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Haridwar News: रवासन नदी पर झूला पुल की मांग तेज, बरसात में सात हजार की आबादी परेशान
Sat, 01 Aug 2026 05:34 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Sat, 01 Aug 2026 05:34 PM IST
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- लालढांग पहुंचने के लिए सात से दस किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा
लालढांग। लालढांग क्षेत्र के रसूलपुर, रसूलपुर गोट और आर्यनगर के ग्रामीणों ने रवासन नदी पर झूला पुल निर्माण की मांग एक बार फिर उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने से आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है और उन्हें लालढांग पहुंचने के लिए सात से 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार तीनों गांवों की करीब सात हजार आबादी के लिए लालढांग की दूरी सामान्य दिनों में एक से चार किलोमीटर ही है लेकिन बीच में रवासन नदी होने के कारण बरसात में मुश्किलें बढ़ जाती हैं। क्षेत्र के लोगों को बाजार, बैंक, स्वास्थ्य सेवाओं सहित अन्य जरूरी कार्यों के लिए रोजाना लालढांग आना-जाना पड़ता है। वहीं स्कूली बच्चों को भी मीठीबेरी स्थित पुल से होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है जिससे चार माह तक परेशानी झेलनी पड़ती है।
रसूलपुर-मीठीबेरी के ग्राम प्रधान कमलेश द्विवेदी ने बताया कि झूला पुल निर्माण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पुल बनने से ग्रामीणों को लंबा चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और आवागमन आसान होगा। पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद ने बताया कि झूला पुल निर्माण की प्रथम चरण की प्रक्रिया चल रही है। संबंधित अधिकारियों को प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही पुल निर्माण कार्य का शुभारंभ कराया जाएगा।
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लालढांग। लालढांग क्षेत्र के रसूलपुर, रसूलपुर गोट और आर्यनगर के ग्रामीणों ने रवासन नदी पर झूला पुल निर्माण की मांग एक बार फिर उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने से आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है और उन्हें लालढांग पहुंचने के लिए सात से 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार तीनों गांवों की करीब सात हजार आबादी के लिए लालढांग की दूरी सामान्य दिनों में एक से चार किलोमीटर ही है लेकिन बीच में रवासन नदी होने के कारण बरसात में मुश्किलें बढ़ जाती हैं। क्षेत्र के लोगों को बाजार, बैंक, स्वास्थ्य सेवाओं सहित अन्य जरूरी कार्यों के लिए रोजाना लालढांग आना-जाना पड़ता है। वहीं स्कूली बच्चों को भी मीठीबेरी स्थित पुल से होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है जिससे चार माह तक परेशानी झेलनी पड़ती है।
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रसूलपुर-मीठीबेरी के ग्राम प्रधान कमलेश द्विवेदी ने बताया कि झूला पुल निर्माण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पुल बनने से ग्रामीणों को लंबा चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और आवागमन आसान होगा। पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद ने बताया कि झूला पुल निर्माण की प्रथम चरण की प्रक्रिया चल रही है। संबंधित अधिकारियों को प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही पुल निर्माण कार्य का शुभारंभ कराया जाएगा।
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