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Haridwar News: चेक बाउंस मामले में राहुल धीमान को बरी किया
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Wed, 22 Apr 2026 05:19 PM IST
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- शिकायतकर्ता साबित नहीं कर सका आरोप अदालत ने पाया निर्दोष
- अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने किया दोषमुक्त
रोशनाबाद। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में राहुल धीमान को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता, सचिन कुमार पर लगाए गए आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहे।
सचिन कुमार ने राहुल धीमान के खिलाफ मामला दायर किया था जिसमें आरोप था कि धीमान ने उनसे दो लाख रुपये उधार लिए थे और सुरक्षा के तौर पर चार चेक दिए थे। शिकायतकर्ता ने चेक संख्या 884332 को दो लाख रुपये के लिए बैंक में प्रस्तुत किया जो धन के अभाव में रद हो गया। राहुल धीमान ने अदालत में तर्क दिया कि उन्होंने फरवरी 2022 तक पूरी राशि ऑनलाइन और नकद माध्यम से चुका दी थी। बताया कि जब उन्होंने अपने चेक वापस मांगे तो सचिन कुमार ने कहा कि वे खो गए हैं। धीमान ने कुमार के खिलाफ चेकों के दुरुपयोग के संबंध में एक प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी। अदालत ने शिकायतकर्ता के विरोधाभासी बयानों पर गौर किया जिसमें उन्होंने पुलिस को अलग-अलग बकाया राशि बताई थी। शिकायतकर्ता ने स्वयं स्वीकार किया कि दो लाख रुपये का ऋण पुलिस की मध्यस्थता से सुलझा लिया गया था।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने संभावनाओं की प्रबलता के आधार पर अपना बचाव साबित किया। अदालत ने पाया कि चेक केवल सुरक्षा के तौर पर दिए गए थे। शिकायतकर्ता के बैंक विवरण और प्रति परीक्षण में दिए गए बयानों में विसंगतियां थीं। यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने शिकायतकर्ता का ऋण चुका दिया था।
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- अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने किया दोषमुक्त
रोशनाबाद। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में राहुल धीमान को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता, सचिन कुमार पर लगाए गए आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहे।
सचिन कुमार ने राहुल धीमान के खिलाफ मामला दायर किया था जिसमें आरोप था कि धीमान ने उनसे दो लाख रुपये उधार लिए थे और सुरक्षा के तौर पर चार चेक दिए थे। शिकायतकर्ता ने चेक संख्या 884332 को दो लाख रुपये के लिए बैंक में प्रस्तुत किया जो धन के अभाव में रद हो गया। राहुल धीमान ने अदालत में तर्क दिया कि उन्होंने फरवरी 2022 तक पूरी राशि ऑनलाइन और नकद माध्यम से चुका दी थी। बताया कि जब उन्होंने अपने चेक वापस मांगे तो सचिन कुमार ने कहा कि वे खो गए हैं। धीमान ने कुमार के खिलाफ चेकों के दुरुपयोग के संबंध में एक प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी। अदालत ने शिकायतकर्ता के विरोधाभासी बयानों पर गौर किया जिसमें उन्होंने पुलिस को अलग-अलग बकाया राशि बताई थी। शिकायतकर्ता ने स्वयं स्वीकार किया कि दो लाख रुपये का ऋण पुलिस की मध्यस्थता से सुलझा लिया गया था।
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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने संभावनाओं की प्रबलता के आधार पर अपना बचाव साबित किया। अदालत ने पाया कि चेक केवल सुरक्षा के तौर पर दिए गए थे। शिकायतकर्ता के बैंक विवरण और प्रति परीक्षण में दिए गए बयानों में विसंगतियां थीं। यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने शिकायतकर्ता का ऋण चुका दिया था।

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