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गैरसैंण : सारकोट में तीन मकान क्षतिग्रस्त, 25 खतरे में
Wed, 05 Aug 2026 07:00 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Wed, 05 Aug 2026 07:00 PM IST
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छजगाड़ और कनख्वाली गांवों में लगातार हो रही बारिश से हुई दिक्कत
नवनिर्मित सड़क का मलबा बारिश के साथ आ रहा घरों के पास
संवाद न्यूज एजेंसी
गैरसैंण। मुख्यमंत्री आदर्श गांव सारकोट के छजगाड़ और कनख्वाली गांवों में लगातार बारिश से तीन ग्रामीणों के आवासीय मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके अलावा, सारकोट में चार गोशालाएं और 25 मकान भी खतरे की जद में आ गए हैं। कृषि भूमि में भी धंसाव जारी है जिससे ग्रामीणों में दहशत हैं।
बीते तीन दिनों से भारी बारिश हो रही है। बारिश से छजगाड़ गांव में आनंद लाल का मकान क्षतिग्रस्त हो गया है। उनके परिवार के सात सदस्यों ने पड़ोसी के घर शरण ली है। वहीं कनख्वाली गांव में अनिल कुमार और रमेश लाल के मकान भी क्षतिग्रस्त हुए। प्रधान प्रियंका नेगी ने बताया कि मेहरबान सिंह, दरमान सिंह, कुंवर सिंह और गोविंद सिंह की चार गोशालाएं भी टूट गई हैं। बताया जा रहा है कि नवनिर्मित सड़कों का मलबा बारिश के साथ घरों तक आ रहा है। प्रधान प्रियंका नेगी और क्षेत्र पंचायत सदस्य आरती देवी ने उप जिलाधिकारी अबरार अहमद को ज्ञापन सौंपकर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने की मांग की। साथ ही शीघ्र राहत दिलाने की भी अपील की। उप जिलाधिकारी अबरार अहमद ने पटवारी को निरीक्षण के निर्देश दिए। कहा कि तय मानकों के आधार पर दैवी आपदा राहत मुहैया कराई जाएगी।
सिलोड़ी गांव में सात मकान और गोशालाओं को खतरा
नारायणबगड़। बीते सोमवार को हुई भारी बारिश से सिलोड़ी गांव में पहाड़ी से मलबा बहकर आया है। इससे गांव के कई मकानों और गौशालाओं को खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों के खेत-खलिहानों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। मंगलवार को विधायक भूपालराम टम्टा ने गांव का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने राजस्व विभाग को क्षति का आकलन करने के निर्देश दिए। गांव के सात से अधिक परिवारों के मकान खतरे की जद में आ गए हैं। बल्लभ प्रसाद सिलोड़ी ने बताया कि सोमवार देर शाम से शुरू हुई बारिश पूरी रातभर होती रही। रात्रि में मलबा घरों और गौशालाओं में घुसने से गांव में अफरातफरी मच गई। चंडी प्रसाद सिलोड़ी के अनुसार, जंगल से आए मलबे से खेतों और बाग-बगीचों को भी काफी नुकसान हुआ है। संवाद
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लाइन क्षतिग्रस्त होने से पानी का संकट भी गहराया
थराली में भूस्खलन क्षेत्र से कीचड़ से होते हुए जा रहे ग्रामीण
कर्णप्रयाग/थराली। भारी बारिश के कारण जिले में दो प्रमुख मार्ग बंद हो गए। कर्णप्रयाग-नैनीसैंण मार्ग 54 घंटे से अधिक समय से बंद है जबकि डिम्मर-सुमल्टा-कोलाडुंग्री मार्ग पिछले 15 दिनों से बंद है। कर्णप्रयाग-नैनीसैण मार्ग पर मलबा हटाकर चट्टान काटकर रास्ता बनाया जा रहा है। वहीं लोनिवि के सहायक अभियंता राजेश कुमार ने जल्द मार्ग खुलने की उम्मीद जताई है। वहीं डिम्मर-सुमल्टा-कोलाडुंग्री मार्ग पर सुरक्षा दीवार बह जाने और मलबा आने से छह से अधिक गांवों के ग्रामीण प्रभावित हैं। ग्रामीण छह किलोमीटर पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। लाइन क्षतिग्रस्त होने से पानी का संकट भी गहराया है। वहीं अधिशासी अभियंता सुनील कुमार ने मार्ग को जल्द खोले जाने के निर्देश दिए हैं। वहीं थराली में हो रही बारिश से थराली डिवीजन की 15 से अधिक सड़कें बंद हैं। सबसे अधिक समस्या सोल क्षेत्र में हो रही है। सोल क्षेत्र के 16 गांवों को जोड़ने वाली एकमात्र सड़क थराली-डूंगरी मार्ग एक सप्ताह से बंद है। इस कारण ग्रामीणों को 12 से 15 किलोमीटर पैदल चलकर थराली पहुंचना पड़ रहा है। ग्रामीण भूस्खलन क्षेत्र से कीचड़ से होते हुए किसी तरह अस्पताल, बैंक, ब्लॉक मुख्यालय और तहसील पहुंच रहे हैं। पीएमजीएसवाई के सहायक अभियंता धीरेंद्र भंडारी ने बताया कि सड़क खोलने के जेसीबी भेजी है। संवाद
