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दुगड्डा : खोह नदी में झील निर्माण की मांग ने पकड़ा जोर
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Sun, 15 Mar 2026 05:17 PM IST
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व्यापारियों को होगा लाभ, पर्यटन व्यवसाय को लगेंगे पंख
पलायन पर लगेगा अंकुश, सीएम घोषणा में शामिल है झील निर्माण
दुगड्डा (कोटद्वार)। खोह नदी में झील निर्माण की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि झील निर्माण से क्षेत्र में पर्यटन व्यवसाय को पंख लगेंगे। इससे व्यापारियों व लोगों को लाभ मिलेगा और क्षेत्र से हो रहे पलायन पर भी अंकुश लगेगा।
करीब डेढ़ वर्ग किमी में फैला पालिका क्षेत्र दुगड्डा लंगूरगाड व सिलगाड नदी के संगम पर स्थित है। इसके बाद दोनों नदियां मिलकर खोह नदी का स्वरूप ले लेती हैं। इन नदियों के पानी का उपयोग निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में हाइड्रम योजना के माध्यम से कृषि कार्यों के लिए किया जाता था। दोनों नदियों में जल संरक्षण कार्य न कराए जाने व कृषि जोत बंजर होने से प्राकृतिक जलस्रोत विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गए हैं।
नदियों में निरंतर जल प्रवाह बनाए रखने और बरसात समाप्त होने के बाद जल संरक्षण के लिए झील ही एकमात्र विकल्प नजर आता है। इसे देखते हुए पिछले साल शहीद मेले में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मुख्यमंत्री से क्षेत्रीय विधायक रेनू बिष्ट ने दुगड्डा में झील का निर्माण कराने की मांग की थी।
व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष जयप्रकाश डबराल, व्यापारी बीएस भंडारी, पूर्व सैनिक जगमोहन सिंह रावत ने कहा कि पहाड़ों के प्राकृतिक सौंदर्य से रूबरू होने के लिए वीकेंड व पर्यटन सीजन में बाहरी राज्यों से सैकड़ों पर्यटक पहुंचते हैं। दुगड्डा के निकट नदी में झील का निर्माण कराने से पर्यटकों के लिए यह आकर्षण का केंद्र बन सकता है। पर्यटकों के रुकने से व्यापारियों को इसका लाभ मिलेगा। क्षेत्र में हो रहे पलायन पर भी अंकुश लगेगा। क्षेत्रवासियों ने अविलंब झील का निर्माण कराने की मांग उठाई है।
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दुगड्डा में झील निर्माण की डीपीआर गठन के लिए प्राक्कलन शासन को भेजा गया है जिसमें सर्वेक्षण व डीपीआर तैयार किया जाना है।
- कुलदीप पाल, एसडीओ सिंचाई खंड दुगड्डा।
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पलायन पर लगेगा अंकुश, सीएम घोषणा में शामिल है झील निर्माण
दुगड्डा (कोटद्वार)। खोह नदी में झील निर्माण की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि झील निर्माण से क्षेत्र में पर्यटन व्यवसाय को पंख लगेंगे। इससे व्यापारियों व लोगों को लाभ मिलेगा और क्षेत्र से हो रहे पलायन पर भी अंकुश लगेगा।
करीब डेढ़ वर्ग किमी में फैला पालिका क्षेत्र दुगड्डा लंगूरगाड व सिलगाड नदी के संगम पर स्थित है। इसके बाद दोनों नदियां मिलकर खोह नदी का स्वरूप ले लेती हैं। इन नदियों के पानी का उपयोग निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में हाइड्रम योजना के माध्यम से कृषि कार्यों के लिए किया जाता था। दोनों नदियों में जल संरक्षण कार्य न कराए जाने व कृषि जोत बंजर होने से प्राकृतिक जलस्रोत विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गए हैं।
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नदियों में निरंतर जल प्रवाह बनाए रखने और बरसात समाप्त होने के बाद जल संरक्षण के लिए झील ही एकमात्र विकल्प नजर आता है। इसे देखते हुए पिछले साल शहीद मेले में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मुख्यमंत्री से क्षेत्रीय विधायक रेनू बिष्ट ने दुगड्डा में झील का निर्माण कराने की मांग की थी।
व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष जयप्रकाश डबराल, व्यापारी बीएस भंडारी, पूर्व सैनिक जगमोहन सिंह रावत ने कहा कि पहाड़ों के प्राकृतिक सौंदर्य से रूबरू होने के लिए वीकेंड व पर्यटन सीजन में बाहरी राज्यों से सैकड़ों पर्यटक पहुंचते हैं। दुगड्डा के निकट नदी में झील का निर्माण कराने से पर्यटकों के लिए यह आकर्षण का केंद्र बन सकता है। पर्यटकों के रुकने से व्यापारियों को इसका लाभ मिलेगा। क्षेत्र में हो रहे पलायन पर भी अंकुश लगेगा। क्षेत्रवासियों ने अविलंब झील का निर्माण कराने की मांग उठाई है।
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दुगड्डा में झील निर्माण की डीपीआर गठन के लिए प्राक्कलन शासन को भेजा गया है जिसमें सर्वेक्षण व डीपीआर तैयार किया जाना है।
- कुलदीप पाल, एसडीओ सिंचाई खंड दुगड्डा।