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एकजुटता के साथ होंगे प्रयास को बचे रहेंगे जंगल: दुबे
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Sat, 28 Mar 2026 07:59 PM IST
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फोटो-
कर्णप्रयाग में आयोजित हुई जिला वन पंचायत परामर्श दात्री संगठन की गोष्ठी
वनाग्नि को लेकर हुई चर्चा, महिलाओं ने जागरूकता कार्यक्रमों की प्रस्तुति
संवाद न्यूज एजेंसी
कर्णप्रयाग। वन पंचायत परामर्श दात्री संगठन की बैठक में जंगलों को आग बचाने पर चर्चा की गई। इस दौरान महिला मंगल दलों ने वनों को बचाने के लिए जागरूकता कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में बदरीनाथ के डीएफओ सर्वेश कुमार दुबे ने कहा कि आपसी सहयोग से ही जंगलों को बचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि गांवों में कई बार खेती बाड़ी के काम में लापरवाही होने से जलते आड़ों से आग जंगलों तक पहुंच जाती है। वहीं शरारती तत्व भी जंगलों में आग लगाते हैं। ऐसे में यदि ग्रामीण, महिला मंगल और युवक मंगल दल, ग्राम प्रहरी, सहित वन विभाग आपसी सहयोग से काम करें तो जंगल आग से बच सकते हैं। संगठन के जिलाध्यक्ष कैलाश खंडूड़ी ने कहा कि वन पंचायतों को मजबूत किया जाना चाहिए साथ ही वनाग्नि के लिए सरपंचों को प्रशिक्षण और संसाधन मुहैया किए जाने चाहिए। आग बुझाते वक्त घायल होने पर मुआवजे का प्रावधान होना चाहिए। कार्यक्रम में सोनला, बेडाणू आदि गांवों की महिलाओं ने ना काटा तों डाल्यूं....सहित कई पर्यावरण संरक्षण के गीत और नृत्य की प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर नंदादेवी के डीएफओ अभिमन्यु सिंह, नंदप्रयाग के रेंजर हेमंत बिष्ट, नागनाथ पोखरी के बीएल शाह, धनपुर के एनके नेगी, लोहवा के प्रदीप गौड़, थराली के मनोज देवराड़ी, नारायणबगड़ के अभिषेक भट्ट, आटागाड़ के आरएके निराला आदि शामिल थे।
इधर होती रही गोष्ठी, उधर जलते रहे जंगल
कर्णप्रयाग। शनिवार को मुख्य बाजार में वनाग्नि को लेकर जागरूकता गोष्ठी चल रही थी। वहीं अपर बाजार के अस्पताल परिसर के ऊपरी जंगल में आग लग गई। सूचना पर वन कर्मी मौके पर पहुंचे और आग बुझा दी गई। दूसरी ओर सेम ग्वाड़ के ऊपरी जंगल भी जंगल की आग में जल रहे हैं।
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वनाग्नि को लेकर हुई चर्चा, महिलाओं ने जागरूकता कार्यक्रमों की प्रस्तुति
संवाद न्यूज एजेंसी
कर्णप्रयाग। वन पंचायत परामर्श दात्री संगठन की बैठक में जंगलों को आग बचाने पर चर्चा की गई। इस दौरान महिला मंगल दलों ने वनों को बचाने के लिए जागरूकता कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में बदरीनाथ के डीएफओ सर्वेश कुमार दुबे ने कहा कि आपसी सहयोग से ही जंगलों को बचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि गांवों में कई बार खेती बाड़ी के काम में लापरवाही होने से जलते आड़ों से आग जंगलों तक पहुंच जाती है। वहीं शरारती तत्व भी जंगलों में आग लगाते हैं। ऐसे में यदि ग्रामीण, महिला मंगल और युवक मंगल दल, ग्राम प्रहरी, सहित वन विभाग आपसी सहयोग से काम करें तो जंगल आग से बच सकते हैं। संगठन के जिलाध्यक्ष कैलाश खंडूड़ी ने कहा कि वन पंचायतों को मजबूत किया जाना चाहिए साथ ही वनाग्नि के लिए सरपंचों को प्रशिक्षण और संसाधन मुहैया किए जाने चाहिए। आग बुझाते वक्त घायल होने पर मुआवजे का प्रावधान होना चाहिए। कार्यक्रम में सोनला, बेडाणू आदि गांवों की महिलाओं ने ना काटा तों डाल्यूं....सहित कई पर्यावरण संरक्षण के गीत और नृत्य की प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर नंदादेवी के डीएफओ अभिमन्यु सिंह, नंदप्रयाग के रेंजर हेमंत बिष्ट, नागनाथ पोखरी के बीएल शाह, धनपुर के एनके नेगी, लोहवा के प्रदीप गौड़, थराली के मनोज देवराड़ी, नारायणबगड़ के अभिषेक भट्ट, आटागाड़ के आरएके निराला आदि शामिल थे।
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इधर होती रही गोष्ठी, उधर जलते रहे जंगल
कर्णप्रयाग। शनिवार को मुख्य बाजार में वनाग्नि को लेकर जागरूकता गोष्ठी चल रही थी। वहीं अपर बाजार के अस्पताल परिसर के ऊपरी जंगल में आग लग गई। सूचना पर वन कर्मी मौके पर पहुंचे और आग बुझा दी गई। दूसरी ओर सेम ग्वाड़ के ऊपरी जंगल भी जंगल की आग में जल रहे हैं।