:29 PM IST
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सार

डिजिटल इंडिया के दौर में जिला साइबर ठगों के लिए सॉफ्ट टारगेट बन गया है।  साल 2025 में दो करोड़ 76 लाख 99 हजार 510 रुपये की साइबर ठगी हो चुकी है।

the rise in digital transactions, cases of cyber fraud have risen sharply in Bageshwar
Cyber Fraud - फोटो : FREEPIK
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विस्तार

डिजिटल दौर में बागेश्वर साइबर ठगों के लिए सॉफ्ट टारगेट बन गया है। डिजिटल इंडिया के दौर में जिला साइबर ठगों के लिए सॉफ्ट टारगेट बन गया है। जिले में साल 2025 में दो करोड़ 76 लाख 99 हजार 510 रुपये की साइबर ठगी हो चुकी है। हालांकि पुलिस ने अपनी कार्रवाई में एक करोड़ 34 लाख 14 हजार 424 रुपये को बैंक खातों में होल्ड कराने में सफलता पाई है लेकिन 41 लाख 32 हजार 944 रुपये ही अब तक प्रभावितों के खातों में वापस हो सके हैं।

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बीते दिनों मंडल आयुक्त की समीक्षा बैठक में पेश किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार ठगी गई कुल राशि के सापेक्ष लगभग एक करोड़ 42 लाख रुपये तो ठगों ने पुलिस के हरकत में आने से पहले ही निकाल लिए। इसके अलावा 1.34 करोड़ रुपये पुलिस ने होल्ड कराए उनमें से भी केवल 41 लाख रुपये ही अब तक पीड़ितों तक पहुंच पाए हैं।

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ठगी की कुल रकम का एक बड़ा हिस्सा अब भी कानूनी पेचीदगियों में उलझा हुआ है जिससे पीड़ितों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन ने 469 में से 450 शिकायतों के निस्तारण का दावा किया है। साइबर जानकारों का कहना है कि होल्ड कराई गई राशि को रिफंड कराने की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि महीनों तक कोर्ट और बैंकों के चक्कर काटने के बाद ही पीड़ित को रकम मिल पाती है।

साल 2026 की शुरुआत में ही साइबर ठग सक्रिय
आंकड़ों के अनुसार एक जनवरी 2026 से 18 फरवरी 2026 तक महज 49 दिनों में जिले में साइबर ठगी के 60 नए मामले सामने आए हैं। इस छोटी सी अवधि में साइबर अपराधियों ने जिले की जनता को 12,55,903.74 रुपये की चपत लगा दी है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 2,02,304.15 रुपये को होल्ड कराया। पीड़ितों को रिफंड के तौर पर अब तक मात्र 11,599 रुपये ही वापस मिल पाए हैं। कुल दर्ज 60 शिकायतों में से 24 का निस्तारण हुआ है जबकि 35 मामले अभी भी प्रक्रियाधीन हैं।

ठगों के डिजिटल जाल से ऐसे बचें
साइबर सेल प्रभारी निर्मला पटवाल ने बताया कि ठगी होने के शुरुआती एक-दो घंटे गोल्डन आवर कहलाते हैं। इस दौरान तुरंत 1930 पर कॉल करने से पैसा होल्ड होने की संभावना बढ़ जाती है। व्हाट्सएप और एसएमएस पर आए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें यह आपके फोन का एक्सेस ठगों को दे सकता है। बैंक कभी भी फोन पर आपसे ओटीपी, पिन और व्यक्तिगत जानकारी नहीं मांगता है। पुलिस और सीबीआई कभी भी वीडियो कॉल पर किसी को अरेस्ट नहीं करती। ऐसा कॉल आने पर तुरंत फोन काटें और स्थानीय पुलिस को सूचना दें।

जिले में साइबर ठगी के मामलों में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साल 2025 में तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द लोगों का पैसा उनके खातों में रिफंड कराया जाए। पुलिस की ओर से साइबर क्राइम को कम करने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं। लोगों से अपील है कि साइबर क्राइम से बचाव करें और ठगी की सूचना जल्द से जल्द पुलिस को दें। -जितेंद्र मेहरा, एसपी बागेश्वर

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