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Chamoli News: 5 सितंबर से शुरू होगी नंदा देवी लोकजात, दिनपट्टा जारी
Wed, 05 Aug 2026 07:27 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Wed, 05 Aug 2026 07:27 PM IST
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थराली के देवराड़ा मंदिर से 14 सयानो और मंदिर के अध्यक्ष ने जारी किया कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
थराली। नंदा देवी राजराजेश्वरी सिद्धपीठ देवराड़ा में लोकजात 2026 का दिनपट्टा (कार्यक्रम) जारी किया गया। यह यात्रा आगामी 5 सितंबर से 25 सितंबर तक चलेगी।
नंदा देवी राजराजेश्वरी समिति के अध्यक्ष सुशील रावत, सचिव पृथ्वी सिंह रावत, 14 सयानों और देवराड़ा सिद्धपीठ मंदिर के अध्यक्ष भुवन चंद्र हटवाल ने दिनपट्टा जारी किया। थराली के देवराड़ा मंदिर में हुई बैठक में लोकजात और आगामी राजजात के पड़ावों की समस्याओं पर विचार किया गया। कार्यक्रम के तहत 5 सितंबर को सिद्धपीठ कुरूड़ से नंदा की डोली रवाना होगी। 18 सितंबर को वेदनी में पूजा-अर्चना के बाद 25 सितंबर को मां नंदा राजराजेश्वरी की डोली सिद्धपीठ देवराड़ा में विराजमान होगी। सुशील रावत ने बताया कि लोकजात वार्षिक होती है जबकि राजजात राजा के अनुसार होगी। उन्होंने पड़ावों पर सुविधाएं जुटाने की मांग की। पृथ्वी सिंह रावत ने कहा कि गौड़ ब्राह्मण और 14 सयाने यात्रा की तैयारियां करेंगे। भुवन चंद्र हटवाल ने बताया कि कई बैठकों के बाद यह निर्णय लिया गया ताकि यात्रियों को दुर्गम पड़ावों पर समस्या न हो। अगले वर्ष 2027 में राजजात यात्रा होगी। इस अवसर पर महावीर सिंह, कलम सिंह बिष्ट, मनमोहन नेगी, प्रेम बुटोला, रणजीत सिंह, भुवन विक्रम सिंह और दर्शन सिंह रावत आदि मौजूद थे।
ये है कार्यक्रम
5 सितंबर को कुरूड़ से चरबंग, 6 को मथकोट, 7 को उस्तोली, 8 को भेंटी, 9 को डुंग्री, 10 को सूना, 11 को चेपड़ों, 12 को धरातल्ला, 13 को इच्छोली, 14 को फल्दियागांव, 15 को मुंदोली, 16 को वाण, 17 को गैरोलीपातल, 18 को वेदनी में पूजा अर्चना के बाद बांक, 19 को ल्वाणी, 20 को उलंग्रा, 21 को बेराधार, 22 को गोठिंडा, 23 को कुराड़, 24 को ढुंगाखोली, 25 को भेंटा होते हुए यात्रा देवराड़ा मंदिर जाएगी।
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पहली बार लोकजात का दिनपट्टा देवराड़ा मंदिर से हुआ जारी
श्रीनंदा की बड़ी जात, राजजात के विवाद के बीच प्रभावित हुईं परंपराएं
छह माह कुरूड़ और छह माह देवराड़ा में प्रवास करती है मां नंदा
संवाद न्यूज एजेंसी
कर्णप्रयाग। वर्ष 2026 में मां नंदा की बड़ीजात और वर्ष 2027 में मां नंदा की राजजात के आयोजन को लेकर विवाद के बीच लोकजात का दिनपट्टा जारी हो गया है। मगर इस बार यह दिनपट्टा नंदानगर के कुरूड़ मंदिर से नहीं बल्कि थराली के और मां नंदा के ननिहाल सिद्धपीठ देवराड़ा मंदिर से जारी हुआ है।
मां नंदा की लोकजात हर वर्ष अगस्त-सितंबर माह में होती है। सिद्धपीठ कुरूड़ से शुरू होने वाली लोकजात सप्तमी में वेदनी कुंड पहुंचती है। जहां पूजा अर्चना के बाद नंदा की डोली और यात्रा वापसी करते हुए देवराड़ा पहुंचती है। इस दौरान यात्रा करीब 21 पड़ाव को पार करती है। देवराड़ा मंदिर मां नंदा का ननिहाल है। जहां छह माह तक मां नंदा प्रवास करती हैं और छह माह कुरूड़ के प्रस्थान करती हैं। लोकजात का दिनपट्टा कुरूड़ मंदिर से जारी होता है लेकिन इस बार यह देवराड़ा मंदिर से जारी हुआ है। श्रीनंदा राजजात की समन्वय समिति के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील रावत ने बताया कि यह कार्यक्रम पहले ही कुरूड़ मंदिर से जारी हो गया था। इसमें सिर्फ वेदनी से देवराड़ा तक के कार्यक्रमों को जोड़ा गया है। कुरूड़ के पुजारियों से दूरभाष पर वार्ता के बाद ही 14 सयाने, मालगुजार, थोकदार एवं देवी के हक हकूकधारियों के प्रतिनिधियों के मौजूदगी में बुधवार को देवराड़ा मंदिर से संशोधित दिनपट्टा (कार्यक्रम) जारी किया गया। वहीं कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष नरेश गौड़ से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि उनको इस कार्यक्रम की कोई जानकारी नहीं है।
