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Chamoli News: गेहूं के लिए नुकसान तो कोदा-झंगोरा के लिए लाभदायक है बारिश
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Mon, 11 May 2026 04:52 PM IST
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जिन क्षेत्रों में गेहूं की कटाई नहीं हो पाई वहां काश्तकार हैं परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। इस समय बेमौसम हो रही बारिश जहां गेहूं की फसल के लिए नुकसानदायक है वहीं कोदा-झंगोरा की फसल के लिए यह काफी लाभकारी साबित होगा। खेत तैयार करने से लेकर बीज बोने के लिए खेतों में अच्छी नमी हो गई है।
इस समय चमोली जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में गेहूं की कटाई चल रही है जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों के गांवों में गेहूं अभी पक रहा है। मगर पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश और ओलावृष्टि ने इन काश्तकारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इससे गेहूं के खराब होने का खतरा बना हुआ है। वहीं निजमुला घाटी के मोली हडुंग गांव में ओलावृष्टि होने से कई खेतों में गेहूं को नुकसान हुआ है। ग्राम प्रधान भगत फरस्वाण ने बताया कि यह बारिश व ओलावृष्टि गेहूं को खराब कर रही है। वहीं जिन क्षेत्रों में गेहूं की फसल कट चुकी है वहां के लिए बारिश लाभकारी मानी जा रही है। धान, झंगोरा व कोदा बोने के लिए खेत तैयार करने में काश्तकारों को आसानी होगी। खासकर जिन क्षेत्रों में पारंपरिक बैलों से खेत जोते जाते हैं वहां ज्यादा आसानी होगी। खेत में नमी होने पर बीज जल्दी अंकुरित हो जाएगा। मुख्य कृषि अधिकारी जेपी तिवारी का कहना है कि करीब 90 प्रतिशत काश्तकार गेहूं निकाल चुके हैं। वहीं आगामी फसल के लिए यह बारिश अच्छी साबित होगी। इससे काश्तकारों को खेत तैयार करने में सुविधा रहेगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। इस समय बेमौसम हो रही बारिश जहां गेहूं की फसल के लिए नुकसानदायक है वहीं कोदा-झंगोरा की फसल के लिए यह काफी लाभकारी साबित होगा। खेत तैयार करने से लेकर बीज बोने के लिए खेतों में अच्छी नमी हो गई है।
इस समय चमोली जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में गेहूं की कटाई चल रही है जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों के गांवों में गेहूं अभी पक रहा है। मगर पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश और ओलावृष्टि ने इन काश्तकारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इससे गेहूं के खराब होने का खतरा बना हुआ है। वहीं निजमुला घाटी के मोली हडुंग गांव में ओलावृष्टि होने से कई खेतों में गेहूं को नुकसान हुआ है। ग्राम प्रधान भगत फरस्वाण ने बताया कि यह बारिश व ओलावृष्टि गेहूं को खराब कर रही है। वहीं जिन क्षेत्रों में गेहूं की फसल कट चुकी है वहां के लिए बारिश लाभकारी मानी जा रही है। धान, झंगोरा व कोदा बोने के लिए खेत तैयार करने में काश्तकारों को आसानी होगी। खासकर जिन क्षेत्रों में पारंपरिक बैलों से खेत जोते जाते हैं वहां ज्यादा आसानी होगी। खेत में नमी होने पर बीज जल्दी अंकुरित हो जाएगा। मुख्य कृषि अधिकारी जेपी तिवारी का कहना है कि करीब 90 प्रतिशत काश्तकार गेहूं निकाल चुके हैं। वहीं आगामी फसल के लिए यह बारिश अच्छी साबित होगी। इससे काश्तकारों को खेत तैयार करने में सुविधा रहेगी।
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