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छजगाड़ और कनख्वाली गांवों में लगातार हो रही बारिश से हुई दिक्कत
नवनिर्मित सड़क का मलबा बारिश के साथ आ रहा घरों के पास
संवाद न्यूज एजेंसी
गैरसैंण। मुख्यमंत्री आदर्श गांव सारकोट के छजगाड़ और कनख्वाली गांवों में लगातार बारिश से तीन ग्रामीणों के आवासीय मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके अलावा, सारकोट में चार गोशालाएं और 25 मकान भी खतरे की जद में आ गए हैं। कृषि भूमि में भी धंसाव जारी है जिससे ग्रामीणों में दहशत हैं।
बीते तीन दिनों से भारी बारिश हो रही है। बारिश से छजगाड़ गांव में आनंद लाल का मकान क्षतिग्रस्त हो गया है। उनके परिवार के सात सदस्यों ने पड़ोसी के घर शरण ली है। वहीं कनख्वाली गांव में अनिल कुमार और रमेश लाल के मकान भी क्षतिग्रस्त हुए। प्रधान प्रियंका नेगी ने बताया कि मेहरबान सिंह, दरमान सिंह, कुंवर सिंह और गोविंद सिंह की चार गोशालाएं भी टूट गई हैं। बताया जा रहा है कि नवनिर्मित सड़कों का मलबा बारिश के साथ घरों तक आ रहा है। प्रधान प्रियंका नेगी और क्षेत्र पंचायत सदस्य आरती देवी ने उप जिलाधिकारी अबरार अहमद को ज्ञापन सौंपकर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने की मांग की। साथ ही शीघ्र राहत दिलाने की भी अपील की। उप जिलाधिकारी अबरार अहमद ने पटवारी को निरीक्षण के निर्देश दिए। कहा कि तय मानकों के आधार पर दैवी आपदा राहत मुहैया कराई जाएगी।
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सिलोड़ी गांव में सात मकान और गोशालाओं को खतरा
नारायणबगड़। बीते सोमवार को हुई भारी बारिश से सिलोड़ी गांव में पहाड़ी से मलबा बहकर आया है। इससे गांव के कई मकानों और गौशालाओं को खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों के खेत-खलिहानों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। मंगलवार को विधायक भूपालराम टम्टा ने गांव का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने राजस्व विभाग को क्षति का आकलन करने के निर्देश दिए। गांव के सात से अधिक परिवारों के मकान खतरे की जद में आ गए हैं। बल्लभ प्रसाद सिलोड़ी ने बताया कि सोमवार देर शाम से शुरू हुई बारिश पूरी रातभर होती रही। रात्रि में मलबा घरों और गौशालाओं में घुसने से गांव में अफरातफरी मच गई। चंडी प्रसाद सिलोड़ी के अनुसार, जंगल से आए मलबे से खेतों और बाग-बगीचों को भी काफी नुकसान हुआ है। संवाद
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लाइन क्षतिग्रस्त होने से पानी का संकट भी गहराया
थराली में भूस्खलन क्षेत्र से कीचड़ से होते हुए जा रहे ग्रामीण
कर्णप्रयाग/थराली। भारी बारिश के कारण जिले में दो प्रमुख मार्ग बंद हो गए। कर्णप्रयाग-नैनीसैंण मार्ग 54 घंटे से अधिक समय से बंद है जबकि डिम्मर-सुमल्टा-कोलाडुंग्री मार्ग पिछले 15 दिनों से बंद है। कर्णप्रयाग-नैनीसैण मार्ग पर मलबा हटाकर चट्टान काटकर रास्ता बनाया जा रहा है। वहीं लोनिवि के सहायक अभियंता राजेश कुमार ने जल्द मार्ग खुलने की उम्मीद जताई है। वहीं डिम्मर-सुमल्टा-कोलाडुंग्री मार्ग पर सुरक्षा दीवार बह जाने और मलबा आने से छह से अधिक गांवों के ग्रामीण प्रभावित हैं। ग्रामीण छह किलोमीटर पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। लाइन क्षतिग्रस्त होने से पानी का संकट भी गहराया है। वहीं अधिशासी अभियंता सुनील कुमार ने मार्ग को जल्द खोले जाने के निर्देश दिए हैं। वहीं थराली में हो रही बारिश से थराली डिवीजन की 15 से अधिक सड़कें बंद हैं। सबसे अधिक समस्या सोल क्षेत्र में हो रही है। सोल क्षेत्र के 16 गांवों को जोड़ने वाली एकमात्र सड़क थराली-डूंगरी मार्ग एक सप्ताह से बंद है। इस कारण ग्रामीणों को 12 से 15 किलोमीटर पैदल चलकर थराली पहुंचना पड़ रहा है। ग्रामीण भूस्खलन क्षेत्र से कीचड़ से होते हुए किसी तरह अस्पताल, बैंक, ब्लॉक मुख्यालय और तहसील पहुंच रहे हैं। पीएमजीएसवाई के सहायक अभियंता धीरेंद्र भंडारी ने बताया कि सड़क खोलने के जेसीबी भेजी है। संवाद