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थराली के देवराड़ा मंदिर से 14 सयानो और मंदिर के अध्यक्ष ने जारी किया कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
थराली। नंदा देवी राजराजेश्वरी सिद्धपीठ देवराड़ा में लोकजात 2026 का दिनपट्टा (कार्यक्रम) जारी किया गया। यह यात्रा आगामी 5 सितंबर से 25 सितंबर तक चलेगी।
नंदा देवी राजराजेश्वरी समिति के अध्यक्ष सुशील रावत, सचिव पृथ्वी सिंह रावत, 14 सयानों और देवराड़ा सिद्धपीठ मंदिर के अध्यक्ष भुवन चंद्र हटवाल ने दिनपट्टा जारी किया। थराली के देवराड़ा मंदिर में हुई बैठक में लोकजात और आगामी राजजात के पड़ावों की समस्याओं पर विचार किया गया। कार्यक्रम के तहत 5 सितंबर को सिद्धपीठ कुरूड़ से नंदा की डोली रवाना होगी। 18 सितंबर को वेदनी में पूजा-अर्चना के बाद 25 सितंबर को मां नंदा राजराजेश्वरी की डोली सिद्धपीठ देवराड़ा में विराजमान होगी। सुशील रावत ने बताया कि लोकजात वार्षिक होती है जबकि राजजात राजा के अनुसार होगी। उन्होंने पड़ावों पर सुविधाएं जुटाने की मांग की। पृथ्वी सिंह रावत ने कहा कि गौड़ ब्राह्मण और 14 सयाने यात्रा की तैयारियां करेंगे। भुवन चंद्र हटवाल ने बताया कि कई बैठकों के बाद यह निर्णय लिया गया ताकि यात्रियों को दुर्गम पड़ावों पर समस्या न हो। अगले वर्ष 2027 में राजजात यात्रा होगी। इस अवसर पर महावीर सिंह, कलम सिंह बिष्ट, मनमोहन नेगी, प्रेम बुटोला, रणजीत सिंह, भुवन विक्रम सिंह और दर्शन सिंह रावत आदि मौजूद थे।
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ये है कार्यक्रम
5 सितंबर को कुरूड़ से चरबंग, 6 को मथकोट, 7 को उस्तोली, 8 को भेंटी, 9 को डुंग्री, 10 को सूना, 11 को चेपड़ों, 12 को धरातल्ला, 13 को इच्छोली, 14 को फल्दियागांव, 15 को मुंदोली, 16 को वाण, 17 को गैरोलीपातल, 18 को वेदनी में पूजा अर्चना के बाद बांक, 19 को ल्वाणी, 20 को उलंग्रा, 21 को बेराधार, 22 को गोठिंडा, 23 को कुराड़, 24 को ढुंगाखोली, 25 को भेंटा होते हुए यात्रा देवराड़ा मंदिर जाएगी।
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पहली बार लोकजात का दिनपट्टा देवराड़ा मंदिर से हुआ जारी
श्रीनंदा की बड़ी जात, राजजात के विवाद के बीच प्रभावित हुईं परंपराएं
छह माह कुरूड़ और छह माह देवराड़ा में प्रवास करती है मां नंदा
संवाद न्यूज एजेंसी
कर्णप्रयाग। वर्ष 2026 में मां नंदा की बड़ीजात और वर्ष 2027 में मां नंदा की राजजात के आयोजन को लेकर विवाद के बीच लोकजात का दिनपट्टा जारी हो गया है। मगर इस बार यह दिनपट्टा नंदानगर के कुरूड़ मंदिर से नहीं बल्कि थराली के और मां नंदा के ननिहाल सिद्धपीठ देवराड़ा मंदिर से जारी हुआ है।
मां नंदा की लोकजात हर वर्ष अगस्त-सितंबर माह में होती है। सिद्धपीठ कुरूड़ से शुरू होने वाली लोकजात सप्तमी में वेदनी कुंड पहुंचती है। जहां पूजा अर्चना के बाद नंदा की डोली और यात्रा वापसी करते हुए देवराड़ा पहुंचती है। इस दौरान यात्रा करीब 21 पड़ाव को पार करती है। देवराड़ा मंदिर मां नंदा का ननिहाल है। जहां छह माह तक मां नंदा प्रवास करती हैं और छह माह कुरूड़ के प्रस्थान करती हैं। लोकजात का दिनपट्टा कुरूड़ मंदिर से जारी होता है लेकिन इस बार यह देवराड़ा मंदिर से जारी हुआ है। श्रीनंदा राजजात की समन्वय समिति के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील रावत ने बताया कि यह कार्यक्रम पहले ही कुरूड़ मंदिर से जारी हो गया था। इसमें सिर्फ वेदनी से देवराड़ा तक के कार्यक्रमों को जोड़ा गया है। कुरूड़ के पुजारियों से दूरभाष पर वार्ता के बाद ही 14 सयाने, मालगुजार, थोकदार एवं देवी के हक हकूकधारियों के प्रतिनिधियों के मौजूदगी में बुधवार को देवराड़ा मंदिर से संशोधित दिनपट्टा (कार्यक्रम) जारी किया गया। वहीं कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष नरेश गौड़ से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि उनको इस कार्यक्रम की कोई जानकारी नहीं है।